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पुलायार समुदाय और अन्नामलाई टाइगर रिज़र्व

  • 08 May 2021
  • 5 min read

चर्चा में क्यों? 

तमिलनाडु के अन्नामलाई टाइगर रिज़र्व (Anamalai Tiger Reserve) की सीमा में स्थित पुलायार समुदाय की दो आदिवासी बस्तियों (कट्टूपट्टी और कुझिपट्टी) के लोग स्थानीय देवता, वीरपट्टन (Vairapattan) के वार्षिकोत्सव की तैयारी में लग गए हैं।

प्रमुख बिंदु: 

पुलायार समुदाय के बारे में:

  • पुलायार, जिसे पुलाया या होल्या भी कहा जाता है, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में पाए जाने वाले प्रमुख सामाजिक समूहों में से एक हैं।
  • पुलायार समुदाय को केरल और तमिलनाडु में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • पुलायास अपने संगीत, शिल्प कौशल और कुछ विशिष्ट नृत्य के लिये जाने जाते हैं, जिनमें शामिल हैं,
    • कुलाम-थुल्लल (Kōlam-thullal) एक मुखौटा नृत्य (Mask Dance) है, जो इनके जादू टोना या झाड़-फूँक अनुष्ठानों (Exorcism rituals) का एक हिस्सा है। 
    • मुदी-अट्टम (Mudi-āttam) नृत्य का उद्भव प्रजनन अनुष्ठान से माना जाता है। 
  • महात्मा अय्यंकाली (Mahatma Ayyankali) को 'पुलया राजा' (Pulaya King) कहा था।
    • वर्ष 1893 में अय्यनकाली ने कुछ विशिष्ट हिंदू जातियों द्वारा सार्वजनिक सड़कों के प्रयोग पर तथाकथित अछूतों को  ‘प्रतिबंधित' करने को चुनौती दी और सड़क पर बैलगाड़ी की सवारी करने विरोध दर्ज करवाया।
    • अय्यनकली ने पुलायार समुदाय के अधिकारों की वकालत की और अय्यनकाली के नेतृत्त्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण ही वर्ष 1907 में तथाकथित अछूत माने जाने वाले समुदायों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करने का फरमान जारी किया गया।

अन्नामलाई टाइगर रिज़र्व:

  • यह तमिलनाडु के चार टाइगर रिज़र्व में से एक है। यह दक्षिणी पश्चिमी घाट (Southern Western Ghats) का हिस्सा है।
  • यह वर्ष 2003 में  घोषित अनामलाई परंबिकुलम एलीफेंट रिज़र्व (Anamalai Parambikulam Elephant Reserve) का हिस्सा है।
  • यह पूर्व में चिनार वन्यजीव अभयारण्य और दक्षिण-पश्चिमी में एराविकुलम नेशनल पार्क (Eravikulam National Park) तथा परम्बिकुलम टाइगर रिज़र्व (Parambikulam Tiger Reserve) से घिरा हुआ है।
  • यह रिज़र्व केरल के नेनमारा वाज़चल, मलयत्तुर और मरयूर आरक्षित वनों से भी घिरा हुआ है।
  • इस अभयारण्य में पाई जाने वाली पर्वत श्रेणियों में अमरावती (Amaravathi), उदुमलपेट (Udumalpet) पोलाची (Pollachi), उलेडी (Ulandy) और वलपरई आदि शामिल हैं।

मानवीय विविधता:

  • इस क्षेत्र में 3400 बस्तियों में रहने वाले छह जनजातियों के 4600 से अधिक आदिवासी लोगों की महत्त्वपूर्ण मानवीय विविधता पाई जाती है।
    • इन जनजातियों में कादर, मालासर, मलमलसर , पुलायार, मुदुवर और एरावलान शामिल हैं।

वनस्पति:

  • इसमें नम सदाबहार वन (Wet Evergreen Forest) और अर्द्ध-सदाबहार वन (Semi-Evergreen Forest), मोंटाने घास के मैदान (Montane Grasslands), नम पर्णपाती (Moist Deciduous), शुष्क पर्णपाती (Dry Deciduous), कांटेदार वन (Thorn Forests) और दलदल (Marshes) शामिल हैं।

जीव-जंतु:

  • यहाँ पाए जाने वाले महत्त्वपूर्ण स्तनधारियों में एशियाई हाथी, सांभर, चित्तीदार हिरण, बार्किंग हिरण, माउस हिरण, गौर, नीलगिरि तहर, बाघ, आदि शामिल हैं।

तमिलनाडु में अन्य संरक्षित क्षेत्र:

स्रोत: द हिंदू

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