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आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955

  • 14 Mar 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955

मेन्स के लिये:

COVID-19 (कोरोना वायरस) का मौजूदा प्रकोप और COVID-19 को रोकने के प्रबंधन हेतु लॉजिस्टिक संबंधी चिंताएँ

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) में संशोधन करते हुए मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क) और हैंड सैनिटाइज़र को दिनांक 30 जून, 2020 तक आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित करने के लिये एक आदेश अधिसूचित किया है।

मुख्य बिंदु:

  • सरकार ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 (Legal Metrology Act, 2009)  के तहत एक एडवाइज़री भी जारी की है। 
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्य, विनिर्माताओं के साथ विचार-विमर्श कर उनसे इन वस्तुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रंखला को सुचारु बनाने के लिये कह सकते हैं।

क्या है समस्या:

  • विगत कुछ सप्ताहों के दौरान कोविड-19 (कोरोना वायरस) के प्रकोप के चलते मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन95 मास्क) और हैंड सैनिटाइज़र या तो बाज़ार में अधिकांश विक्रेताओं के पास उपलब्ध नहीं हैं अथवा बहुत अधिक कीमतों पर काफी मुश्किल से उपलब्ध हो रहे हैं।

अधिनियम में शामिल करने से लाभ:

  • इन दोनों वस्तुओं के संबंध में राज्य अपने शासकीय राजपत्र में अब केंद्रीय आदेश को अधिसूचित कर सकते हैं और इस संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपने स्वयं के आदेश भी जारी कर सकते हैं साथ ही संबंधित राज्यों में व्यापत प्रकोप के आधार पर कार्रवाई कर सकते हैं।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केंद्र सरकार की शक्तियाँ वर्ष 1972  और 1978 के आदेशों के माध्यम से राज्यों को पहले ही प्रत्यायोजित की जा चुकी हैं। अतः राज्य/संघ राज्य क्षेत्र आवश्यक वस्तु अधिनियम और चोरबाज़ारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत उल्लंघनकर्त्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई कर सकते हैं। 
  • विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत राज्य न्यूनतम खुदरा मूल्य पर इन दोनों वस्तुओं की बिक्री सुनिश्चित कर सकते हैं।

क्या हैं दंडात्मक प्रावधान?

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत किसी उल्लंघनकर्त्ता को 7 वर्ष के कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है तथा चोरबाज़ारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत उसे अधिकतम 6 माह के लिये नज़रबंद किया जा सकता है।

निर्णय का संभावित प्रभाव:

  • यह निर्णय केंद्र सरकार और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन95 मास्क) और हैंड सैनिटाइज़र के उत्पादन, गुणवत्ता, वितरण आदि को विनियमित करने और इन वस्तुओं की बिक्री एवं उपलब्धता को सहज बनाने तथा आदेश के उल्लंघनकर्त्ताओं एवं इनके अधिमूल्यन, कालाबाज़ारी आदि में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिये सशक्त बनाएगा। 
  • इससे आम जनता को दोनों वस्तुएँ उचित कीमतों पर उपलब्ध होंगी।
  • राज्यों को उपरोक्त दोनों वस्तुओं के संबंध में उपभोक्ताओं द्वारा शिकायतें दर्ज कराने के लिये राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइन का प्रचार करने की सलाह भी दी गई है। 

आगे की राह:

  • कोरोनावायरस से बचाव की तैयारी करना न केवल सरकार का उत्तरदायित्व है बल्कि सभी संस्थानों, संगठनों, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों, यहाँ तक ​​कि सभी व्यक्तियों को आकस्मिक और अग्रिम तैयारी योजनाएँ बनाना चाहिये।
  • बड़े पैमाने पर व्यवहार परिवर्तन एक सफल प्रतिक्रिया की आधारशिला होगी। इसके लिये उचित जोखिम उपायों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति एक नवीन एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
  • सही जानकारी ही बचाव का बेहतर विकल्प है, इसलिये सरकार, सामाजिक संगठनों तथा लोगों को सही दिशा-निर्देशों का प्रसार करना चाहिये।

स्रोत- पीआईबी

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