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सामाजिक न्याय

भारत की एनीमिया नीति पर पुनर्विचार

  • 06 Jun 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS), WHO, एनीमिया मुक्त भारत, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)

मेन्स के लिये:

महिलाओं, स्वास्थ्य एवं सरकारी नीतियों और हस्तक्षेपों से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों? 

एनीमिया नीति पर भारत पुनर्विचार कर रहा है तथा एनीमिया/रक्ताल्पता प्रसार के अनुमान को राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) से आहार और बायोमार्कर सर्वेक्षण (Diet and Biomarkers Survey- DABS-I) में स्थानांतरित कर रहा है।

  • देश में एनीमिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए NFHS में हीमोग्लोबिन स्तर के आकलन की सटीकता के विषय में चिंता जताए जाने के बाद यह फैसला आया है।l

एनीमिया से संबंधित प्रमुख बिंदु: 

  • एनीमिक स्थिति
    • यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिये लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनकी ऑक्सीजन-वहन क्षमता अपर्याप्त होती है, जो उम्र, लिंग, ऊँचाई, धूम्रपान और गर्भावस्था की स्थिति में भिन्न हो सकती है।
  • कारण:  
    • आयरन की कमी एनीमिया का सबसे आम कारण है। हालाँकि अन्य स्थितियाँ, जैसे- फोलेट, विटामिन B12 और विटामिन A की कमी, पुराना सूजन, परजीवी संक्रमण और आनुवंशिक विकार आदि एनीमिया का कारण हो सकते हैं।
      • इसकी गंभीरता थकान, कमज़ोरी, चक्कर आना और उनींदापन जैसी स्थिति उत्पन्न करती है। इसकी वजह से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों में अधिक कमज़ोरी देखी जाती है।
  • भारत में एनीमिया का बोझ:  
    • NFHS-5 (2019-21) ने भारत में एनीमिया के खतरे के विषय में उल्लेखनीय वृद्धि का खुलासा किया, जिसमें 57% महिलाएँ (15-49 आयु वर्ग) और 67% बच्चे (6-59 महीने) एनीमिया से पीड़ित हैं
  • परिवर्तन का कारण:  
    • शोधकर्त्ताओं ने भारत में एनीमिया के अति-निदान के प्रति आगाह किया है क्योंकि हीमोग्लोबिन के लिये WHO कट-ऑफ उपयुक्त नहीं हो सकता है।
      • क्योंकि हीमोग्लोबिन के लिये कट-ऑफ प्वाइंट उम्र, लिंग, शारीरिक स्थिति, ऊँचाई और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
    • NFHS और अनुशंसित शिरापरक रक्त नमूने के बीच रक्त नमूनाकरण विधियों में अंतर की पहचान की गई जो संभावित रूप से गलत जानकारी प्रदर्शित कर सकता है।
  • आहार और बायोमार्कर सर्वेक्षण (DABS-I):
    • DABS-I एक व्यापक राष्ट्रीय स्तर का आहार सर्वेक्षण है जिसका उद्देश्य विभिन्न आयु समूहों और क्षेत्रों में खाद्य पदार्थ एवं पोषक तत्त्वों की पर्याप्तता का निर्धारण करना है।
    • सर्वेक्षण व्यक्तिगत आहार सेवन डेटा एकत्र करता है और पके एवं बिना पके खाद्य पदार्थों में पोषक तत्त्वों की संरचना की जानकारी प्रदान करता है।
    • DABS-I से एनीमिया की व्यापकता के बेहतर अनुमानों की पेशकश करने और लक्षित हस्तक्षेपों को विकसित करने में सहायता की उम्मीद है।
  • एनीमिया डेटा का महत्त्व:
    • एनीमिया डेटा सार्वजनिक स्वास्थ्य के एक महत्त्वपूर्ण संकेतक के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से कमज़ोर आबादी जैसे कि गर्भवती महिलाओं और पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिये।
    • एनीमिया प्रसार अध्ययन कार्य क्षमता, राष्ट्रीय विकास और प्रजनन स्वास्थ्य पर एनीमिया के प्रभावों के संदर्भ में जानकारी प्रदान करता है

सरकारी पहल:

