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शासन व्यवस्था

रेल विकास प्राधिकरण

  • 14 Mar 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

रेल विकास प्राधिकरण

मेन्स के लिये:

रेल विकास प्राधिकरण के कार्य

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने राज्यसभा में रेल विकास प्राधिकरण के संदर्भ में जानकारी दी।

मुख्य बिंदु:

  • रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने अप्रैल 2017 में रेल विकास प्राधिकरण के गठन को मंज़ूरी प्रदान की थी।
  • रेल विकास प्राधिकरण केंद्र सरकार को निम्नलिखित के संबंध में निर्णय लेने के लिये सलाह प्रदान करेगा-
    • लागत के साथ-साथ सेवाओं का मूल्य निर्धारण।
    • गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के उपाय।
    • सेवा गुणवत्ता और लागत अनुकूलन क्षमता सुनिश्चित करके उपभोक्ता हितों की सुरक्षा।
    • प्रतिस्पर्द्धा, दक्षता और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना।
    • बाज़ार विकास और रेल क्षेत्र में हितधारकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा हितधारकों एवं ग्राहकों के बीच उचित सौदा समझौता सुनिश्चित करना।
    • निवेश के लिये सकारात्मक माहौल बनाना।
    • रेल क्षेत्र में संसाधनों के कुशल आवंटन को बढ़ावा देना।
    • अंतर्राष्ट्रीय  मानदंडों के खिलाफ सेवा मानकों की बेंचमार्किंग करना साथ ही उन्हें प्रदान की गई सेवाओं की गुणवत्ता, निरंतरता एवं विश्वसनीयता के संबंध में मानकों को निर्दिष्ट और लागू करना।
    • भविष्य में समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और सभी व्यक्तियों को गैर-भेदभावपूर्ण अवसर प्रदान करना।
    • वांछित दक्षता और प्रदर्शन मानकों को प्राप्त करने के लिये नई तकनीकों के संबंध में उपाय सुझाना।
    • किसी भी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये मानव संसाधन विकास के संबंध में उपाय सुझाना।

रेलवे द्वारा किये जा रहे अन्य प्रयास:

गैर किराया राजस्व आय बढ़ाने हेतु प्रयास:

गैर-किराया राजस्व आय बढ़ाने के लिये भारतीय रेलवे ने मोबाइल आधारित कमर्शियल पब्लिसिटी, आउट ऑफ होम एडवरटाइज़िंग, रेल डिस्प्ले नेटवर्क, अनसॉलिटेड प्रपोज़ल और मांग आधारित प्रस्ताव जारी किये हैं।

  • इसके अलावा गैर-किराया राजस्व आय बढ़ाने के लिये ज़ोनल रेलवे महाप्रबंधकों को पूर्ण अधिकार सौंपे गए हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर मंडल रेल प्रबंधकों/अतिरिक्त रेलवे प्रबंधकों को उप-प्रतिनिधि के रूप में शक्तियाँ सौंप सकते हैं।
  • रेलवे के भूमि संसाधनों से गैर-किराया राजस्व जुटाने के लिये तत्काल परिचालन ज़रूरतों के लिये खाली रेलवे भूमि का वाणिज्यिक विकास, रेल भूमि विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जा रहा है। 
  • समय-समय पर गैर-किराया राजस्व आय के प्रदर्शन की समीक्षा भी की जाती है। 

भारतीय रेलवे की दक्षता और प्रदर्शन मानकों को बढ़ाने हेतु प्रयास:

  • भारतीय रेलवे की दक्षता और प्रदर्शन मानकों को बढ़ाने तथा अधिक जवाबदेही तय करने के लिये रेलवे बोर्ड एवं प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे/उत्पादन इकाइयों के बीच वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जा रहे हैं।
  • इन समझौता ज्ञापनों के तहत सभी क्षेत्रीय रेलवे/उत्पादन इकाइयाँ प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (Key Performance Indicators-KPIs) के लक्ष्य को प्राप्त करने का कार्य करते हैं।
  • ये KPIs अंतर-परिचालन, वित्तीय प्रदर्शन, बुनियादी ढाँचा निर्माण कार्य, क्षमता उपयोग, परिसंपत्ति के रखरखाव और विश्वसनीयता से संबंधित होते हैं। 
  • मासिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रदर्शन का मूल्यांकन और उसकी निगरानी नियमित रूप से की जाती है।
  • प्रदर्शन के संबंध में क्षेत्रीय रेलवे/उत्पादन इकाइयों द्वारा मुद्दों और बाधाओं का भी नियमित रूप से आकलन किया जाता है। जिनका प्रायः सामना किया जाता है। 

भावी आवश्यकता:

  • वर्तमान समय में रेलवे के लिये यह आवश्यक है कि वह माल-भाड़ा अथवा किराए की दरों में वृद्धि न करके नवीनतम कारोबारों के लिये इनके मूल्यों में कमी करे। इससे संगठन का निगमीकरण हो होगा तथा यह व्यावसयिक तरीके से कार्य करेगा। यदि भारत के पास उपयुक्त  कॉर्पोरेट योजना है तो निस्संदेह ऐसा किया जा सकता है। 

स्रोत- पीआईबी

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