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प्रौद्योगिकी

रुसी रक्षा प्रणाली (S-400)

  • 13 Jul 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने रूसी मिसाइल रक्षा प्रणाली [Russian missile defense system (S-400)] की पहली खेप तुर्की पहुँचने पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने की आशंका जताई है।

प्रमुख बिंदु 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने तुर्की को चेतावनी दी है कि अगर वह रूसी मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदता है तो उसे आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही तुर्की उच्च तकनीकियों से युक्त F-35 फाइटर जेट (F-35 fighter Jets) के उत्पादन संबंधी कार्यक्रमों में भी भाग नहीं ले पाएगा।
  • तुर्की ने प्रतिक्रियास्वरुप अमेरिकी दबाव के सामने झुकने से इनकार करते हुए कहा है कि इस प्रणाली की खरीद राष्ट्र की संप्रभुता के हित में है तथा संप्रभुता से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता है।

S-400 रक्षा सैन्य प्रणाली 

  • रूस की अल्माज़ केंद्रीय डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा 1990 के दशक में विकसित यह वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली करीब 400 किलोमीटर के क्षेत्र में शत्रु के विमान, मिसाइल और यहाँ तक कि ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है। 
  • एस-400 प्रणाली एस-300 का उन्नत संस्करण है। 
  • यह मिसाइल प्रणाली रूस में 2007 से सेवा में है और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक मानी जाती है।
  • S-400 को सतह से हवा में मार करने वाला दुनिया का सबसे सक्षम मिसाइल सिस्टम माना जाता है। 
  • सतह से हवा में प्रहार करने में सक्षम S-400 को रूस ने सीरिया में तैनात किया है।
  • S-400 मिसाइल प्रणाली S-300 का उन्नत संस्करण है, जो इसके 400 किमी. की रेंज में आने वाली मिसाइलों एवं पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को नष्ट कर सकता है। इसमें अमेरिका के सबसे उन्नत फाइटर जेट F-35 को भी गिराने की क्षमता है।
  • इस प्रणाली में एक साथ तीन मिसाइलें दागी जा सकती हैं और इसके प्रत्येक चरण में 72 मिसाइलें शामिल हैं, जो 36 लक्ष्यों पर सटीकता से मार करने में सक्षम हैं। 
  • इस रक्षा प्रणाली से विमानों सहित क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों तथा ज़मीनी लक्ष्यों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

भारत के संदर्भ में 

  • ध्यातव्य है कि अक्तूबर 2018  में भारत एवं रूस के मध्य रूसी मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद हेतु 5 अरब डॉलर का समझौता हुआ था, जिस पर अमेरिका ने भारत पर भी CAATSA (Countering America's Adversaries Through Sanctions Act) के तहत प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।

क्या है CAATSA?

  • 2 अगस्त, 2017 को अधिनियमित और जनवरी 2018 से लागू इस कानून का उद्देश्य दंडनीय उपायों के माध्यम से ईरान, रूस और उत्तरी कोरिया की आक्रामकता का सामना करना है।
  • यह अधिनियम प्राथमिक रूप से रूसी हितों, जैसे कि तेल और गैस उद्योग, रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र तथा वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंधों से संबंधित है। 
  • यह अधिनियम अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी रक्षा और खुफिया क्षेत्रों (महत्त्वपूर्ण लेन-देन) से जुड़े व्यक्तियों पर अधिनियम में उल्लिखित 12 सूचीबद्ध प्रतिबंधों में से कम से कम पाँच लागू करने का अधिकार देता है।
  • इन दो प्रतिबंधों में से एक निर्यात लाइसेंस प्रतिबंध है जिसके द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को युद्ध, दोहरे उपयोग और परमाणु संबंधी वस्तुओं के मामले के निर्यात लाइसेंस निलंबित करने के लिए अधिकृत किया गया है।
  • यह स्वीकृत व्यक्ति के इक्विटी या ऋण में अमेरिकी निवेश पर प्रतिबंध लगाता है।
  • इसकी विशेषताएँ अमेरिका के थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसी होंगी और इसे अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के अलावा हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों और वायु रक्षा के लिये विमानों को अवरुद्ध तथा नष्ट करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। माना जा रहा है कि यह रूसी मिसाइल रक्षा प्रणाली बेहद शक्तिशाली और मारक होगी तथा अमेरिका के अदृश्य लड़ाकू विमान F-22 और F-35 भी इसके सामने नाकाम सिद्ध होंगे।
  • हालिया वर्षों में अमेरिका और भारत के सैन्य संबंधों में आए सुधार के मद्देनज़र अब अमेरिका के उस कानून के प्रावधानों से बचने के तरीके तलाशने की ज़रूरत है, जिसके तहत रूस के रक्षा अथवा खुफिया प्रतिष्ठानों से लेन-देन करने वाले देशों और कंपनियों को दंडित करने की बात कही गई है।

विशेष: वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली S-400

रूस से हथियार खरीदने पर प्रतिबंध से मिलेगी छूट

अनिश्चित विश्व में भारतीय विदेश नीति

स्रोत: द हिंदू 

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