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स्टार्टअप्स

  • 28 Jul 2022
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

स्टार्टअप्स, स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान, नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (NIDHI), युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स तथा स्टार्टअप्स (PRAYAS), अटल इनोवेशन मिशन को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स का विकास करना।

मेन्स के लिये:

स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और उसका महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

सरकार के विभिन्न सुधारों और पहलों से भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी आई है।

स्टार्टअप्स:

  • परिचय:
    • स्टार्टअप शब्द एक कंपनी के संचालन के पहले चरण को संदर्भित करता है। स्टार्टअप एक या एक से अधिक उद्यमियों द्वारा स्थापित किये जाते हैं जो एक ऐसे उत्पाद या सेवा का विकास करना चाहते हैं जिसकी बाज़ार में मांग है।
    • ये कंपनियाँ आमतौर पर उच्च लागत और सीमित राजस्व के साथ शुरू होती हैं, यही वजह है कि वे उद्यम पूंजीपतियों जैसे विभिन्न स्रोतों से पूंजी की मांग करती हैं।
  • भारत में स्टार्टअप्स की वृद्धि :
    • उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) ने स्टार्टअप को मान्यता दी है जो 56 विविध क्षेत्रों से संबंधित हैं।
    • इस दिशा में निरंतर सरकारी प्रयासों के परिणामस्वरूप मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2016 के 471 से बढ़कर वर्ष 2022 में 72,993 हो गई है।

स्टार्टअप-इंडिया योजना का भारत के स्टार्टअप्स के विकास में योगदान:

स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा शुरू किये गए विभिन्न कार्यक्रमों ने स्टार्टअप्स के विकास को सुगम बनाया है:

  • स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान: इसमें सरलीकरण, मार्गदर्शन, वित्तीय समर्थन, प्रोत्साहन और उद्योग शिक्षाविद, साझेदारी एवं इनक्यूबेशन जैसे क्षेत्रों में विस्तारित 19 घटक शामिल हैं।
    • कार्य योजना ने देश में एक जीवंत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिये परिकल्पित सरकारी सहायता, योजनाओं और प्रोत्साहनों की नींव रखी।
  • स्टार्टअप इंडिया हब: यह भारत में उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों के लिये एक-दूसरे को खोजने, जोड़ने और संलग्न करने हेतु अपनी तरह का एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है।
    • ऑनलाइन हब स्टार्टअप, निवेशक, फंड, सलाहकार, शैक्षणिक संस्थान, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, कॉर्पोरेट, सरकारी निकायों को मेज़बानी प्रदान करता हैै।
  • 3 साल के लिए आयकर छूट: 1 अप्रैल, 2016 को या उसके बाद निगमित स्टार्टअप्स के निगमन के बाद से 10 वर्षों में से लगातार 3 वर्षों की अवधि के लिये आयकर से छूट दी गई है।
  • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS): इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स को अवधारणा के प्रमाण, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षण, बाज़ार में प्रवेश और व्यावसायीकरण के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • भारतीय स्टार्टअप के लिये अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार पहुँच: स्टार्टअप इंडिया ने 15 से अधिक साझेदार देशों (ब्राजील, स्वीडन, रूस, पुर्तगाल, यूके, फिनलैंड, नीदरलैंड, सिंगापुर, इज़रायल, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, क्रोएशिया, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) के साथ परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने में सहायता हेतु स्टार्टअप के लिये सॉफ्ट लैंडिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किये हैं।,

स्टार्टअप्स को हैंडहोल्डिंग प्रदान करने वाले अन्य कारक:

