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शासन व्यवस्था

छावनी क्षेत्रों का रूपांतरण

  • 26 Jul 2023
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

छावनी क्षेत्रों का रूपांतरण, छावनी क्षेत्रों की ब्रिटिश-युग की अवधारणा, छावनी अधिनियम, 1924, छावनी अधिनियम, 2006

मेन्स के लिये:

छावनी क्षेत्रों का रूपांतरण

चर्चा में क्यों? 

रक्षा मंत्रालय ने सैन्य स्टेशनों से नागरिक क्षेत्रों को अलग करने और उन्हें संबंधित राज्यों में नगर पालिकाओं के साथ एकीकृत करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य छावनी क्षेत्रों की ब्रिटिश-युग की अवधारणा में बदलाव लाना है।

  • यह निर्णय, जो स्वतंत्रता-पूर्व युग के दौरान स्थापित कई छावनी क्षेत्रों को प्रभावित करता है, प्रशासनिक परिदृश्य को नया आकार देने और बेहतर नागरिक-सैन्य संबंधों को बढ़ावा देने के लिये निर्धारित है।

भारत में छावनी प्रशासन का नियंत्रण:

  • छावनी के विषय में:
    • सैन्य और नागरिक दोनों आबादी को मिलाकर छावनियाँ सैन्य स्टेशनों से भिन्न होती हैं, जो पूरी तरह से सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण तथा आवास के लिये होती हैं।
  • पृष्ठभूमि:
    • भारत में छावनी क्षेत्रों की उत्पत्ति औपनिवेशिक युग में हुई थी जब ब्रिटिशों ने नियंत्रण बनाए रखने और अपने क्षेत्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिये सैन्य स्टेशनों की स्थापना की थी।  
    • ये क्षेत्र विशेष रूप से सैन्य कर्मियों के लिये आरक्षित थे और नागरिक क्षेत्रों से अलग  शासित थे।
    • समय के साथ सैन्य और नागरिक क्षेत्रों के बीच सीमांकन से अलग-अलग समुदाय बन गए तथा उनके बीच बातचीत सीमित हो गई
  • छावनियाँ और उनकी संरचना: 
    • क्षेत्र और जनसंख्या के आकार के आधार पर छावनियों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है - श्रेणी- I से  श्रेणी- IV तक।
    • जबकि श्रेणी- I छावनी में आठ निर्वाचित नागरिक और बोर्ड में आठ सरकारी/सैन्य सदस्य होते हैं, वहीं श्रेणी- IV छावनी में दो निर्वाचित नागरिक और दो सरकारी/सैन्य सदस्य होते हैं।
    • यह बोर्ड छावनी के प्रशासन के विभिन्न पहलुओं के लिये ज़िम्मेदार है।
      • छावनी का स्टेशन कमांडर बोर्ड का पदेन (Ex-officio) अध्यक्ष होता है और रक्षा संपदा संगठन का एक अधिकारी मुख्य कार्यकारी एवं सदस्य-सचिव होता है।
      • आधिकारिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के लिये बोर्ड में निर्वाचित और नामांकित/पदेन सदस्यों का समान प्रतिनिधित्व है।
  • प्रशासनिक नियंत्रण:
    • रक्षा मंत्रालय का एक अंतर-सेवा संगठन सीधे छावनी प्रशासन को नियंत्रित करता है।
    • भारत के संविधान की संघ सूची (अनुसूची VII) की प्रविष्टि 3 के अनुसार, छावनियों का शहरी स्वशासन और उनमें आवास, भारत संघ का विषय है।
    • देश में 60 से अधिक छावनियाँ हैं जिन्हें छावनी अधिनियम, 1924 (छावनी अधिनियम, 2006 द्वारा ) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।
  • नगर पालिकाओं के शहरी शासन की प्रशासनिक संरचना और विनियमन: 
    • केंद्रीय स्तर पर: 'शहरी स्थानीय सरकार' का विषय निम्नलिखित तीन मंत्रालयों द्वारा देखा जाता है:
      • आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय।
      • छावनी बोर्डों के मामले में रक्षा मंत्रालय।
      • केंद्रशासित प्रदेशों के मामले में गृह मंत्रालय।
    • राज्य स्तर पर: 
      • शहरी शासन संविधान के तहत राज्य सूची में शामिल है। इस प्रकार ULBs का प्रशासनिक ढाँचा और विनियमन राज्यों में भिन्न-भिन्न है।  
      • संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 स्थानीय स्वशासन के संस्थानों के रूप में शहरी स्थानीय निकायों (ULBs), (नगर निगमों सहित) की स्थापना का प्रावधान करता है।
        • इसने राज्य सरकारों को इन निकायों को राजस्व एकत्र करने के लिये कुछ कार्य, अधिकार और शक्तियाँ सौंपने का अधिकार दिया, तथा उनके लिये समय-समय पर चुनाव अनिवार्य कर दिया।
  • समस्याएँ: 
    • छावनी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों ने लंबे समय से विभिन्न प्रतिबंधों से संबंधित मुद्दों की शिकायत की है और कहा है कि छावनी बोर्ड उन्हें हल करने में विफल रहे हैं।
      • निवासी नागरिकों का दावा है कि छावनी बोर्ड उन समस्याओं का समाधान खोजने में विफल रहे हैं जिनका वे दैनिक आधार पर सामना करते हैं, जैसे कि गृह ऋण तक पहुँच तथा मैदान के अंदर आवाजाही की स्वतंत्रता।

छावनी क्षेत्रों को अलग करने का महत्त्व:

  • नागरिक-सैन्य संबंधों को मज़बूत करना: सैन्य स्टेशनों एवं नागरिक क्षेत्रों के पृथक्करण से सशस्त्र बलों तथा नागरिक आबादी के बीच बेहतर समझ के साथ सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
  • इससे आपसी विश्वास एवं सम्मान भी बढ़ेगा जिससे शांति और संकट के समय में सहज संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
  • स्थानीय शासन और नागरिक सुविधाएँ: नागरिक क्षेत्रों को नगरपालिका शासन में एकीकृत करने से नागरिक सुविधाओं और बुनियादी संरचना के विकास में सुधार होगा। स्थानीय शासन के मामलों में निवासियों की भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण हो सकती है जिसके परिणामस्वरूप शहरी नियोजन और सार्वजनिक सेवाएँ बेहतर होंगी। 
  • ऐतिहासिक विरासत और शहरी नियोजन: अनेक छावनी कस्बों में औपनिवेशिक युग की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत है। यह निर्णय आधुनिक शहरी नियोजन को सुविधाजनक बनाते हुए इन क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्त्व को संरक्षित करने के बारे में प्रश्न उठा सकता है।
  • कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ: छावनी कस्बे से एक नगर पालिका में परिवर्तन विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है। सुचारु एवं कुशल परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिये सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। 

डीमर्जर के कारण उत्पन्न चिंताएँ:

  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छावनियाँ समाप्त कर दी गईं तो इससे इन क्षेत्रों में सेना के प्रशिक्षण एवं प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा सुरक्षा के लिये भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

आगे की राह 

  • छावनी कस्बों में नागरिक क्षेत्रों से सैन्य स्टेशनों को अलग करने का सरकार का निर्णय प्रशासन में एक बुनियादी बदलाव का प्रतीक है जिसका उद्देश्य सैन्य और नागरिक समुदायों के बीच की दूरी को कम कर सकता है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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