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चकमा स्वायत्त ज़िला परिषद में राज्यपाल शासन

  • 15 Jan 2026
  • 18 min read

स्रोत: द हिंदू

मिज़ोरम के राज्यपाल ने चकमा स्वायत्त ज़िला परिषद (CADC) में राज्यपाल शासन को अगले छह महीने के लिये बढ़ा दिया है, यह कहते हुए कि राजनीतिक अस्थिरता अभी भी बनी हुई है, जबकि राज्य मंत्रिमंडल ने इसके विस्तार का विरोध किया था।

  • चकमा स्वायत्त ज़िला परिषद में राज्यपाल शासन सबसे पहले जुलाई 2025 में लंबे समय तक चल रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण लगाया गया था।
  • चकमा स्वायत्त ज़िला परिषद: इसे मिज़ोरम में चकमा लोगों के राजनीतिक और सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिये भारतीय संविधान के छठे अनुसूची के तहत वर्ष 1972 में स्थापित किया गया था।
    • यह अपने क्षेत्राधिकार के भीतर निर्दिष्ट विषयों पर विधायी, कार्यकारी और न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करता है।
  • चकमा समुदाय: मिज़ोरम में मिज़ो के बाद चकमा (Chakma) दूसरी सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है जो चकमा (चंगमा भजचारे) भाषा बोलते हैं।
    • ये एक बौद्ध समुदाय है, जो परंपरागत रूप से झूम कृषि करता है और चटगाँव हिल ट्रैक्ट्स तथा भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों (मुख्य रूप से मिज़ोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश) में निवासरत है।
  • छठी अनुसूची के तहत ज़िला परिषद: छठी अनुसूची का उद्देश्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम में जनजातीय क्षेत्रों के आत्म-शासन को सुनिश्चित करना है, साथ ही जनजातीय भूमि, संसाधनों, संस्कृति और पहचान का अनुरक्षण करना है।
    • अनुच्छेद 244(2) के तहत, इन क्षेत्रों का प्रशासन स्वायत्त ज़िला परिषद (ADC) के रूप में किया जाता है, जिसे आगे स्वायत्त क्षेत्रों में विभाजित भी किया गया है।
      • राज्यपाल के पास इन क्षेत्रों का गठन करने, परिवर्तित करने या पुनर्गठित करने के अधिकार हैं।
    • प्रत्येक स्वायत्त ज़िले में अधिकतम 30 सदस्यों वाली एक ज़िला परिषद होती है (जिसमें अधिकतम 4 मनोनीत और शेष निर्वाचित होते हैं) और प्रत्येक स्वायत्त क्षेत्र में एक क्षेत्रीय परिषद होती है।
    • ये परिषदें भूमि, वन (आरक्षित वनों को छोड़कर), उत्तराधिकार तथा गैर-जनजातीय साहूकारी एवं व्यापार के विनियमन से संबंधित विषयों पर क़ानून बना सकती हैं, जो राज्यपाल की स्वीकृति के अधीन होते हैं।
  • स्वायत्त परिषदों में राज्यपाल शासन: छठी अनुसूची के तहत प्रशासनिक विफलता की स्थिति में राज्यपाल किसी स्वायत्त ज़िला परिषद (ADC) में हस्तक्षेप कर सकता है और अस्थायी रूप से उसकी शक्तियों को सँभाल सकता है।
    • ऐसा हस्तक्षेप राज्य सरकार के परामर्श से किया जाना अपेक्षित है, जो संघीय भावना के अनुरूप हो।

और पढ़ें: स्वायत्त ज़िला परिषद

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