  • एनीमिया मुक्त भारत (AMB): इसे वर्ष 2018 में गहन राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल (NIPI) कार्यक्रम के हिस्से के रूप में एनीमिया की गिरावट की वार्षिक दर को एक से तीन प्रतिशत अंक तक बढ़ाने के लिये शुरू किया गया था।
    • AMB के लिये लक्ष्य समूह 6-59 महीने के बच्चे, 5-9 वर्ष, 10-19 वर्ष की किशोर लड़कियाँ और लड़के, प्रजनन आयु की महिलाएँ (15-49 वर्ष), गर्भवती महिलाएँ एवं स्तनपान कराने वाली माताएँ हैं।
  • साप्ताहिक लौह और फोलिक अम्ल अनुपूरण (WIFS):  
    • यह कार्यक्रम किशोर लड़कियों और लड़कों के बीच एनीमिया के उच्च प्रसार की चुनौती को रोकने के लिये लागू किया जा रहा है। 
    • WIFS के तहत हस्तक्षेप में आयरन फोलिक एसिड (IFA) टैबलेट का साप्ताहिक अंतर्ग्रहण शामिल है।
  • ब्लड बैंक का संचालन:
    • गंभीर एनीमिया की जटिलताओं से निपटने के लिये ज़िला अस्पतालों और उप-ज़िला सुविधाओं में रक्त भंडारण इकाई जैसे अनुमंडलीय अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना हेतु कदम उठाए जा रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA):  
    • यह एनीमिया की जाँच और उपचार के लिये विशेष चिकित्सा अधिकारियों/OBGYN की मदद से प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित किया जाता है।
  • उठाए गए अन्य कदम:
    • कृमि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिये एल्बेंडाज़ोल (Albendazole) के साथ द्विवार्षिक कृमिनाशक दवा दी जाती है।
    • एनीमिक और गंभीर रूप से एनीमिक गर्भवती महिलाओं के मामलों की रिपोर्टिंग एवं ट्रैकिंग के लिये स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली तथा मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है।
    • एनीमिया के लिये गर्भवती महिलाओं की सार्वभौमिक जाँच प्रसवपूर्व देखभाल का एक हिस्सा है और सभी गर्भवती महिलाओं को उप-केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के मौजूदा नेटवर्क के साथ-साथ ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (VHND) में आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से प्रसव पूर्व अवधि के दौरान आयरन व फोलिक एसिड की गोलियाँ प्रदान की जाती हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रश्न. एनीमिया मुक्त भारत रणनीति के अंतर्गत की जा रही व्यवस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः

  1. इसमें स्कूल जाने से पूर्व के (प्री-स्कूल) बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिये रोगनिरोधक कैल्सियम पूरकता प्रदान की जाती है।
  2. इसमें शिशु जन्म के समय देरी से रज्जु बंद करने के लिये अभियान चलाया जाता है।
  3. इसमें बच्चों और किशोरों की निर्धारित अवधियों पर कृमि-मुक्ति की जाती है।
  4. इसमें मलेरिया, हीमोग्लोबिनोपैथी और फ्रलुओरोसिस पर विशेष ध्यान देने के साथ स्थानिक बस्तियों में एनीमिया के गैर-पोषण कारणों की ओर ध्यान दिलाना शामिल है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

(a) केवल एक 
(b) केवल दो
(c) केवल तीन 
(d) सभी चार

उत्तर: (c)

व्याख्या:

  • इसमें रोगनिरोधी कैल्शियम पूरकता नहीं बल्कि प्रोफिलैक्टिक आयरन और फोलिक एसिड पूरकता बच्चों, किशोरों एवं प्रजनन आयु की महिलाओं तथा गर्भवती महिलाओं को एनीमिया के बावजूद प्रदान की जाती है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • शिशु और छोटे बच्चों का उपयुक्त आहार (Appropriate Infant and Young Child Feeding- IYCF) 6 महीने तथा उससे अधिक उम्र के बच्चों हेतु पर्याप्त एवं आयु-उपयुक्त पूरक खाद्य पदार्थ प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • अपने आहार में विविधता लाकर भोजन की मात्रा एवं आवृत्ति में वृद्धि करना, साथ ही खाद्य पदार्थों में आयरन युक्त, प्रोटीन युक्त तथा विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाना।
  • सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में विलंबित कॉर्ड क्लैम्पिंग (रक्त के प्रवाह को रोकना) (कम से कम 3 मिनट या रज्‍जु स्पंदन बंद होने तक) को बढ़ावा देना, इसके बाद प्रसव के 1 घंटे के भीतर प्रारंभिक स्तनपान कराने पर ज़ोर देना। अतः कथन 2 सही है।
  • राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day- NDD) के तहत प्रत्येक वर्ष 1-19 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों हेतु द्वि-वार्षिक सामूहिक कृमि नियंत्रण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। अतः कथन 3 सही है।
  • NDD योजना के हिस्से के रूप में एनीमिया मुक्त भारत में गर्भवती महिलाओं और प्रजनन आयु की महिलाओं हेतु कृमिनाशक दवा भी शामिल है।
  • मलेरिया, हीमोग्लोबिनोपैथी और फ्लोरोसिस पर विशेष ध्यान देने के साथ स्थानिक क्षेत्रों में एनीमिया के गैर-पोषण संबंधी कारणों को उजागर करना। अतः कथन 4 सही है।

प्रश्न. सार्विक स्वास्थ्य संरक्षण प्रदान करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की अपनी परिसीमाएँ हैं। क्या आपके विचार में खाई को पाटने में निजी क्षेत्रक सहायक हो सकता है? आप अन्य कौन-से व्यवहार्य विकल्प सुझाएंगे?  (मुख्य परीक्षा, 2015) 

स्रोत: द हिंदू

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