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चंद्रमा पर विशाल मात्रा में धातु की उपस्थिति

  • 06 Jul 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

चंद्रमा के निर्माण की परिकल्पना, चंद्रमा पर धातु, लूनर रिकॉनेनेस ऑर्बिटर

मेन्स के लिये:

चंद्रमा के निर्माण की परिकल्पना

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 'राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन' (National Aeronautics and Space Administration- NASA) के ‘लूनर रिकॉनेनेस ऑर्बिटर’ (Lunar Reconnaissance Orbiter- LRO) अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा की उप-सतह में विशाल मात्रा में लोहे एवं टाइटेनियम जैसी धातुओं के उपस्थित होने अनुमान लगाया है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह शोध कार्य 1 जुलाई, 2020 को 'पृथ्वी और ग्रह विज्ञान पत्र' (Earth and Planetary Science Letters- EPSL) पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।
  • EPSL पृथ्वी और ग्रहों विज्ञान के शोधकर्त्ताओं के लिये एक प्रमुख पत्रिका है।  

मिशन LRO:

  • LRO नासा का रोबोटिक अंतरिक्ष यान है जो वर्तमान में चंद्रमा के ध्रुवों का मानचित्रण कर रहा है।
  • इसे चंद्रमा के ध्रुवीय क्रेटरों में हिम की उपस्थिति का पता लगाने के लिये वर्ष 2009 में भेजा गया था।

LRO मिशन का उद्देश्य:

  • चंद्रमा की उत्पत्ति को समझने के लिये वैज्ञानिक लगातार पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा पर उपस्थित धातु का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। 
  • शोधकर्त्ताओं ने समय के साथ उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर अपनी परिकल्पना को और अधिक परिष्कृत करने का प्रयास किया है।

‘द  बिग स्प्लैट’ संकल्पना

('The Big Splat' Hypothesis):

  • चंद्रमा के निर्माण के बारे में सबसे लोकप्रिय संकल्पना यह है कि लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मंगल ग्रह के आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया, जिससे पृथ्वी के एक हिस्से के टूटने से चंद्रमा का निर्माण हुआ।
  • इस संकल्पना के पक्ष में पर्याप्त प्रमाण भी मौज़ूद हैं, जैसे कि पृथ्वी तथा चंद्रमा की  रासायनिक संरचना में व्यापक समानता।

LRO द्वारा हाल ही में की गई खोज:

  • ‘लूनर रिकॉनेनेस ऑर्बिटर’ (LRO) के एक 'मिनी-आरएफ उपकरण' (Mini-RF Instrument) ने चंद्रमा के उत्तरी गोलार्द्ध के क्रेटरों की मिट्टी में विद्युत गुणों का मापन किया है।
  •  इन विद्युत गुणों को संपत्ति ‘विसंवाहक स्थिरांक’ (Dielectric Constant) के रूप में जाना जाता है। 
    • यह किसी पदार्थ की विद्युत पारगम्यता तथा निर्वात में विद्युत पारगम्यता के अनुपात को दर्शाता है।
  • शोध के अनुसार, जैसे-जैसे चंद्रमा के बड़े क्रेटरों में इस गुण का अवलोकन किया गया तो यह पाया गया कि क्रेटरों के आकार में वृद्धि होने के साथ मृदा में उपस्थित विद्युत गुणों में वृद्धि हुई।

खोज के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष:

  •  क्रेटरों के आकार में वृद्धि के साथ बढ़ता ‘विसंवाहक स्थिरांक’ यह बताता है कि  चंद्रमा का निर्माण जिन उल्काओं के टकराव के कारण हुआ होगा, उनके कारण चंद्रमा की सतह के नीचे मौज़ूद लोहे और टाइटेनियम ऑक्साइड युक्त धूल भी बाहर निकले हैं ।
  • अध्ययन के निष्कर्ष इस सामान्य अनुमान के विपरीत है कि चंद्रमा की उप-सतह में अपेक्षाकृत कम धातु के भंडार हैं। अध्ययन चंद्रमा की उप-सतह में बड़ी मात्रा में लोहे और टाइटेनियम ऑक्साइड की उपस्थिति को बताता है।
  • पूर्व में लगाए गए अनुमान; जो चंद्रमा की सतह से 0.5 से 2 किमी. की गहराई में अधिकतम लोहे और टाइटेनियम ऑक्साइड की उपस्थिति मानता है, के विपरीत धातुओं की अधिकतम मात्रा 0.2 से 0.5 किमी. की गहराई में उपस्थित होती है।

अध्ययन का महत्त्व:

  • यह खोज पृथ्वी और चंद्रमा के निर्माण के बीच एक स्पष्ट संबंध स्थापित करने में सहायता करेगा।
  • पृथ्वी की भू-पर्पटी में चंद्रमा की तुलना में कम लौह ऑक्साइड की मात्रा उपस्थित है। चंद्रमा की सतह पर धातु की अधिक मात्रा की नई खोज उनके समक्ष नवीन चुनौतियाँ उत्पन्न करती है। 

स्रोत: द हिंदू

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