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पी-नोट के माध्यम से निवेश में गिरावट

  • 04 Mar 2022
  • 4 min read

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के आँकड़ों के अनुसार, भारतीय बाज़ारों में पी-नोट (P-Notes) निवेश के मूल्य में दिसंबर 2021 की तुलना में जनवरी 2022 में गिरावट आई है।

पी-नोट में गिरावट का कारण:

  • यह उम्मीदों के अनुरूप है क्योंकि विदेशी निवेशक जनवरी 2022 के दौरान आक्रामक विक्रेता थे, जो अक्तूबर 2021 के बाद से देखी गई प्रवृत्ति को जारी रखे हुए है।
  • ओमीक्रोन के बाद निवेशकों की आशंका के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेज़ी से सुधार की उम्मीद थी। हालाँकि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी पर 'तेज़ और त्वरित' रुख अपनाए जाने के कारण निवेशक ज़ोखिम वाली संपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी में कटौती कर रहे हैं।
  • यूक्रेन की भू-राजनीतिक स्थिति ने पहले से ही भयभीत वैश्विक निवेशकों पर और दबाव बना दिया है। यह उम्मीद की जाती है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अपना नकारात्मक रुख तब तक जारी रखेंगे जब तक कि यूक्रेन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती।

‘सहभागी-नोट’ क्या है?

  • ‘पी-नोट्स’ या ‘सहभागी-नोट’ पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा जारी किये गए ‘ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स’ (ODIs) हैं, जो उन विदेशी निवेशकों को जारी किये जाते हैं जो सीधे स्वयं को पंजीकृत किये बिना भारतीय शेयर बाज़ारों का हिस्सा बनना चाहते हैं।
    • पी-नोट्स में भारतीय स्टॉक उनकी अंतर्निहित संपत्ति के रूप में होते हैं।
    • FPIs वे अनिवासी हैं जो भारतीय प्रतिभूतियों जैसे- शेयर, सरकारी बॉण्ड, कॉरपोरेट बॉण्ड आदि में निवेश करते हैं।
  • यद्यपि ‘पी-नोट’ धारकों के लिये पंजीकरण नियम कम कठोर हैं, उन्हें सेबी की उचित परिश्रम प्रक्रिया से गुज़रना होता है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश: 

  • ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेश’ (FPI) के तहत किसी अन्य देश में वित्तीय संपत्तियाँ रखना शामिल है।
  • इसमें स्टॉक, जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीद), बॉण्ड, म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शामिल हो सकते हैं।
    • ‘ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीद’ (GDR) किसी विदेशी कंपनी में शेयरों के लिये एक से अधिक देशों में जारी किया गया एक बैंक प्रमाणपत्र है।
  • FPI, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के साथ निवेशकों के लिये विदेशी अर्थव्यवस्था, विशेषकर खुदरा निवेशकों में भाग लेने के सामान्य तरीकों में से एक है।
  • FDI के विपरीत FPI में निष्क्रिय स्वामित्व होता है; निवेशकों का उपक्रमों या संपत्ति के प्रत्यक्ष स्वामित्व या किसी कंपनी में हिस्सेदारी पर कोई नियंत्रण नहीं होता।

स्रोत: द हिंदू

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