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भारतीय इतिहास

मोहनजोदड़ो: यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल

  • 07 Sep 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सिंधु घाटी सभ्यता, विश्व विरासत का महत्त्व, पाकिस्तान में बाढ़।

मेन्स के लिये:

मोहनजोदड़ो, यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल।

चर्चा में क्यों?

पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग ने चेतावनी दी है कि सिंध प्रांत में भारी वर्षा से मोहनजोदड़ो के विश्व धरोहर  का दर्जा खतरे में पड़ गया है।

विरासत स्थल को खतरा:

  • 16 और 26 अगस्त, 2022 के बीच, मोहनजोदड़ो के पुरातात्विक खंडहरों में रिकॉर्ड 779.5 मि.मी. वर्षा हुई, जिसके परिणामस्वरूप "स्थल को काफी नुकसान हुआ और स्तूप गुंबद की सुरक्षा दीवार सहित कई दीवारें आंशिक रूप से गिर गईं" है।
    • मुनीर क्षेत्र, स्तूप, महान स्नानागार और इन खंडहरों के अन्य महत्त्वपूर्ण स्थल प्राकृतिक आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
  • यह आशंका है कि मोहनजोदड़ो के खंडहरों को विश्व विरासत सूची से हटाया जा सकता है, इसलिये सिंध के अधिकारियों ने स्थल पर संरक्षण और बहाली के कार्य पर तत्काल ध्यान देने का आह्वान किया है।

मोहनजोदड़ो के प्रमुख बिंदु:

  • मोहनजोदड़ो का स्थल, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'मृतकों का टीला' सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) के महत्त्वपूर्ण स्थलों में से एक है।
    • सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल पाकिस्तान-ईरान सीमा के पास बलूचिस्तान में सुत्कागेनडोर से लेकर उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के आलमगीरपुर तक और जम्मू के मांडा से लेकर महाराष्ट्र के दाइमाबाद तक फैले एक बड़े क्षेत्र में पाए गए हैं।
    • भारत में हड़प्पा सभ्यता के अन्य महत्त्वपूर्ण स्थल गुजरात में लोथल, धौलावीरा और राजस्थान में कालीबंगा हैं।
  • हड़प्पा के साथ-साथ मोहनजोदड़ो भी कांस्ययुगीन (3300 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व) शहरी सभ्यता का सबसे प्रसिद्ध स्थल है।
  • यह लगभग 3,300 ईसा पूर् और 1,300 ईसा पूर्व के बीच सिंधु घाटी में विकसित हुआ, इसका 'परिपक्व' चरण 2,600 ईसा पूर्व से 1,900 ईसा पूर्व तक था।
  • दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य में सभ्यता का पतन जलवायु परिवर्तन जैसे कारणों से माना जाता है।
  • मोहनजोदड़ो की खुदाई वर्ष 1920 में शुरू हुई थी और वर्ष 1964-65 तक चरणों में जारी रही, अभी भी केवल एक छोटे से हिस्से की खुदाई की गई है।
    • मोहनजोदड़ो की प्रागैतिहासिक प्राचीनता की खोज वर्ष 1922 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रखाल दास बनर्जी ने की थी।
  • यह स्थल ईंट से बने फुटपाथ, विकसित जल आपूर्ति, जल निकासी, शौचालयों, विशाल अन्नागार और स्नानागार एवं स्मारक भवनों के साथ परस्पर समकोण पर काटती हुई सड़कों तथा विस्तृत नगर नियोजन प्रणाली के लिये प्रसिद्ध है।
  • अपने चरमोत्कर्ष और अत्यधिक विकसित सामाजिक संगठन के साथ इसके अनुमानित निवासियों की संख्या  30,000 से 60,000 के मध्य थी
  • कराची से 510 किलोमीटर उत्तर पूर्व और सिंध में लरकाना से 28 किलोमीटर दूर बिना पकी ईंट के विशाल शहर के खंडहरों को वर्ष 1980 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी।

यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल:

