प्रारंभिक परीक्षा
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना
- 04 Feb 2026
- 57 min read
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026–27 में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना (ECMS) के लिये वित्त आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है। यह कदम वर्ष 2030–31 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारितंत्र के निर्माण के लक्ष्य के अनुरूप है तथा इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रमुख नेतृत्वकर्त्ता के रूप में अग्रसर करना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- ECMS: इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना का प्रारंभ अप्रैल 2025 में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा किया गया था। इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVCs) के साथ एकीकृत करना एवं घरेलू तथा वैश्विक निवेश को इस क्षेत्र में आकर्षित करते हुए एक स्वावलंबी इलेक्ट्रॉनिक्स घटक पारितंत्र विकसित करना है।
- प्रोत्साहन संरचना: ECMS के अंतर्गत टर्नओवर-आधारित या पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आधारित या दोनों प्रकार के मिश्रित वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाते हैं। इन प्रोत्साहनों का एक हिस्सा रोज़गार सृजन से भी संबद्ध है।
- प्रोत्साहन पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर उन इकाइयों को दिये जाते हैं जो शीघ्र उत्पादन आरंभ करने के लिये तैयार हों।
- अवधि: योजना की कुल अवधि छह वर्ष है। टर्नओवर-आधारित प्रोत्साहन हेतु एक वर्ष की जेस्टेशन अवधि निर्धारित है, जबकि पूंजीगत व्यय आधारित प्रोत्साहन पाँच वर्षों तक उपलब्ध रहता है।
- योजना के लक्षित क्षेत्र:
- सब-असेंबली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले यूनिट
- मूल घटक: मल्टी-लेयर PCB, कैपेसिटर, रेज़िस्टर
- पूंजीगत उपकरण: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाइयों में प्रयुक्त मशीनरी
पर है। ये मिलकर मोबाइल फोन के बिल ऑफ मैटीरियल (BoM) का लगभग 90% भाग बनाते हैं।
- निवेश परिदृश्य: दिसंबर 2025 तक इस योजना के अंतर्गत ₹1.15 लाख करोड़ की निवेश प्रतिबद्धताएँ प्राप्त हुईं, जो प्रारंभिक लक्ष्य ₹59,350 करोड़ से लगभग दोगुनी हैं।
- अनुमानित आर्थिक लाभ: ECMS से छह वर्षों में लगभग ₹10.34 लाख करोड़ के उत्पाद, 1.41 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार तथा अनेक अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसरों के सृजन की संभावना है।
- पिछले एक दशक में उत्पादन में छह गुना वृद्धि के आधार पर, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को भारत के दूसरे सबसे बड़े निर्यात उद्योग के रूप में स्थापित करने में यह योजना सहायक सिद्ध होगी।
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के साथ समन्वय: इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के लिये एक सहायक तंत्र के रूप में कार्य करती है तथा देश में सामग्री, उपकरण एवं उन्नत पैकेजिंग को समाहित करने वाले समग्र इलेक्ट्रॉनिक्स–सेमीकंडक्टर पारितंत्र के निर्माण में योगदान देती है।
भारत की निर्यात सूची के एक प्रमुख घटक के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग
- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में संवृद्धि: आर्थिक समीक्षा 2025–26 के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा तथा सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित होने वाला निर्यात क्षेत्र बन गया है, जबकि वर्ष 2021–22 में यह सातवें स्थान पर था।
- वित्त वर्ष 2026 की प्रथम छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 22.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिससे यह क्षेत्र भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनने की दिशा में अग्रसर है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2014–15 में ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹11.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया।
- भारत वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है, जहाँ पिछले एक दशक में मोबाइल फोन उत्पादन में 28 गुना वृद्धि हुई है।
- रोज़गार सृजन: इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने पिछले 11 वर्षों में लगभग 25 लाख रोज़गार अवसरों का सृजन किया है, जिससे यह क्षेत्र समावेशी आर्थिक संवृद्धि का एक प्रमुख चालक बनकर उभरा है।
सहयोगी नीतिगत ढाँचा
- उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: यह योजना 14 क्षेत्रों को आच्छादित करती है। वर्ष 2020 के पश्चात इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आए लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में से लगभग 70% PLI लाभार्थी इकाइयों से संबद्ध है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति (प्रासंगिक विधानों एवं विनियमों के अधीन) ने वैश्विक निवेश आकर्षण को सुदृढ़ किया है।
- संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (EMC 2.0) योजना: यह योजना विश्वस्तरीय अवसंरचना के विकास पर केंद्रित है, जिससे बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा मिलता है।
- इलेक्ट्रॉनिक घटक एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (SPECS): यह योजना उच्च-मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिये पूंजीगत व्यय पर 25% वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (NPE) 2019: यह एक समग्र नीति है, जिसका उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिज़ाइन एवं विनिर्माण (ESDM) का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- वित्तीय प्रोत्साहन (केंद्रीय बजट 2026–27): बजट में माइक्रोवेव ओवन के इनपुट्स पर मूल सीमा प्रशुल्क (BCD) से छूट तथा इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के पुर्ज़ों पर सामाजिक कल्याण अधिभार से छूट की घोषणा की गई, जिससे क्षेत्र की लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना क्या है?
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा अप्रैल 2025 में प्रारंभ की गई एक योजना है। इसका उद्देश्य टर्नओवर-आधारित तथा पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से एक स्वावलंबी इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण पारितंत्र का निर्माण करना है।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना की अवधि एवं प्रोत्साहन ढाँचा क्या है?
इस योजना की कुल अवधि छह वर्ष है। इसमें टर्नओवर-आधारित प्रोत्साहन हेतु एक वर्ष की जेस्टेशन अवधि निर्धारित है, जबकि कैपेक्स-आधारित प्रोत्साहन पाँच वर्षों के लिये उपलब्ध हैं। प्रोत्साहनों का एक हिस्सा रोज़गार सृजन से भी संबद्ध है।
3. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना के अंतर्गत किन क्षेत्रों को लक्षित किया गया है?
इस योजना के अंतर्गत सब-असेंबली, मूल (बेयर) घटक तथा पूंजीगत उपकरणों को लक्षित किया गया है, जो संयुक्त रूप से मोबाइल फोन के बिल ऑफ मैटीरियल (BoM) का लगभग 90% हिस्सा बनाते हैं।
4. निर्यात और रोज़गार के संदर्भ में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
इस योजना से ₹10 लाख करोड़ से अधिक के उत्पाद, 1.41 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार अवसरों का सृजन होने की अपेक्षा है। साथ ही, यह इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत से निर्यात की दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।
5. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स नीतियों के लिये किस प्रकार एक पूरक के रूप में कार्य करती है?
यह योजना उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI), इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0, EMC 2.0, SPECS तथा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (NPE) 2019 के साथ समन्वय में संचालित है और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला को समग्र रूप में सुदृढ़ बनाती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न निम्नलिखित में से किसके अंगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिये ''R2 'व्यवहार संहिता (R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज) साधन उपलब्ध कराती है? (2021)
(A) इलेक्ट्राॅनिक पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय दृष्टि से विश्वसनीय व्यवहार
(B) रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत 'अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्र भूमि' का परिस्थितिक प्रबंधन
(C) निम्नीकृत भूमि पर कृषि फसलों की खेती का संधारणीय व्यवहार
(D) प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में 'पर्यावरणीय प्रभाव आकलन
उत्तर: (A)