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कमरे के तापमान पर अतिचालकता

  • 31 Oct 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये

अतिचालकता 

मेन्स के लिये

 कमरे के तापमान पर अतिचालकता के लाभ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने एक ऐसी सामग्री बनाई है जो कमरे के तापमान पर अतिचालकता (Superconducting) का गुण प्रदर्शित करती है, हालाँकि यह केवल 267 गीगा पास्कल (GPa) के दाब पर काम करती है, जो पृथ्वी के केंद्र के लगभग तीन-चौथाई दबाव (360 GPa) के बराबर है।

प्रमुख बिंदु

  • प्रयुक्त सामग्री (Material Used): कार्बन, हाइड्रोजन और सल्फर के मिश्रण को शोधकर्त्ताओं ने दो हीरों (DIAMONDS) के अतिसूक्ष्म नोक के बीच में रखा और रासायनिक प्रतिक्रिया जानने के लिये उस पर लेज़र प्रकाश का उपयोग किया।

प्रक्रिया (Process):

  • जब उन्होंने प्रयोगात्मक तापमान (Experimental Temperature) को कम किया, तो विद्युत धारा का प्रतिरोध शून्य हो गया, जो यह दर्शाता है कि नमूना (Sample) अतिचालक बन गया है।
  • अतिचालकता के लिये नमूने का संक्रमण 267 GPa पर लगभग 15°C के संक्रमण तापमान (Transition Temperature) में सबसे अच्छा हुआ।
  • सत्यापन (Verification): यह सत्यापित करने के लिये कि यह चरण वास्तव में एक सुपरकंडक्टर था, समूह ने पता लगाया कि सुपरकंडक्टर की यह चुंबकीय संवेदनशीलता प्रति-चुंबकीय (Diamagnet) थी।
  • शोधकर्त्ताओं ने कुछ सबूत भी पाए कि क्रिस्टल ने अपने चुंबकीय क्षेत्र को संक्रमण तापमान पर निष्कासित कर दिया, जो अतिचालकता का एक महत्त्वपूर्ण परीक्षण है।
  • इसे मैस्नर प्रभाव (Meissner Effect) भी कहा जाता है जिसका सीधा अर्थ है कि चुंबकीय लाइनें सुपरकंडक्टर्स से नहीं गुजरती हैं।

अतिचालक (Superconductors):

  • एक सुपरकंडक्टर ऐसी सामग्री है जो बिना किसी प्रतिरोध के एक परमाणु से दूसरे में बिजली या इलेक्ट्रॉनों  का संचालन कर सकती है।
  • इसका मतलब है कि "क्रांतिक तापमान" पर पहुंचने पर गर्मी, ध्वनि या ऊर्जा का कोई अन्य रूप उस सामग्री से मुक्त नहीं होगा।
    • सुपरकंडक्टर्स का क्रांतिक तापमान (Critical Temperature) वह तापमान होता है जिस पर धातु की विद्युत प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है।
  • इसमें प्रमुख रूप से एल्युमीनियम, नाइओबियम, मैग्नीशियम डिबोराइड आदि शामिल हैं।

अनुप्रयोग:

  • इसका प्रयोग मैग्नेटिक रिज़ोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging- MRI), मशीनों, बिजली लाइनों, शक्तिशाली अतिचालक चुम्बकत्व (Ultra Powerful Superconducting Magnets), मोबाइल-फोन टावरों में होता है ।
  • शोधकर्त्ता इसे पवन आधारित टरबाइन के लिये प्रयुक्त उच्च-प्रदर्शन जनरेटर में भी प्रयोग कर रहे हैं।

सीमाएँ:

  • इनकी उपयोगिता अभी भी ‘बल्की क्रायोजेनिक्स’ (Bulky Cryogenics- बहुत कम तापमान पर सामग्री के उत्पादन और व्यवहार) की आवश्यकता द्वारा सीमित है क्योंकि सामान्य सुपरकंडक्टर वायुमंडलीय दबावों पर काम करते हैं, लेकिन केवल तब तक जब तक कि उन्हें बहुत ठंडा रखा जाता है।
  • यहाँ तक ​​कि तांबे के ऑक्साइड आधारित सिरेमिक सामग्री (Ceramic Materials) जैसे सबसे परिष्कृत तत्त्व भी केवल -140°C से नीचे काम करते हैं।

अनुसंधान का महत्त्व:

  • यदि शोधकर्त्ता व्यापक दबाव पर सामग्री को स्थिर कर सकते हैं, तो कमरे के तापमान पर अतिचालकता के अनुप्रयोगों को प्राप्त किया जा सकता है

प्रतिचुंबकत्व (Diamagnetism)

  • जब इन पदार्थों को असमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाए तो ये पदार्थ अधिक प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र से कम प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र की ओर गति करते हैं।
  • यह चुंबकत्व गैर-स्थायी है और केवल एक बाहरी क्षेत्र की उपस्थिति में रहता है।
  • प्रेरित चुंबकीय क्षण (magnetic moment) का परिमाण बहुत कम होता है और इसकी दिशा लागू क्षेत्र के विपरीत होती है।

मैस्नर प्रभाव (Meissner Effect)

  • जब कोई पदार्थ अपने क्रांतिक ताप से नीचे आकर अतिचालक अवस्था को प्राप्त होता है तो इसके अंदर चुंबकीय क्षेत्र शून्य हो जाता है। इसे मैस्नर  प्रभाव (Meissner effect) कहते हैं।
  • एक सुपरकंडक्टर के अंदर शून्य चुंबकीय क्षेत्र के लिये यह बाधा पूर्ण प्रतिचुंबकत्व से अलग है जो इसके शून्य विद्युत प्रतिरोध से उत्पन्न होगी।

स्रोत: द हिंदू

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