  • परिचय:
    • विश्व धरोहर/विरासत स्थल का आशय एक ऐसे स्थान से है, जिसे यूनेस्को द्वारा उसके विशिष्ट सांस्कृतिक अथवा भौतिक महत्त्व के कारण सूचीबद्ध किया गया है।
    • विश्व धरोहर स्थलों की सूची को ‘विश्व धरोहर कार्यक्रम’ द्वारा तैयार किया जाता है, यूनेस्को की ‘विश्व धरोहर समिति’ द्वारा इस कार्यक्रम को प्रशासित किया जाता है।
    • यह सूची यूनेस्को द्वारा वर्ष 1972 में अपनाई गई ‘विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण से संबंधित अभिसमय’ नामक एक अंतर्राष्ट्रीय संधि में सन्निहित है।
  • सूचीबद्ध स्थलों की संख्या:
    • इसके 167 सदस्य देशों में लगभग 1,100 यूनेस्को सूचीबद्ध स्थल हैं।
    • वर्ष 2021 में यूनाइटेड किंगडम में 'लिवरपूल मैरीटाइम मर्केंटाइल सिटी' को "संपत्ति के उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य को व्यक्त करने वाली विशेषताओं के अपरिवर्तनीय नुकसान" के कारण विश्व विरासत सूची से हटा दिया गया था।
      • वर्ष 2007 में यूनेस्को पैनल ने ओमान में अरब ओरिक्स अभयारण्य को अवैध शिकार और निवास स्थान के क्षरण पर चिंताओं के बाद और वर्ष 2009 में जर्मनी के ड्रेसडेन में एल्बे घाटी को एल्बे नदी के पार वाल्डस्च्लोसेचेन रोड ब्रिज के निर्माण के बाद इस सूची से  हटा दिया ।
  • भारत के स्थल:
    • भारत में कुल 3691 स्मारकों और स्थल हैं। इनमें से 40 यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित हैं।
    • जिसमें ताजमहल, अजंता और एलोरा की गुफाएँ शामिल हैं। विश्व धरोहर स्थलों में असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्राकृतिक स्थल भी शामिल हैं।
    • वर्ष 2022 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने वर्ष 2022-2023 के लिये विश्व विरासत स्थल के रूप में विचार करने के लिये होयसल मंदिरों के पवित्र समागम को नामित किया।

यूनेस्को (UNESCO):

प्रश्न: निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सिंधु सभ्यता के लोगों की विशेषता/विशेषताएंँ प्रदर्शित करता है/करते हैं? (2013)

  1. उनके पास बड़े-बड़े महल और मंदिर थे।
  2. वे पुरुष और स्त्री दोनों रूपों में देवताओं की पूजा करते थे।
  3. उन्होंने युद्ध में घोड़ों द्वारा खींचे गए रथों को नियोजित किया।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1, 2 और 3
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं है

उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • सिंधु घाटी स्थलों की खुदाई ने पुष्टि की कि सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों ने बड़ी स्मारक संरचनाओं का निर्माण नहीं किया था। महलों या मंदिरों या यहाँ तक कि राजाओं, सेनाओं या पुजारियों का भी कोई निर्णायक प्रमाण नहीं है। पाए जाने वाले सबसे बड़े ढाँचे अन्न भंडार हैं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • मोहनजोदड़ो शहर में बृहत् स्नानागार है, जो शायद एक बड़ा, सार्वजनिक स्नान और सामाजिक क्षेत्र रहा होगा।
  • विभिन्न खुदाई के दौरान मिली मिट्टी की मुहरों से एक पुरुष भगवान की उपस्थिति का पता चलता है। विभिन्न जानवरों से घिरी एक टोपी पहने हुए एक पुरुष भगवान के साथ मुहर, शक्ति के पुरुष प्रतीक में विश्वास को प्रोत्साहित करती है। उत्खनन में मिली एक महिला भगवान की मूर्ति भी सृजन के स्रोत के रूप में महिला पर उनकी मान्यताओं का सुझाव देती है। अत: कथन 2 सही है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान घोड़ों द्वारा खींचे गए रथों का कोई प्रमाण नहीं है। अत: कथन 3 सही नहीं है।

मेन्स

 प्रश्न: सिंधु घाटी सभ्यता की शहरी नियोजन और संस्कृति ने किस हद तक वर्तमान शहरीकरण को इनपुट प्रदान किया है? चर्चा कीजिये। (2014)

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