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जैव विविधता और पर्यावरण

37 गिद्धों की मृत्यु

  • 01 Apr 2019
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में पूर्वी असम के शिवसागर जिले में ज़हर मिले हुए मवेशियों के शवों को खाने से तीन लुप्तप्राय प्रजातियों के लगभग 37 गिद्धों की मौत हो गई। इन गिद्धों में से अधिकांश हिमालयन ग्रिफन (Himalayan griffon) हैं।

प्रमुख बिंदु

  • गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र (Vulture Conservation Breeding Centre- VCBC) के वन अधिकारियों और एक वन्यजीव बचाव दल ने लगभग इतने ही गिद्धों को गंभीर हालत में पाया जिन्हें उचित चिकित्सा और देखभाल द्वारा बचा लिया गया है।
  • हालाँकि इस बात की सटीक जानकारी नहीं प्राप्त की जा सकी है कि इन गिद्धों में ज़हर का कितना असर हुआ है।
  • एक जैव वैज्ञानिक के अनुसार, बचाए गए गिद्धों को कम-से-कम 10 दिनों के लिये काजीरंगा के वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र में रखकर उपचार और अवलोकन की आवश्यकता है।
  • यह घटना बाम राजाबारी गाँव में हुई थी, जहाँ पिछले साल अप्रैल में 20 गिद्धों की मौत इसी प्रकार ज़हरीले शवों को खाने के कारण हुई थी।
  • ग्रामीणों द्वारा कुत्तों को मारने के लिये मवेशियों के शवों मे ज़हर मिलाया गया था लेकिन इससे गिद्धों की मृत्यु हो गई।
  • 1990 के दशक में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और अन्य संगठनों के एक अध्ययन में पाया गया है कि जिप्स समूह वाले गिद्धों की संख्या में भारत और नेपाल में पिछले दो दशकों में भारी गिरावट आई है।

vulture

स्रोत- द हिंदू

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