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भारतीय विरासत और संस्कृति

सूफीवाद

  • 21 Nov 2022
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

इस्लामिक रहस्यवाद, वैराग्य, चिश्ती, सुहरावर्दी आदेश।

मेन्स के लिये:

सूफीवाद।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 'इन सर्च ऑफ द डिवाइन: लिविंग हिस्ट्रीज़ ऑफ सूफीज़्म इन इंडिया' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई है।

सूफीवाद

  • परिचय:
    • सूफीवाद इस्लाम का एक आध्यात्मिक रहस्यवाद है तथा यह एक धार्मिक संप्रदाय है जो ईश्वर की आध्यात्मिक खोज पर ध्यान केंद्रित करता है और भौतिकवाद को नकारता है।
    • यह इस्लामी रहस्यवाद का एक रूप है जो तपस्या पर ज़ोर देता है। इसमें भगवान की भक्ति पर बहुत ज़ोर दिया गया है।
    • सूफीवाद में आत्म-अनुशासन को धारणा के माध्यम से ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिये एक आवश्यक शर्त माना जाता है।
    • 12वीं ईस्वी की शुरुआत में फारस में कुछ धार्मिक लोग खलीफा के बढ़ते भौतिकवाद के कारण तपस्या की ओर मुड़ गए। उन्हें 'सूफी' कहा जाने लगा।
    • भारत में सूफी आंदोलन 1300 ईस्वी में शुरू हुआ और 15 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में आया।
    • सूफीवाद में आत्म-अनुशासन को ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिये एक आवश्यक शर्त माना जाता था। जबकि रूढ़िवादी मुसलमान बाहरी आचरण पर ज़ोर देते हैं, सूफी आंतरिक शुद्धता पर ज़ोर देते हैं।
    • मुल्तान और पंजाब शुरुआती केंद्र थे और बाद में यह कश्मीर, बिहार, बंगाल और दक्कन में फैल गया।
  • व्युत्पत्ति:
    • 'सूफी' शब्द संभवतः अरबी के 'सूफ' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है 'वह जो ऊन से बने कपड़े पहनता है'। इसका एक कारण यह है कि ऊनी कपड़ों को आमतौर पर फकीरों से जोड़कर देखा जाता था। इस शब्द का एक अन्य संभावित मूल 'सफा' है जिसका अरबी में अर्थ 'शुद्धता' है।
  • सूफीवाद के चरण:
    • पहला चरण (खानकाह): 10वीं शताब्दी में शुरू हुआ, जिसे स्वर्ण रहस्यवाद का युग भी कहा जाता है
    • दूसरा चरण (तारिका): 11-14वीं शताब्दी, जब सूफीवाद को संस्थागत बनाया जा रहा था और परंपराओं एवं प्रतीकों को इसके साथ जोड़ा जाने लगा था।
    • तीसरा चरण (तारिफा): 15वीं शताब्दी में शुरू हुआ, इस स्तर पर जब सूफीवाद एक लोकप्रिय आंदोलन बन गया।
  • प्रमुख सूफी सिलसिले:
    • चिश्ती:
      • चिश्तिया सिलसिला की स्थापना भारत में ख्वाज़ा मोइन-उद्दीन चिश्ती ने की थी।
      • इसने ईश्वर के साथ एकात्मकता (वहदत अल-वुजुद) के सिद्धांत पर ज़ोर दिया और इस सिलसिले के सदस्य शांतिप्रिय थे।
      • उन्होंने सभी भौतिक वस्तुओं को भगवान के चिंतन से विकर्षण के रूप में अस्वीकार कर दिया।
      • वे धर्मनिरपेक्ष राज्य के साथ संबंध से दूर रहे।
      • उन्होंने भगवान के नामों का ज़ोर से और चुपचाप पाठ (धिकर जाहरी, धिकर खफी), चिश्ती अभ्यास की आधारशिला का निर्माण किया।
      • चिश्ती की शिक्षाओं को ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर, निजामुद्दीन औलिया और नसीरुद्दीन चरघ जैसे ख्वाजा मोइन-उद्दीन चिश्ती के शिष्यों द्वारा आगे बढ़ाया तथा लोकप्रिय बनाया गया।
    • सुहरावर्दी सिलसिला (Suhrawardi Order):
      • इसकी स्थापना शेख शहाबुद्दीन सुहरावार्दी मकतूल द्वारा की गई थी।
      • चिश्ती सिलसिले के विपरीत सुहरावर्दी सिलसिले को मानने वालों ने सुल्तानों/राज्य के संरक्षण/अनुदान को स्वीकार किया।
    • नक्शबंदी सिलसिला:
      • इसकी स्थापना ख्वाज़ा बहा-उल-दीन नक्सबंद द्वारा की गई थी।
      • भारत में इस सिलसिले की स्थापना ख्वाज़ा बहाउद्दीन नक्शबंदी ने की थी।
      • शुरुआत से ही इस सिलसिले के फकीरों ने शरियत के पालन पर ज़ोर दिया।
    • कदिरिया सिलसिला:
      • यह पंजाब में लोकप्रिय था।
      • इसकी स्थापना शेख अब्दुल कादिर गिलानी द्वारा 14वीं शताब्दी में की गई थी
      • वे अकबर के अधीन मुगलों के समर्थक थे।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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