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भारत में कोरोना वायरस के अद्वितीय लक्षण (A3i)

  • 04 Jun 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद

मेन्स के लिये:

भारत में SARS-CoV-2 के विभिन्न क्लैड/प्रकार और स्वास्थ्य पर उनका प्रभाव  

चर्चा में क्यों?

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी’ (Institute of Genomics and Integrative Biology) तथा सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (Centre for Cellular and Molecular Biology) के शोधकर्त्ताओं ने भारत में एक नए कोरोना वायरस की पहचान की है।

प्रमुख बिंदु:

    • कोरोनावायरस का यह क्लेड/प्रकार संभवतः भारत में दूसरा सबसे प्रचलित प्रकार है और इसमें विश्व स्तर के 3.5% जीनोम शामिल हो सकते हैं।
    • शोधकर्त्ताओं द्वारा चिह्नित कोरोना वायरस के इस क्लेड/प्रकार का नाम A3i है। गौरतलब है कि शोधकर्त्ताओं द्वारा विश्लेषित कोरोनावायरस के 361 जीनोम में से 41% जीनोम A3i से संबंधित हैं।
    • उल्लेखनीय है कि भारत में कोरोनावायरस का सबसे प्रमुख क्लेड (Clade) A2a है और शोधकर्त्ताओं द्वारा विश्लेषित कोरोनावायरस के 361 जीनोम में से 45% जीनोम A2a से संबंधित हैं।
      • क्लेड (Clade): SARS-CoV-2 का क्लैड/प्रकार वायरस का एक समूह है जिन्हें जीनोम के कुछ हिस्सों में विशेष उत्परिवर्तन या समानता के आधार पर एक साथ समूहीकृत किया गया है।
    • A3i के अनुक्रमण में चार स्थानों पर भिन्नता के कारण यह दूसरे वायरस से अलग है।
    • वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार,  A2a की तुलना में A3i का उत्परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है जो इसके प्रसार को रोकने का संभावित कारण हो सकता है। 
    • इस बात का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि A3i अत्यधिक घातक है या इससे ज्यादा मृत्यु होती है। 
    • A3i का प्रसार तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली में अत्यधिक है।  
    • विश्वभर में 11 प्रकार के SARS-CoV-2 की पहचान की गई है जिनमें से भारत में 6 प्रकार के वायरस चिह्नित किये गए हैं।
    • उत्परिवर्तित होने के पश्चात् A2a फेफड़ों को अत्यधिक प्रभावित करता है। वर्तमान में दुनिया भर में A2a का प्रसार सबसे अत्यधिक है। 
    • पिछले अध्ययनों से पता चला है कि टाइप ओ (Type O) वायरस सबसे पुराना था जिसे चीन में चिह्नित किया गया था। 
    • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research-ICMR) के अनुसार, भारत में SARS-CoV-2 वायरस के तीन प्रमुख क्लेड/प्रकार प्रचलित हैं जिनके स्रोत वुहान, अमेरिका और यूरोप हैं।

    वर्गीकरण का महत्त्व:

    • इस तरह के वर्गीकरण से यह जानने में आसानी होती हैं कि वायरस कितने खतरनाक हैं और उनके प्रसार की गति क्या है। 
    • ये वर्गीकरण कुछ विशेष प्रकार के टीकों से जोखिम को कम किये जा सकने की संभावना का भी पता लगाने में सहायक साबित हो सकते हैं। 

    कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र

    (Centre for Cellular & Molecular Biology- CCMB):

    • ‘कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र’ आधुनिक जीव विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
    • CCMB की शुरुआत 1 अप्रैल, 1977 को एक अर्द्ध-स्वायत्त संस्थान के रूप में की गई थी।
    • उद्देश्य:
      • आधुनिक जीव विज्ञान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का संचालन करना।
      • जीव विज्ञान के अंतर-अनुशासनात्मक क्षेत्रों में नई और आधुनिक तकनीकों के लिये केंद्रीकृत राष्ट्रीय सुविधाओं को बढ़ावा देना।

    स्रोत: द हिंदू

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