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भारतीय राजनीति

विशेष ग्राम सभा, महिला सभा का आयोजन

  • 07 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

महिला सभा, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

मेन्स के लिये:

स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भूमिका

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने 8 मार्च, 2020 को अंतर्राष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा और महिला सभा का आयोजन करने का निर्देश दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2020 के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विषय ‘ पीढ़ी समानता: महिलाओं की अधिकार प्राप्ति’ (Generation Equality: Realizing Women’s Right) है।
  • इसके अतिरिक्त सभी ग्राम पंचायतों से 8- 22 मार्च, 2020 तक महिला और बाल विकास मंत्रालय के कार्यक्रम के अनुसार पोषण पखवाड़ा आयोजित करने को भी कहा गया है।

ग्राम सभाओं और महिला सभाओं के आयोजन से संबंधित विषय:

  • पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, इन विशेष ग्राम सभाओं और महिला सभाओं का आयोजन ‘कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन’ (Community Resource Persons-CRPs) जैसे- आँगनवाड़ी, आशा, सखी तथा एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife-ANM) के सहयोग से किया जाएगा।
  • ग्राम सभाओं में पोषण पंचायत, भूमि अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा, प्रजनन संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य तथा महिलाओं के लिये समान अवसर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
  • विशेष ग्राम सभाओं में लिंग निर्धारण जाँच पर पाबंदी, लड़की के जन्‍म को समारोह के रूप में मनाने तथा सभी महिलाओं के लिये प्रसवपूर्व देखभाल और नवजात देखभाल से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाएगी।
  • इन विशेष ग्राम सभाओं में प्रत्‍येक लड़की के लिये उचित देखभाल, पौष्टिक आहार तथा टीकाकरण, लड़कियों को स्‍कूल जाने के लिये प्रोत्‍साहित करने और उनके लिये घर तथा स्‍कूल में सुरक्षित माहौल पर ध्‍यान देने के साथ ही उन्हें स्‍कूली शिक्षा पूरी करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • बाल विवाह पर पाबंदी, महिलाओं तथा लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा दुर्व्‍यवहार और अन्‍याय को रोकने, ग्राम पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और निर्णय लेने में उनके योगदान तथा ग्राम सभाओं में भागीदारी के लिये महिलाओं को प्रोत्‍साहित करने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
  • इन सभाओं के आयोजन के दौरान नवजात शिशुओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिये जन्‍म के बाद पहले 1000 दिनों तक स्‍तनपान करने तथा चाइल्‍ड हेल्‍पलाइन 1098 की भूमिका जैसे विषयों को चर्चा में शामिल किया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भूमिका:

  • सामुदायिक सक्रियता को बढ़ाने और समुदाय के व्‍यवहार परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में काम करने में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण है।
  • 73वें संविधान संशोधन ने ग्रामीण स्‍वशासन को स्‍वायत्तता प्रदान की और शासन संचालन को आम जनमानस के निकट ला दिया।
  • इस संशोधन से महिलाओं को पंचायतों में एक-तिहाई आरक्षण प्राप्‍त हुआ।
  • अब तक 20 राज्‍यों ने पंचायती राज संस्‍थानों में महिलाओं के आरक्षण को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने हेतु कानून पारित किया है।
  • इसके परिणामस्‍वरूप 30.41 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 13.74 लाख (45.2 प्रतिशत) महिलाएँ हैं।
  • इनमें से कुछ सामाजिक रूप से पिछड़े समूहों से भी हैं जो अब नेतृत्त्व प्रदान करने की स्थिति में हैं।

अन्य नवाचार:

  • पंचायती राज मंत्रालय ने समुदाय की आवश्‍यकताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिये ग्राम पंचायत स्‍तर पर एकीकृत विकास नियोजन के लिये ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan- GPDP) का ढाँचा तैयार किया है।
  • GPDP संबंधी दिशा-निर्देशों को वर्ष 2018 में संशोधित किये जाने के बाद इन दिशा-निर्देशों के कुछ प्रमुख पहलू महिला सशक्तीकरण के लिये प्रासंगिक हो गए हैं।
  • इन संशोधनों में बजट बनाने, नियोजन, जीपीडीपी की निगरानी तथा क्रियान्‍वयन सामान्‍य ग्राम सभा से पहले महिला सभाओं का आयोजन कराना शामिल है।
  • ये सभी पहलू पंचायती राज मंत्रालय के विज़न दस्तावेज़ 2024 का हिस्‍सा हैं।

आगे की राह:

  • लैंगिक समानता का सिद्धांत भारतीय संविधान की प्रस्‍तावना, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्त्तव्‍यों और नीति निर्देशक सिद्धांतों में प्रतिपादित है।
  • संविधान महिलाओं को न केवल समानता का दर्जा प्रदान करता है अपितु राज्‍य को महिलाओं के पक्ष में सकारात्‍मक भेदभाव के उपाय करने की शक्‍ति भी प्रदान करता है।
  • प्रकृति द्वारा किसी भी प्रकार का लैंगिक विभेद नहीं किया जाता है। समाज में प्रचलित कुछ तथ्य जैसे- महिलाएँ पुरुषों की अपेक्षा जैविक रूप से कमज़ोर होती हैं इत्यादि केवल भ्रांतियाँ हैं।
  • दरअसल महिलाओं में विशिष्ट जैविक अंतर, विभेद नहीं बल्कि प्रकृति प्रदत्त विशिष्टताएँ हैं, जिनमें समाज का सद्भाव और सृजन निहित हैं।

स्रोत: पीआईबी

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