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भारत में मानसून में देरी के कारण

  • 15 Jun 2019
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

यू. एस. नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (Climate Prediction Centre of the US National Weather Service) के अनुसार, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (Madden Julian Oscillation- MJO) लहर की स्थिति और तीव्रता द्वारा भारतीय मानसून का विकास प्रभावित हुआ है, इसी के कारण भारत में मानसून के आगमन में देरी हो रही है।

मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO)

  • मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO) एक समुद्री-वायुमंडलीय घटना है जो दुनिया भर में मौसम की गतिविधियों को प्रभावित करती है।
  • यह साप्ताहिक से लेकर मासिक समयावधि तक उष्णकटिबंधीय मौसम में बड़े उतार-चढ़ाव लाने के लिये ज़िम्मेदार मानी जाती है।
  • मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (MJO) को भूमध्य रेखा के पास पूर्व की ओर सक्रिय बादलों और वर्षा के प्रमुख घटक या निर्धारक (जैसे मानव शरीर में नाड़ी (Pulse) एक प्रमुख निर्धारक होती है) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो आमतौर पर हर 30 से 60 दिनों में स्वयं की पुनरावृत्ति करती है।

MJO

  • यह निरंतर प्रवाहित होने वाली घटना है एवं हिंद एवं प्रशांत महासागरों में सबसे प्रभावशाली है। इसलिये MJO हवा, बादल और दबाव की एक चलती हुई प्रणाली है। यह जैसे ही भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमती है वर्षा की शुरुआत हो जाती है।
  • इस घटना का नाम दो वैज्ञानिकों रोलैंड मैडेन और पॉल जूलियन के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने वर्ष 1971 में इसकी खोज की थी।

मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन का भारतीय मानसून पर प्रभाव

  • इंडियन ओशन डाईपोल (The Indian Ocean Dipole-IOD), अल-नीनो (El-Nino) और मैडेन-जूलियन ऑसीलेशन (Madden-julian Oscillation-MJO) सभी महासागरीय और वायुमंडलीय घटनाएँ हैं, जो बड़े पैमाने पर मौसम को प्रभावित करती हैं।
    • इंडियन ओशन डाईपोल केवल हिंद महासागर से संबंधित है, लेकिन अन्य दो वैश्विक स्तर पर मौसम को मध्य अक्षांश तक प्रभावित करती हैं।
  • IOD और अल नीनो अपने पूर्ववर्ती स्थिति में बने हुए हैं, जबकि MJO एक निरंतर प्रवाहित होने वाली भौगोलिक घटना है।
  • MJO की यात्रा आठ चरणों से होकर गुज़रती है।
    • जब यह मानसून के दौरान हिंद महासागर के ऊपर होता है, तो संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में अच्छी बारिश होती है।
    • दूसरी ओर, जब यह एक लंबे चक्र की समयावधि के रूप में होता है और प्रशांत महासागर के ऊपर रहता है तब भारतीय मानसूनी मौसम में कम वर्षा होती है।
    • यह उष्णकटिबंध में अत्यधिक परंतु दमित स्वरूप के साथ वर्षा की गतिविधियों को संपादित करता है जो कि भारतीय मानसूनी वर्षा के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है।

खाड़ी की निगरानी

  • चक्रवात ‘वायु’ को पश्चिम हिंद महासागर और दक्षिण अरब सागर से सटी एक MJO लहर से बल प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह लहर पूर्वी हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तक पहुँच गई है।
  • अमेरिकी एजेंसी के अनुसार, अरब सागर में असामान्य रूप से गर्म पानी ने हिंद महासागर पर तेज़ हवाओं का एक दुर्लभ कटिबंध (rare band) स्थापित किया है, जिसके कारण ही केरल तट पर मानसून की शुरुआत में देरी हुई है।

भारत में सूखे की स्थिति

  • क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम मॉडल (Climate Forecast System model) के अनुसार, 12-18 जून तक भारत में सूखा जारी रहेगा अर्थात् मानसून के शुरू होने में देरी होगी। इस प्रकार देश के अन्य भागों पर भी इसका असर पड़ेगा।
  • 19 जून के बाद दक्षिण भारत में मानसून के आगमन का अनुमान व्यक्त किया गया है।
  • हालाँकि भारत मौसम विभाग (India Meteorological Department-IMD) ने 18 से 20 जून तक पश्चिमी तट के दक्षिणी हिस्सों (Southern parts of West Coast) और उत्तर-पूर्वी भारत (North-East India) में भारी बारिश की संभावना जताई है।
  • इस अवधि के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण प्रायद्वीप के बाकी हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी भारत की पहाड़ियों पर कहीं-कहीं वर्षा होने की भी उम्मीद है।

स्रोत- द हिंदू बिज़नेस लाइन

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