प्रारंभिक परीक्षा
एथिल क्लोरोफॉर्मेट की एंटी-डंपिंग जाँच
- 23 Mar 2026
- 51 min read
चर्चा में क्यों?
व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR), जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आता है, ने घरेलू रासायनिक उद्योग की सुरक्षा के लिये चीन से कथित एथिल क्लोरोफॉर्मेट के अवैध आयात (डंपिंग) की जाँच शुरू की है।
- संबंधित विकास में DGTR ने चीन, रूस तथा संयुक्त अरब अमीरात से आयात होने वाले हेक्सामाइन, जो एक और रासायनिक इंटरमीडिएट है, के खिलाफ एक अलग एंटी-डंपिंग जाँच भी शुरू की है।
एथिल क्लोरोफॉर्मेट क्या है?
- परिचय: एथिल क्लोरोफॉर्मेट एक अत्यंत प्रतिक्रियाशील कार्बनिक यौगिक है। यह क्लोरोफॉर्मिक अम्ल का एथिल एस्टर है और मुख्य रूप से कार्बनिक संश्लेषण में बहुमुखी अभिकर्मक (Versatile Reagent) के रूप में उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल तथा कृषि रसायन उद्योगों में।
- जब यह पानी के साथ प्रतिक्रिया (हाइड्रोलिसिस) करता है, तो यह इथेनॉल, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड में विघटित हो जाता है।
- मुख्य अनुप्रयोग:
- फार्मास्यूटिकल्स का संश्लेषण: यह विभिन्न दवाओं के उत्पादन में एक महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती यौगिक है, जिसमें संशोधित पेनिसिलिन और खदानों में अयस्क विभाजन एजेंट शामिल हैं।
- औद्योगिक उपयोग: यह PVC का स्थिरीकरणकर्त्ता के रूप में कार्य करता है और जैविक रसायन, जैसे- हर्बिसाइड्स तथा कीटनाशक, के संश्लेषण में उपयोग किया जाता है।
- कार्बोक्सिलिक अम्लों की सक्रियता: यह कार्बोक्सिलिक अम्लों के साथ प्रतिक्रिया करके मिश्रित एनहाइड्राइड्स बनाता है, जो अत्यधिक प्रतिक्रियाशील मध्यवर्ती यौगिक होते हैं और इन्हें एस्टर या एमाइड बनाने के लिये उपयोग किया जाता है।
- जोखिम:
- विषाक्तता: यह सांस के ज़रिये शरीर में जाने पर प्राणघातक हो सकता है और इसके सेवन (गले से नीचे उतरने) से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। अल्पकालिक संपर्क से फुफ्फुसीय जलभराव (फेफड़ों में तरल पदार्थ) हो सकता है।
- संक्षारीयता: यह मज़बूत आँसू-गैस है और त्वचा, आँखों एवं श्लेष्म झिल्लियों पर एसिड जैसी जलन पैदा करता है।
- ज्वलनशीलता: यह अत्यधिक ज्वलनशील तरल है और हवा के साथ मिलकर विस्फोटक मिश्रण बना सकता है।
हेक्सामाइन एक सफेद क्रिस्टलीय, अत्यधिक घुलनशील हेटरोसायक्लिक कार्बनिक यौगिक है। इसे फॉर्मल्डिहाइड और अमोनिया से उत्पादित किया जाता है तथा यह रेजिन, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स एवं रबर एडिटिव्स बनाने में व्यापक रूप से उपयोग होता है।
- यह फ्यूल टैबलेट (स्वच्छ दहन) के रूप में भी काम करता है और दवा तथा कार्बनिक रसायन विज्ञान में भी इसके उपयोग हैं, हालाँकि यह विषैला और जलन पैदा करने वाला हो सकता है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है?
- परिचय: एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) एक सुरक्षात्मक शुल्क है, जिसे सरकार उन विदेशी आयातों पर लगाती है, जिन्हें वह न्यायसंगत बाज़ार मूल्य से कम मूल्य (इस प्रथा को ‘डंपिंग’ कहा जाता है) पर बेचा जा रहा मानती है।
- इसके अलावा काउंटरवेलिंग ड्यूटी भी होती है, जो उन सब्सिडियों के प्रभाव को समाप्त करने के लिये लगाई जाती है, जो निर्यातक देशों द्वारा दी जाती हैं। ये उपाय मिलकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में समान प्रतिस्पर्द्धा का स्तर सुनिश्चित करते हैं।
- कानूनी आधार: इसे WTO के एंटी-डंपिंग समझौते द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारत में इसे वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) द्वारा प्रबंधित किया जाता है, हालाँकि DGTR द्वारा अनुशंसित शुल्क लगाने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय द्वारा लिया जाता है।
- WTO समझौते के तहत, निर्यात मूल्य का 2% तक डी मिनिमिस (न्यूनतम स्तर) डंपिंग मार्जिन सीमा निर्धारित की गई है और यदि डंपिंग मार्जिन इस सीमा से नीचे है तो कोई एंटी-डंपिंग शुल्क नहीं लगाया जा सकता है।
- यह डी मिनिमिस सीमा विकासशील और साथ ही विकसित देशों से निर्यात के लिये समान है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी में क्या अंतर है?
