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प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता

  • 29 Jul 2022
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

प्रतिस्थापन प्रजनन दर, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सेवा, संबंधित सरकारी योजनाएँ

मेन्स के लिये:

बढ़ती/घटती जनसंख्या का महत्त्व, परिवार नियोजन का महत्त्व, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, सरकार की पहल

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार ने बताया कि देश ने प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें 31 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की कुल प्रजनन दर 2.1 या उससे कम है।

  • वर्ष 2012 और 2020 के बीच भारत में आधुनिक गर्भ निरोधक उपायों से 1.5 करोड़ से अधिक युगल लाभान्वित हुए जो इनके उपयोग में हुई वृद्धि को दर्शाता है।
  • सरकार ने भारत परिवार नियोजन 2030 विज़न दस्तावेज़ का भी अनावरण किया।

प्रतिस्थापन प्रजनन क्षमता:

  • प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चों की कुल प्रजनन दर (TFR) को प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता कहा जाता है।
    • प्रति महिला 2.1 बच्चों से कम TFR - इंगित करता है कि एक पीढ़ी स्वयं को प्रतिस्थापित करने के लिये लिये पर्याप्त बच्चे पैदा नहीं कर रही है, अंततः जनसंख्या में समग्र रूप से कमी आई है।
    • कुल प्रजनन दर एक महिला के संपूर्ण जीवनकाल में प्रसव करने वाली उम्र की महिला से पैदा या पैदा होने वाले कुल बच्चों की संख्या को संदर्भित करती है।
  • भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) वर्ष 2015-16 के 2.2 से घटकर वर्ष 2019-21 में 2.0 हो गई है, जो जनसंख्या नियंत्रण उपायों की महत्त्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है, जैसा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के पाँचवें दौर की रिपोर्ट से भी पता चलता है।

भारत परिवार नियोजन 2030 विज़न:

  • केंद्र बिंदु:
    • बच्चे पैदा करने की रणनीति, जागरूकता कार्यक्रमों में पुरुष भागीदारी की कमी, प्रवास और गर्भ निरोधकों तक पहुँच की कमी को प्राथमिकताओं के रूप में पहचाना गया है।
  • गर्भ निरोधक:
    • आधुनिक गर्भ निरोधक प्रसार दर:
      • प्रवासी विवाहित पुरुषों की बड़ी संख्या:
        • बिहार में 35 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 24 प्रतिशत।
        • आधुनिक गर्भ निरोधक प्रसार दर में कमी ज़्यादातर गर्भ निरोधक तैयारियों की कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच के कारण गर्भ निरोधकों की खरीद में असमर्थता और महिलाओं द्वारा गर्भ निरोधक को खरीदने के बारे में सामाज में व्याप्त संकोच की प्रवृत्ति के कारण भी होता है।
      • निवासी पुरुषों की संख्या:
        • बिहार में 47 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 36 प्रतिशत।
    • यद्यपि विवाहित किशोरों और युवतियों में आधुनिक गर्भ निरोधकों का उपयोग बढ़ा है, लेकिन यह अपेक्षाकृत रूप से कम है।
      • विवाहित महिलाओं और युवतियों ने बताया कि गर्भनिरोधक गोलियों की की पर्याप्त मात्रा में प्राप्त नही हो पाती है।
    • कई ज़िलों में 20% से अधिक महिलाओं की शादी वयस्क होने से पहले ही हो जाती है।
      • इनमें बिहार के 17, पश्चिम बंगाल के 8, झारखंड के 7, असम के 4, यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के दो-दो ज़िले शामिल हैं।
      • इन ज़िलों में आधुनिक गर्भ निरोधकों का कम उपयोग देखा गया है।
    • इस दृष्टि से आधुनिक गर्भ निरोधकों को उपलब्ध कराने के लिये निजी क्षेत्र का उपयोग करना भी योजना में शामिल है।
      • निजी क्षेत्र द्वारा गर्भ निरोधक गोलियों के वितरण में 45% और कंडोम के वितरण में 40% का योगदान दिया जाता है। इसके साथ ही इंजेक्शन जैसे अन्य प्रतिवर्ती गर्भ निरोधकों एवं अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण (IUCD) में क्रमशः 30% और 24% का योगदान है।

प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन में गिरावट का कारण:

