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स्वीडन में खोजे गए दुर्लभ मृदा तत्त्व

  • 17 Jan 2023
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

दुर्लभ मृदा तत्त्व, हरित संक्रमण, स्वच्छ ऊर्जा, नासा का अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम, इलेक्ट्रिक वाहन, क्वाड, थोरियम।

मेन्स के लिये:

दुर्लभ मृदा तत्त्वों का महत्त्व, भारत में  दुर्लभ मृदा तत्त्व,  दुर्लभ मृदा तत्त्वों पर चीन का एकाधिकार।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में स्वीडन की सरकारी स्वामित्व वाली खनन कंपनी LKAB ने यूरोप में दुर्लभ मृदा तत्त्वों के सबसे बड़े भंडार की खोज की है।

खोज का महत्त्व: 

  • स्वीडन के उत्तरी क्षेत्र में स्थित किरुना के डिपो में लगभग 1 मिलियन मीट्रिक टन दुर्लभ मृदा ऑक्साइड का भंडार है।
  • यह खोज हरित संक्रमण के लिये आवश्यक आयातित कच्चे माल पर कम निर्भरता की यूरोप की महत्त्वाकांक्षा को बल देती है।
  • वर्तमान में यूरोप में दुर्लभ मृदा तत्त्वों का खनन नहीं किया जाता है और यह ज़्यादातर उन्हें अन्य क्षेत्रों से आयात करता है।
    • BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ (European Union- EU) द्वारा उपयोग किये जाने वाले दुर्लभ मृदा तत्त्व का 98% चीन द्वारा निर्यात किया गया था। 
  • यह खोज यूरोपीय संघ के साथ-साथ अन्य पश्चिमी देशों के लिये भी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है क्योंकि ये देश दुर्लभ मृदा तत्त्वों के आयात के लिये चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।   

दुर्लभ मृदा तत्त्व: 

  • परिचय:  
    • यह 17 धातु तत्त्वों का एक समूह है। इनमें स्कैंडियम और यट्रियम के अलावा आवर्त सारणी में 15 लैंथेनाइड्स शामिल हैं जो लैंथेनाइड्स के समान भौतिक एवं रासायनिक गुणों से युक्त हैं। 
  • महत्त्व:  
    • वे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर और नेटवर्क, संचार, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत परिवहन, स्वास्थ्य देखभाल, पारिस्थितिक संरक्षण और राष्ट्रीय रक्षा प्रौद्योगिकियों के लिये महत्त्वपूर्ण हैं। 
      • स्कैंडियम का उपयोग टेलीविज़न और फ्लोरोसेंट लैंप में किया जाता है। 
      • गठिया (Rheumatoid Arthritis) और कैंसर के इलाज के लिये दवाओं में यट्रियम का उपयोग किया जाता है।  
    • इन तत्त्वों का उपयोग अंतरिक्ष शटल घटकों, जेट इंजन टर्बाइन और ड्रोन में भी किया जाता है।
    • इसके अलावा आंतरिक दहन प्रक्रिया वाली कारों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर संक्रमण के कारण भी इस प्रकार के तत्त्वों की मांग में वृद्धि हुई है। 
  • चीन का एकाधिकार:
    • चीन ने समय के साथ दुर्लभ मृदा धातुओं पर वैश्विक प्रभुत्त्व हासिल कर लिया है, यहाँ तक कि एक बिंदु पर इसने दुनिया की 90% दुर्लभ मृदा धातुओं का उत्पादन किया था।
      • वर्तमान में हालाँकि यह 60% तक कम हो गया है और शेष मात्रा का उत्पादन अन्य देशों द्वारा किया जाता है, जिसमें क्वाड (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका) देश शामिल हैं।
    • वर्ष 2010 के बाद जब चीन ने जापान, अमेरिका और यूरोप की रेयर अर्थ्स शिपमेंट पर रोक लगा दी तो एशिया, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका में छोटी इकाइयों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया एवं अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ शुरू की गईं।
  • भारत में दुर्लभ मृदा तत्त्व:
    • भारत के पास दुनिया के दुर्लभ मृदा भंडार का 6% है, यह वैश्विक उत्पादन के केवल 1% का उत्पादन करता है तथा चीन से ऐसे खनिजों की अपनी अधिकांश आवश्यकताओं को पूरा करता है।
    • इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) प्राथमिक खनिज के खनन एवं निष्कर्षण के लिये प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार है जिसमें दुर्लभ मृदा तत्त्व शामिल हैं जैसे- मोनाज़ाइट समुद्र तट रेत, जो कई तटीय राज्यों में पाए जाते हैं।
    • IREL का मुख्य फोकस परमाणु ऊर्जा विभाग को मोनाज़ाइट से निकाले गए थोरियम को उपलब्ध कराना है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. हाल में तत्त्वों के एक वर्ग, जिसे ‘दुर्लभ मृदा धातु’ कहते हैं, की कम आपूर्ति पर चिंता जताई गई। क्यों? (2012)

  1. चीन, जो इन तत्त्वों का सबसे बड़ा उत्पादक है, द्वारा इनके निर्यात पर कुछ प्रतिबंध लगा दिया गया है। 
  2. चीन, ऑस्ट्रेलिया कनाडा और चिली को छोड़कर अन्य किसी भी देश में ये तत्त्व नहीं पाए जाते हैं। 
  3. दुर्लभ मृदा धातु विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॅानिक सामानों के निर्माण में आवश्यक है, इन तत्त्वों की माँग बढती जा रही है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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