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राष्ट्रीय महिला आयोग का 34वाँ स्थापना दिवस

  • 31 Jan 2026
  • 43 min read

स्रोत: पीआईबी 

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 31 जनवरी को अपना 34वाँ स्थापना दिवस मनाया और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिये भारत की शीर्ष वैधानिक संस्था के रूप में अपनी भूमिका की पुनः पुष्टि की।

  • इस आयोजन में “स्वास्थ्य ही सशक्तीकरण” विषय के तहत महिलाओं के स्वास्थ्य को सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ बताया गया।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के संबंध में मुख्य बिंदु क्या हैं?

  • परिचय: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना 31 जनवरी, 1992 को राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत की गई थी।
    • इसका मुख्य दायित्व महिलाओं के लिये संवैधानिक संरक्षणों की समीक्षा करना, विधायी उपायों की सिफारिश करना तथा शिकायतों के निवारण को सुगम बनाना है।
  • पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की स्थापना 'भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति' (CSWI) तथा ‘महिलाओं के लिये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (1988–2000)’ की सिफारिशों के फलस्वरूप की गई थी।
  • आयोग का गठन: केंद्र सरकार इस निकाय को नामित करती है। इसकी संरचना महिलाओं के कल्याण से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करती है।
    • एक अध्यक्ष: जो महिलाओं के हितों/मुद्दों के प्रति समर्पित हो।
    • पाँच सदस्य: कानून, श्रमिक संघवाद, प्रबंधन, महिला स्वैच्छिक संगठनों, प्रशासन या सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले क्षमता एवं सत्यनिष्ठा से युक्त व्यक्ति।
      • कम-से-कम एक सदस्य अनुसूचित जाति से तथा एक सदस्य अनुसूचित जनजाति से होना अनिवार्य है।
    • एक सदस्य-सचिव: प्रबंधन/समाजशास्त्र का विशेषज्ञ अथवा उपयुक्त अनुभव वाला कोई सिविल सेवक।
    • सभी का कार्यकाल तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो)।
  • कार्य एवं अधिदेश 
    • जाँच: संविधान के अंतर्गत महिलाओं को प्रदान किये गए संरक्षणों से संबंधित मामलों की जाँच करना।
    • प्रतिवेदन: संरक्षण प्रावधानों के कार्यान्वयन पर केंद्र सरकार को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना तथा प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अनुशंसाएँ करना।
    • विधायी समीक्षा: महिलाओं से संबंधित मौजूदा कानूनों की समीक्षा करना और कमियों या त्रुटियों को दूर करने के लिये संशोधनों का सुझाव देना।
    • स्वप्रेरणा से संज्ञान: अधिकारों से वंचित किये जाने, कानूनों के अनुपालन न होने तथा नीतिगत दिशा-निर्देशों की अवहेलना से जुड़े मामलों में स्वयं पहल करना।
    • अनुसंधान एवं अध्ययन: महिलाओं की प्रगति में बाधक कारकों (जैसे- आवास, स्वास्थ्य जोखिम) की पहचान हेतु शोध करना तथा व्यापक संख्या में महिलाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर मुकदमेबाज़ी के लिये वित्तीय सहायता देना।
    • निरीक्षण: कारागारों, रिमांड होम्स तथा महिला संस्थानों का निरीक्षण करना ताकि अभिरक्षा की परिस्थितियाँ उचित बनी रहें।
  • आयोग के अधिकार: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) को सिविल न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें शामिल हैं: व्यक्तियों को उपस्थित करना, गवाहों से शपथपूर्वक पूछताछ करना, दस्तावेज़ मांगना, सार्वजनिक अभिलेखों की मांग करना और हलफनामों (Affidavits) के माध्यम से साक्ष्य प्राप्त करना।
    • ये अधिकार इसे अर्द्ध-न्यायिक संस्था के रूप में सशक्त बनाते हैं।
    • अपने अधिदेश के बावजूद, इसे अक्सर ‘टूथलेस टाइगर’ कहा जाता है क्योंकि यह केवल अनुशंसा करने वाली संस्था है और इसके पास प्रवर्तन संबंधी सीमित शक्तियाँ हैं।
  • पहलें:
    • हेल्पलाइन: ऑनलाइन सहायता, मानसिक परामर्श और पुलिस/अस्पताल से जुड़ने के लिये व्हाट्सएप हेल्पलाइन और 24x7 महिला हेल्पलाइन शुरू की गई।
    • महिला जन सुनवाई: शिकायतों के शीघ्र निपटान के लिये व्यक्तिगत और ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा प्रदान करने वाला एक पायलट प्रोजेक्ट।
    • क्षमता निर्माण: पुलिसकर्मियों में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने तथा घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत प्रोटेक्शन ऑफिसर्स को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से LBSNAA के साथ सहयोग किया गया।
    • "शी इज़ अ चेंजमेकर" – राजनीति में महिलाएँ: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का कार्यक्रम महिलाओं के नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी को समर्थन करता है।
      • इसमें सार्वजनिक नीति, लैंगिक रूप से उत्तरदायी शासन, संचार और नेतृत्व पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
    • साइबर सुरक्षा: महिलाओं के खिलाफ साइबर खतरों पर शोध किया गया तथा "मिज़जनी ऑनलाइन" (Misogyny Online) और सोशल मीडिया उत्तरदायित्व से संबंधित जागरूकता अभियान चलाए गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

1. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) क्या है?
NCW एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना वर्ष 1992 में राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और संवर्द्धन के लिये की गई थी।

2. NCW के प्रमुख कार्य क्या हैं?
यह कानूनी संरक्षण उपायों की समीक्षा करता है, विधायी सुधारों का सुझाव देता है, शिकायतों का निपटारा करता है, शोध-कार्य करता है तथा अभिरक्षा संस्थानों का निरीक्षण करता है।

3. NCW के पास क्या शक्तियाँ हैं?
NCW को दीवानी न्यायालय के समान अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें व्यक्तियों को तलब करना, गवाहों से पूछताछ करना तथा आधिकारिक अभिलेख मंगाने की शक्ति शामिल है।

4. हाल ही में महिला सुरक्षा के लिये NCW ने क्या पहलें की हैं?
NCW ने 24×7 हेल्पलाइन, महिला जन सुनवाई, साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम और पुलिस क्षमता निर्माण जैसी पहलें शुरू की हैं।

5. भारत में महिला सशक्तीकरण के लिये NCW प्रासंगिक क्यों है?
यह नीतिगत समर्थन, शिकायत निवारण और संस्थागत सुधारों के माध्यम से लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने वाली एक शीर्ष निगरानी संस्था के रूप में कार्य करता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

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प्रश्न. महिलाएँ जिन समस्याओं का सार्वजनिक एवं निजी दोनों स्थलों पर सामना कर रही हैं, क्या राष्ट्रीय महिला आयोग उनका समाधान निकालने की रणनीति बनाने में सफल रहा है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिये। (2017)

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