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भूगोल

उच्च ऊँचाई वाले हिमालय के तापमान में वृद्धि

  • 11 Feb 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

हिमालय, अवक्षेपणीय जल वाष्प (PWV), एरोसोल, ग्रीनहाउस गैस, ऊष्मा बजट, क्षोभमंडल,

मेन्स के लिये:

भौगोलिक विशेषताएँ और उनकी अवस्थिति, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, हिमालय एवं इसका महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही किये गए एक अध्ययन के अनुसार, जलवाष्प वायुमंडल के शीर्ष (Top of the Atmosphere) पर एक सकारात्मक विकिरण प्रभाव प्रदर्शित करता है, जिसके कारण उच्च ऊँचाई वाले हिमालय में समग्र रूप से तापमान में वृद्धि होती है।

जल वाष्प (Water Vapour):

  • परिचय:
    • जल वाष्प, जल की एक गैसीय अवस्था है जिसका निर्माण जल के वाष्पीकरण द्वारा होता है।
    • यह जल के वाष्पीकरण या पानी के उबलने या बर्फ के उर्ध्वपातन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। ग्रीनहाउस गैसों में जलवाष्प सबसे प्रमुख है।
    • ग्रीनहाउस गैसों में लगभग 95%जल वाष्प की मात्रा होती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़े हुए स्तर से जल वाष्प में वृद्धि होती है जिससे तापमान गर्म होता है।
  • महत्त्व:
    • जल वाष्प विकिरण संतुलन और जल चक्र में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
    • यह वायुमंडल के जल-चक्र में एक प्रमुख तत्त्व है, जो गुप्त ऊर्जा का परिवहन करता है, यह कई बैंडों में अवशोषण और उत्सर्जन में योगदान देता है तथा बादलों के रूप में संघनित होता है जो सौर विकिरण को प्रतिबिंबित एवं अवशोषित करता है, इस प्रकार यह सीधे ऊर्जा संतुलन को प्रभावित करता है।

हालिया शोध के निष्कर्ष:

  • यह दर्शाता है कि वर्षा जल वाष्प (PWV) के कारण वायुमंडलीय विकिरण प्रभाव एरोसोल की तुलना में लगभग 3-4 गुना अधिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप नैनीताल और हनले में क्रमशः 0.94 और 0.96 K डे-1 (K=केल्विन) की वायुमंडलीय ताप दर होती है।
    • विकिरण के बल या प्रभाव का आशय वातावरण में ऊर्जा प्रवाह में परिवर्तन से है, जो जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक या मानवजनित कारकों के कारण होता है, जिसे वाट/मीटर² द्वारा मापा जाता है। यह एक वैज्ञानिक अवधारणा है जिसका उपयोग पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन में परिवर्तन के बाहरी चालकों को मापने और तुलना करने के लिये किया जाता है।
  • ये परिणाम जलवायु-संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में PWV और एरोसोल विकिरण प्रभावों के महत्त्व को उजागर करते हैं।
  • शोधकर्त्ताओं ने हिमालयी रेंज पर एरोसोल और जल वाष्प विकिरण प्रभावों के संयोजन का आकलन किया, जो विशेष रूप से क्षेत्रीय जलवायु हेतु महत्त्वपूर्ण है और हिमालयी क्षेत्र में एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस एवं जलवायु एजेंट के रूप में जल वाष्प के महत्त्व पर प्रकाश डालता है।
  • यह अध्ययन विकिरण बजट पर एरोसोल और जल वाष्प के संयुक्त प्रभाव का व्यापक अध्ययन प्रदान करेगा।
    • पृथ्वी विकिरण बजट (ERB) पृथ्वी द्वारा परावर्तित सौर विकिरण के ब्रॉडबैंड प्रवाह और पृथ्वी एवं उसके वायुमंडल द्वारा अवशोषित व उत्सर्जित लंबी तरंग विकिरण के प्रवाह का एक संयोजन है।

Earth-Radiation

अवक्षेपणीय जल वाष्प:

  • यह वायुमंडल में सबसे तेज़ी से बदलते घटकों में से एक है और मुख्य रूप से क्षोभमंडल के निचले हिस्से में एकत्र होता है।
    • क्षोभमंडल: क्षोभमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे निचली परत है और वायुमंडल का अधिकांश द्रव्यमान (लगभग 75-80%) क्षोभमंडल में होता है। अधिकांश बादल क्षोभमंडल में पाए जाते हैं। साथ ही सभी मौसमी घटनाएँ इसी परत पर घटित होती हैं। 
  • यह द्रव अवस्था में उस जल की गहराई के बराबर होता है जो वायुमंडलीय स्तंभ में जल वाष्प की समग्र उपस्थित मात्रा के संघनित और अवक्षेपित होने के परिणामस्वरूप प्राप्त होता है तथा इसका उपयोग किसी विशिष्ट स्थान पर वायुमंडलीय आर्द्रता का पता लगाने हेतु किया जाता है।

अध्ययन की आवश्यकता:

  • स्थान और समय में व्यापक परिवर्तनशीलता, शृंखला में मिश्रित प्रक्रियाओं व विषम रासायनिक प्रतिक्रियाओं के योगदान के साथ-साथ विरल माप नेटवर्क (विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में) के कारण स्थान और समय के अनुरूप PWV के जलवायु प्रभाव को सटीक रूप से निर्धारित करना मुश्किल है।
  • इसके अलावा अवलोकन संबंधी उचित आँकड़ों की कमी के कारण एरोसोल-बादल-वर्षण की अंतःक्रिया (जिसके चलते इस क्षेत्र को सर्वाधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया जाता है) को भी स्पष्ट रूप से नहीं समझा जा सका है।

हिमालय:

  • परिचय:
    • हिमालय दुनिया की सबसे ऊँची और सबसे छोटी मोड़दार पर्वत शृंखलाएँ हैं।
    • उनकी भू-वैज्ञानिक संरचना नई, कमज़ोर और लचीली हैं क्योंकि हिमालय का उत्थान एक सतत् प्रक्रिया है, जो इसे दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक बनाती है।
    • यह भारत को उसकी उत्तर-मध्य और उत्तर-पूर्वी सीमा के साथ-साथ चीन (तिब्बत) से अलग करता है।
  • क्षेत्र:
    • हिमालय का भारतीय भाग लगभग 5 लाख वर्ग किमी. (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 16.2%) क्षेत्र को कवर करता है और देश की उत्तरी सीमा का निर्माण करता है।
    • यह क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से को पानी उपलब्ध कराने के लिये ज़िम्मेदार है। गंगा और यमुना जैसी पवित्र मानी जाने वाली कई नदियाँ हिमालय से निकलती हैं।
  • शृंखलाएँ:
    • हिमालय उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा तक फैली समानांतर पर्वत श्रेणियों की एक शृंखला है। इन श्रेणियों को अनुदैर्ध्य घाटियों द्वारा अलग किया जाता है। इनमें सम्मिलित हैं-
      • ट्रांस हिमालय
      • ग्रेटर हिमालय या हिमाद्रि
      • लघु हिमालय या हिमाचल
      • शिवालिक या बाहय हिमालय
      • ईस्टर्न हिल्स या पूर्वांचल

Himalayan-Range

स्रोत: पी.आई.बी.

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