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गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019

  • 26 Jul 2019
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

लोकसभा ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 [Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019] पारित किया है।

प्रमुख बिंदु

  • विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य आतंकी अपराधों की त्वरित जाँच और अभियोजन की सुविधा प्रदान करना तथा आतंकी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान करना है।
  • इस विधेयक का किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दुरुपयोग नहीं किया जाएगा, लेकिन शहरी माओवादियों सहित भारत की सुरक्षा एवं संप्रभुता के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
  • यह संशोधन उचित प्रक्रिया तथा पर्याप्त सबूत के आधार पर ही किसी को आतंकवादी ठहराने की अनुमति देता है। गिरफ्तारी या ज़मानत प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • यह संशोधन राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक को ऐसी संपत्ति को ज़ब्त करने का अधिकार देता है जो उसके द्वारा की जा रही जाँच में आतंकवाद से होने वाली आय से बनी हो।
  • इस संशोधन में परमाणु आतंकवाद के कृत्यों के दमन हेतु अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन (2005) को सेकेंड शिड्यूल में शामिल किया गया है।

संशोधन की आवश्यकता

  • वर्तमान में किसी भी कानून में किसी को व्यक्तिगत आतंकवादी कहने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिये जब किसी आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उसके सदस्य एक नया संगठन बना लेते हैं।
  • जब कोई व्यक्ति आतंकी कार्य करता है या आतंकी गतिविधियों में भाग लेता है तो वह आतंकवाद को पोषित करता है। वह आतंकवाद को बल देने के लिये धन मुहैया कराता है अथवा आतंकवाद के सिद्धांत को युवाओं के मन में स्थापित करने का काम करता है। ऐसे दोषी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करना आवश्यक है।

संशोधन के क्रियान्वयन में बाधाएँ

  • वर्तमान में UAPA की धारा 43 के अध्याय IV और अध्याय VI के अनुसार DSP या समकक्ष पद से नीचे के अधिकारी इस कानून के तहत अपराधों की जाँच नहीं कर सकते हैं। NIA में पर्याप्त DSP की तैनाती नहीं है और इसके पास आने वाले मामलों की संख्या बराबर बढ़ती जा रही है।
  • वर्तमान में NIA में 57 स्वीकृत पदों के मुकाबले 29 DSP और 106 स्वीकृत पदों के मुकाबले 90 निरीक्षक हैं।
  • NIA के निरीक्षक आतंकी अपराधों की जाँच करने में पर्याप्त दक्ष हो चुके हैं और उपरोक्त संशोधन UAPA के अध्याय IV और अध्याय VI के तहत दंडनीय अपराधों की जाँच के लिये उन्हें और सक्षम बनाने के लिये किये जा रहे हैं।

स्रोत: PIB

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