रैपिड फायर
भारत द्वारा प्रमुख रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर
- 31 Dec 2025
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भारत ने आधुनिक सशस्त्र बल के हथियारों तथा उन्नत नौसैनिक टॉरपीडो को शामिल करने हेतु 4,666 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किये हैं, जिससे परिचालन क्षमता सुदृढ़ होगी और स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- भारतीय सेना और नौसेना की पुरानी राइफलों को बदलने के लिए भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स (PLR Systems) से 4.25 लाख से अधिक क्लोज़ क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन खरीदी जाएंगी।
- ये कार्बाइन अपने कॉम्पैक्ट डिज़ाइन और उच्च फायरिंग रेट के कारण शहरी व संकीर्ण क्षेत्रों में युद्ध के लिए अत्यंत प्रभावी हैं।
- इनकी खरीद से न केवल सेना की मारक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों को सफल बनाते हुए स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और MSME सेक्टर को भी नई मज़बूती प्रदान करेगी।
- कलवरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट-75) की पनडुब्बियों के लिये WASS सबमरीन सिस्टम्स (इटली) से 48 हैवीवेट टॉरपीडो खरीदे जाएंगे। इनकी डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच निर्धारित है, जिससे भारत की अंडरवॉटर वारफेयर क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
- प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियाँ भारतीय नौसेना की वे अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन हैं, जो हिंद महासागर में अंडरवॉटर वारफेयर, गुप्त निगरानी और समुद्री प्रभुत्व सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
- वित्त वर्ष 2025-26 में, रक्षा मंत्रालय ने 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किये हैं, जो रक्षा आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है