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सामाजिक न्याय

बच्चों से संबंधित चिंताएँ

  • 23 Sep 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children's Fund-UNICEF) ने बच्चों के प्रति चिंता जताते हुए उनके लिये 8 क्षेत्रों को चुनौतीपूर्ण माना है।

प्रमुख बिंदु

चिंता के क्षेत्र

  • जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे व बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि से वैश्विक स्तर पर खाद्यान उत्पादन में कमी आएगी।
    • खाद्यान की कमी से वैश्विक स्तर पर भूख व कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या में वृद्धि होगी।
    • 500 मिलियन से अधिक बच्चे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जबकि 160 मिलियन बच्चे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं।
  • प्रदूषण (Pollution): UNICEF ने जल प्रदूषण व वायु प्रदूषण को बच्चों के लिये प्रमुख चुनौती माना है।
    • वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण जल संकट एवं जल जनित रोग बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे।
    • वर्ष 2040 तक विश्व में प्रत्येक 4 में से 1 बच्चा जल संकट से ग्रस्त क्षेत्र में निवास कर रहा होगा।
    • वर्तमान में विश्व के 90% से अधिक बच्चे प्रदूषित वायु में साँसलेते है।
  • प्रवासन (Migration): UNICEF के अनुसार हज़ारों बच्चे बिना किसी वैधानिक अनुमति के परिवार के साथ अथवा परिवार के बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन करते हैं।
    • ऐसे बच्चे हिंसा एवं शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के प्रति सुभेद्य होते हैं।
  • नागरिकताविहीन (Statelessness): प्रतिदिन जन्मे 4 में से 1 बच्चा नागरिकताविहीन होने के चलते जन्म प्रमाण-पत्र अथवा राष्ट्रीय पहचान-पत्र से वंचित रह जाता है।
    • नागरिकताविहीन होने के कारण ये बच्चे स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health): विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2016 में 62,000 किशोरों की मौत आत्महत्या करने के कारण हुई थी। 15-19 आयु वर्ग के किशोरों में मौत का तीसरा प्रमुख कारण आत्महत्या है।
    • 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों व किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य विकार पिछले 30 वर्षों से लगातार बढ़ रहे हैं।
    • डिप्रेशन युवाओं में मानसिक अक्षमता के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • प्राकृतिक आपदा व संघर्ष युक्त क्षेत्र (Conflict and Disaster zone): 75 मिलियन से अधिक बच्चों व युवाओं की शिक्षा प्राकृतिक आपदा व हिंसात्मक संघर्ष के कारण अधूरी रह गई।
    • युद्ध का सबसे पहला असर बच्चों पर ही पड़ता है।
    • 4 में से 1 बच्चा हिंसक संघर्ष या आपदा से प्रभावित देशों में रहता है।
    • जिसमें 28 मिलियन बच्चे युद्ध एवं असुरक्षा से प्रभावित हैं।
  • ऑनलाइन गलत सूचना : वर्तमान में इंटरनेट व अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त गलत सूचनाएँ बच्चों को उत्पीड़न व दुर्व्यवहार के प्रति सुभेद्य बनाती हैं।
    • लोकतांत्रिक बहसों को गलत सूचनाएँ प्रदान कर प्रभावित करने व गलत ऑनलाइन स्वास्थ्य सूचनाओं के कारण समाज में अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो रही है
  • डेटा अधिकार और ऑनलाइन गोपनीयता: विश्व में 3 में से 1 बच्चा इंटरनेट का नियमित उपयोगकर्त्ता है इस कारण वह डेटा का निर्माता है।
    • बच्चों व युवाओं की सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी उन्हें ऑनलाइन हैकिंग व खतरनाक एवं हिंसात्मक गतिविधियों के प्रति सुभेद्य बनाती है।

आगे की राह

  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिये सरकारों एवं उद्योगों को साथ मिलकर पेरिस समझौते के तहत ग्रीनहाऊस गैस के उत्सर्जन में कटौती हेतु प्रयास करने होंगे।
  • मानसिक बीमारियों के लक्षणों की समय पर पहचान एवं उनका उचित उपचार युवाओं व बच्चों में मानसिक बीमारीयों की समस्या को दूर करेगा।
  • शरणार्थी बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करना होगा।
  • संयुक्त राष्ट्र को वर्ष 2030 तक प्रत्येक व्यक्ति के लिये वैश्विक स्तर पर वैधानिक पहचान-पत्र प्रदान करने के लक्ष्य को निर्धारित करना होगा।
  • वर्ष 2030 तक प्रत्येक युवा को शिक्षा, प्रशिक्षण व रोज़गार उपलब्ध करवाना होगा।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children's Fund-UNICEF)

  • संयुक्त राष्ट्र बाल कोष को पूर्व में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष के नाम से जाना जाता था।
  • इस कोष की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) द्वारा वर्ष 1946 में की गई थी।
  • इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थित है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र (United Nations -UN) का एक विशेष कार्यक्रम है जो बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और कल्याण में सुधार के लिये सहायता प्रदान करने हेतु समर्पित है।

स्रोत: द हिंदू

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