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भारतीय अर्थव्यवस्था

गैस मूल्य निर्धारण फॉर्मूला की समीक्षा

  • 08 Sep 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

गैस मूल्य निर्धारण फॉर्मूला, रूस-यूक्रेन, मुद्रास्फीति का वर्तमान तंत्र।

मेन्स के लिये:

गैस मूल्य निर्धारण फॉर्मूला की समीक्षा।

चर्चा में क्यों?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस के मौजूदा मूल्य निर्धारण फार्मूले की समीक्षा के लिये प्रसिद्ध ऊर्जा विशेषज्ञ किरीट पारिख की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।

गैस-मूल्य निर्धारण फॉर्मूला समीक्षा की आवश्यकता:

  • ऊँची कीमतें:
    • वर्तमान रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक कीमतों में उछाल आने से स्थानीय गैस की कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर हैं तथा आगे और बढ़ने की आशंका है।
    • वैश्विक प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने ऊर्जा और औद्योगिक लागतों को बढ़ा दिया तथा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रयासों की विफलता से चिंताएँ बढ रही है।
      • देश लगातार सात महीनों से भारतीय रिज़र्व बैंक के 2% -6% के टॉलरेंस बैंड से ऊपर की मुद्रास्फीति से जूझ रहा है।
  • वर्तमान फॉर्मूला अदूरदर्शी:
    • वर्तमान फॉर्मूला "अदूरदर्शी" है और यह गैस उत्पादकों को प्रोत्साहन नहीं देता है।
    • भारत में, इसके ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी 6% है, जबकि वैश्विक औसत 23% है।
    • इसका उद्देश्य अगले कुछ वर्षों में इस संख्या को 15% तक बढ़ाना है।
  • कम मूल्य निर्धारण उत्पादकों को दंडित करता है:
    • भारतीय गैस कीमत भारत में LNG आयात की कीमत तथा बेंचमार्क वैश्विक गैस दरों के औसत पर निर्धारित की जाती है।
    • भारत द्वारा इसका कम मूल्य निर्धारित किया जा रहा है।
    • मौजूदा कीमतों पर उत्पादक दंडित होते हैं और कुछ हद तक उपभोक्ता उत्पादक को दोष देता है।

भारत में गैस बाज़ार का परिदृश्य:

  • भारत में कुल खपत 175 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) है।
    • इसमें से 93 MMCMD घरेलू उत्पादन के माध्यम से और 82 MMCMD द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (Liquefied Natural Gas-LNG) आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है। गैस की खपत सीधे आपूर्ति की उपलब्धता से संबंधित है।
  • देश में खपत होने वाली प्राकृतिक गैस में से लगभग 50% LNG का आयात किया जाता है।
  • उर्वरक क्षेत्र गैस का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो खपत का एक तिहाई हिस्सा है, इसके बाद शहरी गैस वितरण (23%), विद्युत (13%), रिफाइनरी (8%) और पेट्रोकेमिकल्स (2%) का स्थान आता है।
  • कई उद्योगों को डर है कि अगर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में LNG (आयातित गैस) की कीमतें 45 अमेरिकी डॉलर प्रति मैट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (Metric Million British Thermal Unit- mmBtu) के दायरे में बनी रहीं तो दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता को मौजूदा स्तरों से प्राकृतिक गैस की खपत में गिरावट देखने को मिल सकती है।

भारत में वर्तमान गैस मूल्य निर्धारण:

  • परिचय:
    • भारत में प्रशासित मूल्य तंत्र (Administered Price Mechanism- APM) के तहत गैस की कीमत, सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
      • इस प्रणाली के तहत, तेल और गैस क्षेत्र को चार चरणों- उत्पादन, शोधन, वितरण और विपणन में नियंत्रित किया जाता है। ।
    • गैर-प्रशासित मूल्य तंत्र या मुक्त बाज़ार गैस को आगे दो श्रेणियों - अर्थात् संयुक्त उद्यम क्षेत्रों से घरेलू रूप से उत्पादित गैस और आयातित LNG में विभाजित किया गया है।
      • प्राकृतिक गैस का मूल्य निर्धारण उत्पादन साझाकरण अनुबंध (Production Sharing Contract- PSC) प्रावधानों के अनुसार नियंत्रित होता है।
      • जबकि टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत LNG की कीमत LNG विक्रेता और खरीदार के मध्य बिक्री और खरीद समझौता (Sale and Purchase Agreement- SPA) द्वारा नियंत्रित होता है, स्पॉट कार्गो पारस्परिक रूप से सहमत वाणिज्यिक शर्तों पर खरीदे जाते हैं।
    • इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के लिये अलग-अलग मूल्य निर्धारण मौज़ूद है। विद्युत और उर्वरक जैसे सब्सिडी वाले क्षेत्रों को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत मिलती है।
    • इसके अलावा, देश के अन्य हिस्सों की तुलना में उत्तर पूर्वी राज्यों को अपेक्षाकृत सस्ती कीमतों पर गैस मिलने के साथ देश में क्षेत्र विशिष्ट मूल्य निर्धारण मौजूद है।
      • भारतीय बाज़ार में गैस आपूर्ति के एक बड़े हिस्से का मूल्य निर्धारण नियंत्रित है और बाज़ार संचालित नहीं है क्योंकि कीमत बदलने से पहले सरकार की मंज़ूरी आवश्यक है।
  • मुद्दे:
    • नियंत्रित मूल्य निर्धारण के परिणामस्वरूप विदेशी अभिकर्त्ताओं की सीमित भागीदारी के मामले में इस क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित किया जा सकता है, जिनके पास गहरे जल के E&D गतिविधियों के संदर्भ में आवश्यक प्रौद्योगिकी तक पहुँच है।
    • इसके अलावा नियंत्रित मूल्य निर्धारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने के लिये उपभोक्ता क्षेत्रों (बिजली / उर्वरक / घरेलू) की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बाधित करता है क्योंकि इससे मांग पक्ष में ऊर्जा दक्षता में कम निवेश होता है।

आगे की राह

  • चूँकि देश में कई मूल्य निर्धारण व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, विभिन्न स्रोतों से गैस एकत्रित करने की नीति निर्माताओं द्वारा विचार-विमर्श किया गया है।
  • विद्युत और उर्वरक ग्राहकों के अलग स्रोत के साथ क्षेत्रीय स्रोत पर विचार किया जा रहा। ग्राहक समूहों और संबंधित प्रशासनिक मुद्दों के बीच क्रॉस सब्सिडी से बचने के मद्देनजर अलग स्रोत पर विचार किया गया।
  • रंगराजन समिति ने निष्पक्ष और एक-समान गैस मूल्य निर्धारण का प्रस्ताव दिया है।
  • घरेलू गैस मूल्य निर्धारण विधि गैस आयात के लिये वेल-हेड पर वॉल्यूम-वेटेड एवरेज का 12 महीने का ट्रेलिंग एवरेज और यूएस हेनरी हब, यूके एनबीपी और जापानी क्रूड कॉकटेल कीमतों का वॉल्यूम-वेटेड एवरेज होना चाहिये।

स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स

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