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‘द फ्यूचर ऑफ़ रेल’ रिपोर्ट

  • 31 Jan 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?


30 जनवरी, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency-IEA) की ‘द फ्यूचर ऑफ रेल’ (The Future of Rail) रिपोर्ट जारी की गई।


महत्त्वपूर्ण बिंदु

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  • ‘द फ्यूचर ऑफ रेल’ में एक बुनियादी परिदृश्य (Base Scenario) शामिल है जो घोषित नीतियों, विनियमों और परियोजनाओं के आधार पर वर्ष 2050 तक रेलवे क्षेत्र में होने वाले संभावित विकास को दर्शाता है।
  • इसमें एक उच्च रेल परिदृश्य (High Rail Scenario) को भी शामिल किया गया है जो रेल परिवहन की ओर यात्रियों तथा वस्तुओं के स्थानांतरण के कारण होने वाले ऊर्जा और पर्यावरणीय लाभों को प्रदर्शित करता है।
  • बुनियादी रेल परिदृश्य की तुलना में उच्च रेल परिदृश्य के लिये लगभग 60% अधिक निवेश किये जाने की आवश्यकता है। इसके चलते वर्ष 2030 के अंत तक परिवहन के कारण होने वाले वैश्विक CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी, वायु प्रदूषण कम होगा और तेल की मांग में भी कमी आएगी।
  • ‘द फ्यूचर ऑफ रेल’ IEA श्रृंखला में नवीनतम रिपोर्ट है जो ऊर्जा प्रणाली में ऐसे मुद्दे पर प्रकाश डालती है जिस पर नीति-निर्माताओं को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में भारत पर किया गया है मुख्य फोकस

  • रिपोर्ट में भारत पर विशेष रूप से फोकस किया गया है। क्योंकि यहाँ रेल परिवहन का प्राथमिक साधन बना हुआ है, यह शहरों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच एक महत्त्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करता है और यात्रियों को सस्ते आवागमन की गारंटी देता है जो लंबे समय से भारत सरकार की प्राथमिकता रही है।
  • हालाँकि वर्ष 2000 के बाद से भारत में रेल से यात्रा करने वालों की संख्या में लगभग 200% की वृद्धि हुई है, फिर भी भविष्य में इस संख्या में और अधिक वृद्धि होने की संभावनाएँ बनी हुई हैं।
  • भारत की पहली हाई-स्पीड रेल लाइन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। मेट्रो लाइनों की कुल लंबाई अगले कुछ वर्षों में तिगुनी से अधिक होने की संभावना है और वर्ष 2020 तक दो समर्पित फ्रेट (Freight) कॉरीडोर का संचालन शुरू होने की भी संभावना है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • रेल, माल (Freight) और यात्रियों के परिवहन हेतु सबसे अधिक ऊर्जा कुशल (Energy Efficient) माध्यमों में से एक है। जहाँ एक तरफ यह क्षेत्र दुनिया के यात्रियों का 8% और वैश्विक माल परिवहन का 7% वहन करता है वहीं, कुल परिवहन ऊर्जा मांग में इसकी हिस्सेदारी केवल 2% है।

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  • वर्तमान में तीन-चौथाई यात्री रेल परिवहन की गतिविधियाँ इलेक्ट्रिक ट्रेनों के माध्यम से होती है, जिसमें वर्ष 2000 से अब तक 60% की वृद्धि हुई है। रेल, परिवहन का एकमात्र साधन है जो वर्तमान में व्यापक रूप से विद्युतीकृत है। बिजली पर निर्भरता का मतलब है कि रेल क्षेत्र परिवहन का सबसे अधिक ऊर्जा विविधता वाला साधन है।

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  • इलेक्ट्रिक ट्रेन की अधिकतम गतिविधि वाले क्षेत्र यूरोप, जापान और रूस हैं, जबकि उत्तर और दक्षिण अमेरिका अभी भी डीज़ल पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
  • लगभग सभी क्षेत्रों में यात्री रेल, माल ढुलाई रेल की तुलना में अधिक विद्युतीकृत हैं।

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आगे की राह

  • विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती आय और आबादी के कारण तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है। ये देश अधिक कुशल, तेज़ तथा स्वच्छ परिवहन की मज़बूत मांग का नेतृत्व करने के लिये तैयार तो हैं, लेकिन गति और सुगमता की आवश्यकता के चलते कार स्वामित्व और हवाई यात्रा के पक्ष में भी हैं।
  • भारत सहित सभी देशों में रेल क्षेत्र के भविष्य का निर्धारण इस बात से होगा कि ये परिवहन की बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्द्धी परिवहन साधनों के बढ़ते दबाव दोनों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) एक स्वायत्त संगठन है, जो अपने 30 सदस्य देशों, 8 सहयोगी देशों और अन्य दूसरों के लिये विश्वसनीय, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने हेतु काम करती है।
  • इसकी स्थापना (1974 में) 1973 के तेल संकट के बाद हुई थी जब ओपेक कार्टेल ने तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के साथ दुनिया को चौंका दिया था।
  • भारत 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एक सहयोगी सदस्य बना।
  • इसका मुख्यालय पेरिस (फ्राँस) में है।

स्रोत : अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट

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