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विशेषता |
एंटी-डंपिंग ड्यूटी (ADD) |
काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) |
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लक्ष्य |
निज़ी कंपनियों द्वारा अनुचित मूल्य निर्धारण। |
विदेशी सरकारों द्वारा प्रदान की गई अनुचित सब्सिडी। |
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उद्देश्य |
मूल्य अंतर को कम करना और ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ को रोकना, जो स्थानीय उद्योग को नुकसान पहुँचाता है। |
सरकारी वित्तीय सहायता के माध्यम से प्राप्त अनुचित लाभ को निष्प्रभावी करना। |
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WTO समझौता |
एंटी-डंपिंग समझौते द्वारा शासित। |
सब्सिडी और प्रतिकारी उपायों पर समझौते (SCM) द्वारा शासित। |
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ड्यूटी कैलकुलेशन |
डंपिंग मार्जिन के बराबर (सामान्य मूल्य और निर्यात मूल्य के बीच का अंतर, तुलनीयता के लिये समायोजित)। शुल्क को इसी मार्जिन पर सीमित रखा जाता है। |
निर्यातित उत्पाद के लिये उत्तरदायी सब्सिडी की राशि (सब्सिडी मार्जिन) के बराबर। शुल्क इस राशि पर सीमित होता है। |
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जाँच की आवश्यकता |
इसकी आवश्यकता है: (1) डंपिंग, (2) घरेलू उद्योग को भौतिक क्षति (या इसका खतरा), और (3) दोनों के बीच कारण संबंध। |
इसकी आवश्यकता है: (1) एक विशिष्ट सब्सिडी का अस्तित्व, (2) भौतिक क्षति (या इसका खतरा), और (3) कारण संबंध। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. एंटी-डंपिंग जाँच में ‘डी मिनिमिस’ सीमा क्या है?
यह WTO द्वारा अनिवार्य 2% की सीमा है; यदि डंपिंग मार्जिन निर्यात मूल्य के इस प्रतिशत से कम है, तो कानूनी तौर पर कोई एंटी-डंपिंग शुल्क (ADD) नहीं लगाया जा सकता है।
2. ADD का प्राथमिक कारण CVD से किस प्रकार भिन्न है?
ADD फर्म-स्तरीय प्रिडेटरी प्राइसिंग (घरेलू लागत से कम पर बिक्री) को लक्षित करती है, जबकि CVD सरकार-स्तरीय सब्सिडी को लक्षित करती है, जो अनुचित प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ प्रदान करती हैं।
3. भारत में व्यापार उपचारात्मक शुल्कों को अधिसूचित करने में कौन-सी नोडल एजेंसियाँ शामिल हैं?
DGTR (वाणिज्य मंत्रालय) जाँच करता है और शुल्क की सिफारिश करता है, जबकि वित्त मंत्रालय अंतिम प्राधिकार है, जो इसे लागू करता है।
4. एथिल क्लोरोफॉर्मेट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह फार्मास्यूटिकल और कृषि-रसायन उद्योगों के लिये एक महत्त्वपूर्ण कार्बनिक मध्यवर्ती के रूप में कार्य करता है, जिससे दवा और कीटनाशक विनिर्माण लागत के लिये इसका मूल्य निर्धारण महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. 'एग्रीमेंट ऑन एग्रीकल्चर', 'एग्रीमेंट ऑन दि एप्लीकेशन ऑफ सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी मेजर्स' और 'पीस क्लॉज़' शब्द प्रायः समाचारों में किसके मामलों के संदर्भ में आते हैं? (2015)
(a) खाद्य और कृषि संगठन
(b) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का रूपरेखा सम्मेलन
(c) विश्व व्यापार संगठन
(d) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
उत्तर: (c)
प्रश्न. निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में कभी-कभी समाचारों में 'एम्बर बॉक्स, ब्लू बॉक्स और ग्रीन बॉक्स' शब्द देखने को मिलते हैं? (2016)
(a) WTO मामला
(b) SAARC मामला
(c) UNFCCC मामला
(d) FTA पर भारत-EU वार्ता
उत्तर: (a)
