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सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना का PM औपचारिकरण

  • 29 Mar 2023
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना, एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP), आकांक्षी ज़िले, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), नाबार्ड की PM औपचारिकरण।

मेन्स के लिये:

PMFME योजना की विशेषताएँ, भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थिति।

चर्चा में क्यों?

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) भारत में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय, तकनीकी एवं व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिये केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme-PMFME) योजना के औपचारिकरण को लागू कर रहा है।

PMFME योजना की विशेषताएँ:

  • परिचय:
    • PMFME योजना का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के असंगठित क्षेत्र में मौजूदा निजी सूक्ष्म उद्यमों की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना और क्षेत्र की औपचारिकता को बढ़ावा देना है।
    • PMFME योजना 10,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक पाँच वर्ष की अवधि के लिये लागू है।
  • केंद्रित क्षेत्र:
    • यह योजना इनपुट की खरीद, सामान्य सेवाओं और उत्पादों के विपणन के संबंध में पैमाने का लाभ उठाने के लिये एक ज़िला एक उत्पाद (One District One Product- ODOP) दृष्टिकोण अपनाती है।
    • अन्य फोकस क्षेत्रों में वेस्ट टू वेल्थ उत्पाद, लघु वन उत्पाद और आकांक्षी ज़िले शामिल हैं।
  • PMFME योजना के तहत उपलब्ध सहायता:
    • व्यक्तिगत/समूह श्रेणी सूक्ष्म उद्यमों को सहायता:
      • पात्र परियोजना लागत का 35% क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा, जिसमें अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए प्रति यूनिट है।
    • सीड कैपिटल के लिये स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सहायता:
      • कार्यशील पूंजी और छोटे उपकरणों की खरीद के लिये खाद्य प्रसंस्करण में लगे SHG के प्रति सदस्य को 40,000 रुपए तक की सीड कैपिटल के साथ अधिकतम 4 लाख रुपए प्रति SHG की सहायता।
    • सामान्य अवसंरचना के लिये समर्थन:
      • FPO, SHG, सहकारी समितियों एवं सामान्य बुनियादी ढाँचे की स्थापना के लिये किसी भी सरकारी एजेंसी का समर्थन करने हेतु अधिकतम 3 करोड़ रुपए के साथ 35% की क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी।
    • क्षमता निर्माण:
      • इस योजना में उद्यमिता विकास कौशल (Entrepreneurship Development Skilling) (EDP+) के लिये प्रशिक्षण की परिकल्पना की गई है, जो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं उत्पाद विशिष्ट कौशल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये संशोधित कार्यक्रम है।
    • FSSAI एवं अन्य वैधानिक आवश्यकताओं के अनुपालन हेतु सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को सहायता प्रदान करने के लिये ज़िला संसाधन व्यक्तियों (District Resource Persons-DRPs) को नियुक्त किया गया है।

भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थिति:

  • परिचय:
    • खाद्य प्रसंस्करण एक प्रकार का विनिर्माण है जिसमें कच्चे माल को वैज्ञानिक ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मध्यवर्ती खाद्य पदार्थों में संसाधित किया जाता है। 
    • यह तैयार उत्पाद की भंडारण क्षमता, पोर्टेबिलिटी, स्वाद एवं सुविधा में सुधार करता है।
  • महत्त्व:
    • वित्त वर्ष-21 को समाप्त पिछले पाँच वर्षों के दौरान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र लगभग 8.3% की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है।
    • नवीनतम उद्योग वार्षिक सर्वेक्षण (Annual Survey of Industries- ASI) 2019-20 के अनुसार, पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र में 12.2% व्यक्ति खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कार्यरत थे।
    • प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात सहित कृषि-खाद्य निर्यात का मूल्य वर्ष 2021-22 के दौरान भारत के कुल निर्यात का लगभग 10.9% है।
  • समस्याएँ:
    • अवसंरचना का अभाव: भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के समक्ष बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिसमें अपर्याप्त कोल्ड स्टोरेज सुविधाएँ, परिवहन सुविधाएँ एवं प्रसंस्करण संयंत्र शामिल हैं।
    • वित्त तक सीमित पहुँच: भारत में कई छोटे और मध्यम आकार के खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय अपने संचालन में निवेश करने एवं उत्पादों को बेहतर बनाने हेतु वित्त की प्राप्ति के लिये विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हैं।
      • यह उद्योग क्षेत्र में विस्तार और बड़े अभिकर्त्ताओं के साथ प्रतिस्पर्द्धा करने की उनकी क्षमता को सीमित करता है।
    • अपर्याप्त गुणवत्ता नियंत्रण: भारत में खाद्य प्रसंस्करण की गुणवत्ता, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को लेकर चिंताएँ हैं।
      • यह उद्योग हेतु एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह उपभोक्ता विश्वास को प्रभावित करता है और निर्यात के अवसरों को सीमित करता है।
  • सरकारी पहल:
    • खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र हेतु स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) की अनुमति दी गई है।
    • मेगा फूड पार्कों (Mega Food Parks- MFP) के साथ-साथ MFP में प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना में निवेश हेतु किफायती ऋण प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development- NABARD) के साथ 2000 करोड़ रुपए का एक विशेष खाद्य प्रसंस्करण कोष स्थापित किया गया था।
      • वर्ष 2019 में व्यक्तिगत निर्माण इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ कृषि-प्रसंस्करण समूहों की स्थापना हेतु कोष का दायरा बढ़ाया गया था।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत सरकार "मेगा फूड पार्क" की अवधारणा को किन-किन उद्देश्यों से प्रोत्साहित कर रही है? (2011)

  1. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिये उत्तम बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु।
  2. खराब होने वाले पदार्थों को अधिक मात्रा में प्रसंस्करण करने और अपव्यय घटाने हेतु।
  3. उद्यमियों के लिये उद्गामी और पारिस्थितिकी के अनुकूल आहार प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियाँ उपलब्ध कराने हेतु।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


प्रश्न. लागत प्रभावी छोटी प्रकमण इकाई की अल्प स्वीकारिता के क्या कारण हैं? खाद्य प्रकमण इकाई गरीब किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने में किस प्रकार सहायक होगी? (मुख्य परीक्षा- 2017)

स्रोत: पी.आई.बी.

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