  • महिला सशक्तीकरण:
    • नवीनतम आँकड़े प्रजनन क्षमता, परिवार नियोजन, विवाह की आयु और महिला सशक्तीकरण से संबंधित कई संकेतकों पर महत्त्वपूर्ण प्रगति दर्शाते हैं, इन सभी ने टीएफआर में कमी लाने में योगदान दिया है।
  • गर्भनिरोधक:
    • वर्ष 2012 और 2020 के बीच भारत ने आधुनिक गर्भ निरोधकों के उपयोग के लिये 1.5 करोड़ से अधिक अतिरिक्त उपयोगकर्त्ताओं शामिल किया जिससे इनके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
  • रिवर्सिबल स्पेसिंग:
  • नई ‘रिवर्सिबल स्पेसिंग’ (बच्चों के बीच अंतर) विधियों की शुरुआत, नसबंदी के परिणामस्वरूप मज़दूरी मुआवज़ा प्रणाली और छोटे परिवार के मानदंडों को बढ़ावा देने जैसी कार्यवाहियों ने पिछले कुछ वर्षों में बेहतर प्रदर्शन किया है।
  • सरकारी पहल:
  • मिशन परिवार विकास:
  • सरकार ने सात उच्च फोकस वाले राज्यों में 3 और उससे अधिक के टीएफआर वाले 146 उच्च प्रजनन क्षमता वाले ज़िलों में गर्भ निरोधकों एवं परिवार नियोजन सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के लिये वर्ष 2017 में ‘मिशन परिवार विकास’ शुरू किया।
  • राष्ट्रीय परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना (NFPIS):
  • यह योजना वर्ष 2005 में शुरू की गई थी, इस योजना के तहत नसबंदी के बाद मृत्यु, जटिलता और विफलता की स्थिति के लिये ग्राहकों का बीमा किया जाता है।
  • नसबंदी करने वालों के लिये मुआवज़ा योजना:
  • इस योजना के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014 से नसबंदी कराने वाले लाभार्थी और सेवा प्रदाता (टीम) को मुआवज़ा प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण: 

  • परिचय:
    • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey- NFHS) संपूर्ण भारत में परिवारों के प्रतिनिधि नमूने के माध्यम से व्यापक पैमाने पर आयोजित किया जाने वाला एक बहु-स्तरीय सर्वेक्षण है।
  • आयोजन:
    • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने सर्वेक्षण के लिये समन्वय एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) मुंबई को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है।
    • IIPS सर्वेक्षण कार्यान्वयन के लिये कई क्षेत्रीय संगठनों (FO) के साथ सहयोग करता है।
  • उद्देश्य:
    • NFHS के प्रत्येक क्रमिक चरण के दो विशिष्ट लक्ष्य हैं:
      • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा अन्य एजेंसियों द्वारा नीति एवं कार्यक्रम के उद्देश्यों के लिये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर आवश्यक डेटा प्रदान करना।
      • उभरते महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के मुद्दों पर जानकारी प्रदान करना।
    • सर्वेक्षण निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत केी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की जानकारी प्रदान करता है:
      • प्रजनन
      • शिशु एवं बाल मृत्यु दर
      • परिवार नियोजन का अभ्यास
      • मातृ और शिशु स्वास्थ्य
      • प्रजनन स्वास्थ्य
      • पोषण
      • रक्ताल्पता
      • स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सेवाओं का उपयोग एवं गुणवत्ता।
  • NFHS - 5 रिपोर्ट:
    • NFHS-4 (2015-16) और NFHS-5 (2019-20) के बीच राष्ट्रीय स्तर पर कुल प्रजनन दर (TFR) 2.2% से घटकर 2.0% हो गई है।
    • भारत में केवल पाँच राज्य ऐसे हैं जो 2.1े की प्रजनन क्षमता के प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर हैं। ये राज्य हैं बिहार, मेघालय, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मणिपुर।

आगे की राह:

  • हालाँकि भारत ने प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता हासिल कर ली है, फिर भी प्रजनन आयु वर्ग में एक महत्त्वपूर्ण आबादी ऐसी है जिसे हस्तक्षेप प्रयासों के केंद्र में रखा जाना चाहिये।
  • भारत का ध्यान परंपरागत रूप से आपूर्ति पक्ष यानी प्रदाताओं और वितरण प्रणालियों पर रहा है, लेकिन अब समय मांग पक्ष पर ध्यान केंद्रित करने का है जिसमें परिवार, समुदाय और समाज शामिल हैं।
  • आपूर्ति पक्ष के स्थान पर मांग पक्ष पर ध्यान केंद्रित करने से महत्त्वपूर्ण परिवर्तन संभव है।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्षों के प्रश्न:

प्रश्न 1. ''महिलाओं का सशक्तीकरण जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने की कुंजी है।'' विवेचना कीजिये। (2019, मुख्य परीक्षा)

प्रश्न 2. भारत में वृद्ध जनसंख्या पर वैश्वीकरण के प्रभाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये। (2013, मुख्य परीक्षा)

प्रश्न 3. जनसंख्या शिक्षा के मुख्य उद्देश्यों की विवेचना कीजिये तथा भारत में इन्हें प्राप्त करने के उपायों का विस्तार से उल्लेख कीजिये। (2021, मुख्य परीक्षा)

स्रोत: द हिंदू

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