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सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं का सामाजिक लेखा-परीक्षण

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  • 30 Jul 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रधानमंत्री आवास योजना,  मध्याह्न भोजन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, ग्राम सभा, सूचना-निगरानी, मूल्यांकन और सामाजिक लेखापरीक्षा

मेन्स के लिये:

सामाजिक लेखापरीक्षा की आवश्यकता 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने वित्त वर्ष 2021-22 में सूचना-निगरानी, मूल्यांकन और सामाजिक लेखापरीक्षा (Information-Monitoring, Evaluation and Social Audit- I-MESA) नामक एक योजना तैयार की है।

प्रमुख बिंदु 

I-MESA योजना के विषय में:

  • इस योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2021-22 से विभाग की सभी योजनाओं की  सामाजिक लेखापरीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • यह सामाजिक लेखापरीक्षा राज्यों की सामाजिक लेखापरीक्षा इकाइयों (Social Audit Unit) और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के माध्यम से की जाती है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की महत्त्वपूर्ण योजनाएँ:

सामाजिक लेखापरीक्षा

सामाजिक लेखापरीक्षा के विषय में:

  • अर्थ: यह सरकार और लोगों (विशेष रूप से वे लोग जो योजना से प्रभावित हैं) द्वारा संयुक्त रूप से किसी योजना के क्रियान्वयन का मूल्यांकन है।
  • लाभ: यह योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु एक सशक्त माध्यम है।
    • सामाजिक अंकेक्षण सामाजिक कल्याण के लिये उठाए गए कदमों के उद्देश्यों और वास्तविकता के बीच अंतर को पाटने का काम करता है।
  • स्थिति:

चुनौतियांँ:

  • भ्रष्टाचार को रोकने के लिये सामाजिक लेखापरीक्षा को संस्थागत बनाने में पर्याप्त प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का मतलब है कि देश के कई हिस्सों में सामाजिक लेखापरीक्षा कार्यान्वयन एजेंसियों से प्रभावित है।
  • ग्राम सामाजिक अंकेक्षण सुविधादाताओं सहित सामाजिक लेखापरीक्षा इकाइयों को प्रतिरोध और धमकी का सामना करना पड़ रहा है तथा सत्यापन हेतु प्राथमिक अभिलेखों तक पहुंँचने में भी मुश्किल हो रही है।
  • आम जनता के बीच शिक्षा, जागरूकता और क्षमता निर्माण की कमी के कारण लोगों की भागीदारी नगण्य रही है।
  • सामाजिक लेखापरीक्षा के निष्कर्षों की जांँच और कार्रवाई करने हेतु एक स्वतंत्र एजेंसी का अभाव है।

सुझाव:

  • नागरिक समूहों को सामाजिक लेखापरीक्षा को मज़बूत करने हेतु अभियान चलाने और राजनीतिक कार्यकारी तथा इसकी कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
  • प्रत्येक ज़िले में सामाजिक अंकेक्षण विशेषज्ञों की टीम स्थापित की जानी चाहिये जो सामाजिक लेखापरीक्षा समिति के सदस्यों (हितधारकों) के प्रशिक्षण हेतु ज़िम्मेदार हों।
  • सामाजिक अंकेक्षण के तरीकों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किये जाने चाहिये जैसे कि सामाजिक लेखापरीक्षा रिपोर्ट तैयार करना और अंकेक्षण करना एवं उसे ग्राम सभा में प्रस्तुत करना।
  • सामाजिक अंकेक्षण की प्रणाली को एक संस्थागत ढांँचे की स्थापना करने के लिये सहक्रियात्मक समर्थन और अधिकारियों द्वारा किसी भी निहित स्वार्थ के बिना प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता होती है।

स्रोत: पी.आई.बी 

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