  • सरकारी योजनाएँ :
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने सफल स्टार्टअप में विचारों और नवाचारों (ज्ञान-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-संचालित) को पोषित करने के लिये नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन (NIDHI) नामक एक अम्ब्रेला कार्यक्रम शुरू किया था।
    • स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये युवा और महत्त्वाकांक्षी इनोवेटर्स एवं स्टार्टअप्स (PRAYAS) कार्यक्रम को बढ़ावा देना और उसे तेज़ी से शुरू किया गया था।
  • जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा:
    • जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिये जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी फर्मों को बढ़ावा देता है तथा उनका पोषण करता है।
  • रक्षा क्षेत्र:
    • रक्षा उत्पादन विभाग ने उद्योगों, R&D संस्थानों और शिक्षाविदों को शामिल करके तथा उन्हें R&D के लिये अनुदान प्रदान कर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, रक्षा एवं एयरोस्पेस में नवाचार तथा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देने के लिये रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (iDEX) कार्यक्रम शुरू किया।
  • अटल नवाचार मिशन (AIM):
    • अटल नवाचार मिशन के तहत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप को इनक्यूबेट करने के लिये अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC) की स्थापना की है।
    • इसने राष्ट्रीय महत्त्व और सामाजिक प्रासंगिकता की क्षेत्रीय चुनौतियों को हल करने वाले प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचारों के साथ स्टार्टअप्स को सीधे सहायता देने के लिये अटल न्यू इंडिया चैलेंज (ANIC) कार्यक्रम भी शुरू किया है।
  • विदेशी मुद्रा प्रवाह की भूमिका:
    • भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में विशेष रूप से प्रमुख तकनीकी कंपनियों जैसे फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से विदेशी मुद्रा का प्रवाह घरेलू बाज़ार की अपार संभावनाओं का संकेत देता है।
  • प्रौद्योगिकी की भूमिका:
    • नए तकनीकी उपकरणों के साथ स्टार्टअप समुदाय व्यापक बाज़ार अंतराल को समाप्त करने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, रोबोटिक्स आदि जैसे नए युग की तकनीकों का लाभ उठा रहा है।

Startup

आगे की राह

  • स्टार्टअप्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंकि कई उद्यमी अपने परिवार और सामाजिक वातावरण द्वारा अपने शौक को पूरा करने से हतोत्साहित होते रहते हैं तथा नौकरी एवं जीवन शैली का चयन (जो अधिक स्थिरता प्रदान करने के लिये देखा जाता है) करने के लिये दबाव में होते हैं।
  • अवसर की इच्छा रखने वाले को अधिक पुरस्कृत किया जाना चाहिये और असफलता को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिये।
    • इसके अलावा पूर्वाग्रहों को तोड़ना बढ़ती विविधता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है, जो सफल होने के लिये आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र को प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा।
  • देश के निर्माताओं, जोखिम उठाने वाली कंपनियों और फंडिंग एजेंसियों को घरेलू पूंजी की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये अनुकूल माहौल बनाने की ज़रूरत है।
    • नवाचार को प्रोत्साहित करने और उभरते व्यापार मॉडल को समर्थन देने वाले उपयुक्त नियमों को तैयार कर नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न:

प्रश्न. उद्यम पूंजी से क्या तात्पर्य है? (2014)

(a) उद्योगों को उपलब्ध कराई गई अल्पकालीन पूंजी
(b) नए उद्यमियों को उपलब्ध कराई गई दीर्घकालीन प्रारंभिक पूंजी
(c) उद्योगों को हानि उठाते समय उपलब्ध कराई गई निधियाँ
(d) उद्योगों के प्रतिस्थापन एवं नवीकरण के लिये उपलब्ध कराई गई निधियाँ

 उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • जोखिम पूंजी एक नए या बढ़ते व्यवसाय को निधि प्रदान करती है। आमतौर पर यह जोखिम पूंजी उद्योगों द्वारा प्रदान की जाती है, जो उच्च जोखिम वाले वित्तीय पोर्टफोलियो से संबंधित होती है।
  • जोखिम पूंजी वाले उद्योग किसी भी स्टार्टअप में इक्विटी के बदले स्टार्टअप कंपनी को निधि प्रदान करते हैं।
  • जो निवेशक पूंजी का निवेश करते हैं उन्हें उद्यम पूंजीवादी (VC) कहा जाता है। उद्यम पूंजी निवेश को उद्यम पूंजी या बीमारू उद्यम पूंजी के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें उद्यम के सफल न होने पर हानि का जोखिम भी शामिल होता है, साथ ही निवेश के प्रतिफल की प्राप्ति में मध्यम से लंबी अवधि का समय भी लग सकता है।
  • अतः विकल्प B सही है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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