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भारतीय अर्थव्यवस्था

वित्त वर्ष 2020में पवन ऊर्जा में सुधार की संभावना

  • 19 Jun 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने वित्त वर्ष 2020 में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में सुधार की संभावना व्यक्त की है। एजेंसी के अनुसार इस वित्त वर्ष में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में 3.5-4.0 गीगावाट (GW) की वृद्धि हो सकती है।

ICRA 1991 में अग्रणी वित्तीय/निवेश संस्थानों, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा स्थापित भारतीय स्वतंत्र और पेशेवर निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है।

मुख्य बिंदु

  • वित्त वर्ष 2020 में 3.5-4.0 गीगावाट (GW) पवन ऊर्जा क्षमता में वृद्धि हो सकती है। सरकार द्वारा कुछ बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत होने तथा सरकार द्वारा किये गए कुछ उपाय भी इसमें सहायक हो सकते हैं।
  • भूमि अधिग्रहण और पारेषण कनेक्टिविटी जैसी समस्याएँ पवन ऊर्जा क्षेत्र के समक्ष महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों को दूर करने के लिये सरकार भूमि अधिग्रहण के लिये राज्यों के साथ मिलकर कार्य कर रही है तथा अंतर-राज्यीय पारेषण के बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिये सुविधा प्रभार (Facilitation Charge) के रूप में प्रोत्साहन की पेशकश की जा रही है।
  • निष्पादन और वित्तपोषण भी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या है। वित्त की कमी एवं परियोजनाओं में देरी के कारण भी पवन ऊर्जा की वृद्धि दर नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही है।
  • पवन ऊर्जा की दरें (tariffs) लगातार नीचे बनीं हुई हैं। दरों का निम्न स्तर दीर्घकाल में पवन ऊर्जा की व्यावहारिकता (viability) पर प्रश्न चिह्न खड़े करता है। लेकिन यदि ऐसे स्थानों जहाँ पर पवन ऊर्जा की अधिक क्षमता है, परियोजनाएँ स्थापित कर दीर्घकालीन परियोजना के तहत इनको व्यवहारिक बनाया जा सकता है।
  • पवन ऊर्जा की क्षमता उन राज्यों में स्थापित की जा रही है, जिनमें अधिक पवन ऊर्जा क्षमता हैं जैसे गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक आदि।
  • इक्रा (ICRA) के अनुसार, वर्ष 2019-20 मके दौरान सौर ऊर्जा में 7 से 7.5 GW वृद्धि हो सकती है तेलंगाना में भी अगले कुछ महीनों में 1000 मेगावाट (MW) की सौर क्षमता में वृद्धि होगी।

स्रोत : बिज़नेस स्टैंडर्ड

और पढ़ें-

2030 तक 30 गीगावाट अपतटीय पवन ऊर्जा का लक्ष्य

वैश्विक पवन ऊर्जा सम्मलेन, 2018

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