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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारतीय रासायनिक उद्योग की कमियाँ: TIFAC

  • 21 Aug 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये

प्रौद्योगिकी सूचना पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद

मेन्स के लिये

भारतीय रासायनिक उद्योग से संबंधित विषय

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रौद्योगिकी सूचना पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (Technology Information Forecasting and Assessment Council-TIFAC) की एक रिपोर्ट ने भारतीय रासायनिक उद्योग की कमियों को उजागर किया है जो कि चीन के साथ प्रतिस्पर्द्धा में बाधा साबित हो रही हैं।

प्रमुख बिंदु

  • भारत के पास लागत प्रभावी और कम प्रदूषणकारी तरीके से प्रमुख रसायनों के निर्माण के लिये पर्याप्त तकनीकी, संयंत्र और बुनियादी ढाँचा नहीं है।
  • भारत ने कई प्रमुख सक्रिय दवा सामग्री (Active Pharmaceutical Ingredient- API) का निर्माण बंद कर दिया है।
    • भारत ने एस्कॉर्बिक एसिड (Ascorbic Acid), एस्पार्टेम (Aspartame) और एंटीबायोटिक्स जैसे रिफैम्पिसिन (Rifampicin), डीऑक्सीसाइक्लिन (Doxycycline), टैज़ोबैक्टम एसिड (Tazobactam Acid) और यहाँ तक कि स्टेरॉयड के लिये API का निर्माण बंद कर दिया है।
    • एटोरवास्टेटिन (Atorvastatin), क्लोरोक्वीन (Chloroquine), गैबापेंटिन (Gabapentin), सिप्रोफ्लोक्सासिन (Ciprofloxacin), सेफलोस्पोरिन (Cephalosporins), इम्यूनोसप्रेसेन्ट (Immunosuppressants) जैसी सक्रिय दवा सामग्री का उत्पादन भी रोक दिया गया है।
  • भारत 67% रासायनिक इंटरमीडिएट और API के आयात के लिये चीन पर निर्भर है।
    • भारत API के लिये अमेरिका और इटली पर भी निर्भर है।
  • रासायनिक उद्योग क्लोरोक्विन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) की आपूर्ति के लिये लगभग पूरी तरह से चीन पर निर्भर है।
    • हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन एक मलेरियारोधी दवा है। यह क्लोरोक्विन (Chloroquine) का एक यौगिक/डेरिवेटिव (Derivative) है, जिसे क्लोरोक्विन से कम विषाक्त (Toxic) माना जाता है।
    • रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) और लूपस (Lupus) जैसी कुछ अन्य बीमारियों के मामलों में भी डॉक्टर की सलाह पर इस दवा का उपयोग किया जाता है।
  • निर्माता उस कीमत को प्राप्त करने में असमर्थ हैं जिस पर चीन द्वारा रसायनों का उत्पादन किया जाता है।
    • भारत में विलायक और रसायन निर्माण लागत चीन की तुलना में 15% अधिक है।
  • कुल दवा निर्यात मिश्रण में भारतीय थोक दवाओं और सक्रिय दवा सामग्री की हिस्सेदारी वर्ष 2008 के 42% से घटकर 20108 में 20% हो गई।

सक्रिय दवा सामग्री (Active Pharmaceutical Ingredients)

  • ये दवा निर्माण में बहुत महत्त्वपूर्ण तत्त्व हैं, इन्हें बल्क ड्रग्स (Bulk Drugs) भी कहा जाता है।
  • चीन का हुबेई प्रांत API विनिर्माण उद्योग का केंद्र है।

फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट (Pharmaceutical Intermediates)

  • ये ऐसे रासायनिक यौगिक हैं जो API के बिल्डिंग ब्लॉक का निर्माण करते हैं और API के उत्पादन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में उत्पादित होते हैं।

TIFAC विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संगठन और थिंक-टैंक है।

सुझाव

  • API अणुओं के निर्बाध संश्लेषण के लिये निर्धारित लक्ष्य के साथ मिशन मोड केमिकल इंजीनियरिंग की आवश्यकता है।
  • भारत में सामान्य बुनियादी ढाँचे के साथ मेगा ड्रग मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का निर्माण करने की ज़रूरत है।
  • बड़ी क्षमता वाले किण्वन क्षेत्र में निवेश करने और लागत अनुकूलन के लिये जैव उत्प्रेरक (Biocatalysis) हेतु एक प्रौद्योगिकी मंच का विकास करना।
    • जैव उत्प्रेरक का तात्पर्य रासायनिक प्रतिकियाओं को तीव्र करने हेतु जैविक स्रोतों से प्राप्त प्राकृतिक पदार्थों (जैसे एंजाइम) के उपयोग से है।
  • रासायनिक क्षेत्रों में काम करने वाली भारतीय कंपनियों को सरकारी प्रोत्साहन प्रदान करना।

आगे की राह

  • TIFAC द्वारा प्रस्तुत विभिन्न सिफारिशें दवा क्षेत्र में भारत की आयात निर्भरता को कम करके इसे आत्मनिर्भर बनने में मददगार साबित हो सकती है।
  • प्रमोशन ऑफ बल्क ड्रग्स पार्क्स और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (Promotion of Bulk Drug Parks and Production Linked Incentives) जैसी योजनाओं को बढ़ावा देने की ज़रूरत है ताकि थोक दवाओं की विनिर्माण लागत को कमकरके घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।

स्रोत-द हिंदू

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