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  • 16 Jul 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये 

भारतीय निर्वाचन आयोग

मेन्स के लिये 

पोस्टल बैलेट की आवश्यकता व महत्त्व  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग ने वैश्विक महामारी COVID-19 के बढ़ते जोखिम को देखते हुए 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को पोस्टल बैलेट द्वारा मतदान करने की सुविधा प्रदान कर दी है।

प्रमुख बिंदु

  • भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में 80 वर्ष की आयु से अधिक वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांग नागरिकों को पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान करने की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।
  • कोरोना संकट का असर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। सोशल डिस्टेंसिंग और बूथों पर भीड़ कम करने के लिये चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलेट से मतदान की आयु को 80 वर्ष से घटाकर अब 65 वर्ष कर दी है।
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को अनुमति देने के बाद अब 65 वर्ष और इससे अधिक आयु वाले मतदाता घर से ही मतदान कर सकेंगे। इससे मतदान केंद्रों पर भीड़ को कम करने में भी मदद मिलेगी।

पोस्टल बैलेट से तात्पर्य 

  • जो व्यक्ति किसी निर्दिष्ट सेवा में कार्यरत होने के कारण अथवा दिव्यांग या वरिष्ठ नागरिक होने के कारण मतदान केंद्र तक पहुँचने में असमर्थ हैं। उन लोगों को डाकपत्र के माध्यम से मताधिकार का प्रयोग करने की सुविधा देना ही पोस्टल बैलेट कहलाता है।
  • भारत निर्वाचन आयोग ‘अनुपस्थित मतदाता’ की सभी श्रेणियों के मतदाताओं के लिये सरल तथा सहज मताधिकार प्रयोग करने की प्रकिया उपलब्ध कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस पहल से इस बात की आश्वस्तता बढ़ी है कि वरिष्ठ नागरिक तथा दिव्यांग व्यक्ति भी अपने मताधिकार का सहज रूप से प्रयोग कर सकेंगे।

प्रवासियों के मताधिकार का मुद्दा 

  • विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि पोस्टल बैलेट के माध्यम से मताधिकार करने की सुविधा का विस्तार प्रवासी मज़दूरों तक किया जाए
  • वर्ष 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, घरेलू प्रवासियों की संख्या तकरीबन 13.9 करोड़ है। यह भारत की श्रमशक्ति का लगभग एक-तिहाई है।
  • घरेलू प्रवासी श्रमिक बेहतर कार्य की तलाश में महानगरों की ओर पलायन करते हैं, उनका महानगरों में स्थायी निवास का लक्ष्य नहीं होता है परिणामस्वरूप महानगरों के निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत न होने के कारण वे अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं।
  • जनप्रतिनिधियों को चुनने में प्रवासी श्रमिकों की कोई विशेष भूमिका नहीं होती है इसलिये इस वर्ग की समस्याओं को किसी भी प्रकार की तवज्जों नहीं मिल पाती है।
  • बड़ी संख्या में होने के बावजूद अपने मताधिकार का प्रयोग न कर पाने के कारण प्रवासी श्रमिकों को ‘विस्मृत मतदाता’ की संज्ञा दी गई है।

निर्वाचन आयोग की भूमिका

  • वर्तमान में भारतीय पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 91.05 करोड़ है, जो वास्तव में गर्व का विषय है। 
  • वर्ष 2019 में हुए आम चुनाव में लगभग 67.4 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। निर्वाचन आयोग को अपना ध्यान 29.68 करोड़ उन मतदाताओं पर लगाना चाहिये जिन्होंने पंजीकृत होने के बाद भी अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। 
  • राष्ट्रीय चुनाव अध्ययन सर्वेक्षणों से पता चला है कि लगभग 10 प्रतिशत पंजीकृत मतदाता राजनीति में रुचि की कमी के कारण मतदान करने से बचते हैं।
  • लगभग 20 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो मतदान करना चाहते हैं परंतु अनुकूल परिस्थितियाँ न होने के कारण वे मतदान नहीं कर पाते हैं। इनमें घरेलू प्रवासी और अनिवासी भारतीय शामिल हैं।
  • वस्तुतः अनिवासी भारतीयों को मताधिकार उपलब्ध कराने के लिये निर्वाचन आयोग ने अधिकृत व्यक्ति (Authorised proxies) के माध्यम से मत देने की व्यवस्था की है

मतदाता वहनीय सुविधाएँ

  • अपने पंजीकृत निर्वाचन क्षेत्र से दूर सेवा दे रहे सरकारी कर्मचारी इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम (Electronically Transmitted Postal Ballot System-ETPBS) के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। 
  • वर्गीकृत सेवा मतदाता (सैन्य कर्मी, केंद्रीय सुरक्षा बल) अधिकृत व्यक्ति के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकता है। 
  • निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह आधार-लिंक्ड मतदान पहचान पत्र के निर्माण हेतु आवश्यक तकनीकी का परीक्षण कर रहा है। यह मतदाताओं को देश में किसी भी स्थान से डिजिटल माध्यम का प्रयोग करते हुए मतदान करने में सक्षम बनाएगा।

आगे की राह

  • भारतीय निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदान योग्य कोई भी व्यक्ति निर्वाचन प्रक्रिया में पीछे न छूट जाए।
  • निर्वाचन आयोग को पोस्टल बैलेट की सुविधा में विस्तार करते हुए इसे प्रवासी श्रमिकों तक ले जाना चाहिये।
  • COVID-19 संकट ने सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों को प्रवासी श्रमिकों तक पहुँचने के लिये  विभिन्न पोर्टल व एप स्थापित करने के लिये प्रेरित किया है। निर्वाचन आयोग को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिये।   
  • मतदान को न केवल नागरिक कर्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिये, बल्कि नागरिक अधिकार के रूप में भी देखा जाना चाहिये। 

स्रोत: द हिंदू

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