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प्लास्टिक मुक्त भारत

  • 04 Oct 2019
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने देश में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (Single Use Plastics) के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिये एक योजना तैयार की है।

प्रमुख बिंदु

  • 2 अक्तूबर 2019 से वर्ष 2022 तक देश भर में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने के उद्देश्य से सरकार ने यह कदम उठाया है।
  • इस योजना की शुरुआत देश के ऐसे शहरों और गाँवों से की जा रही है जो विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों और गाँवों की श्रेणी में आते हैं।
  • एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पाद जैसे- प्लास्टिक बैग, कप, प्लेट, छोटी बोतलें, स्ट्रॉ (Strow) और कुछ प्रकार की थैलियों के प्रयोग को समाप्त करने के लिये इन वस्तुओं पर 2 अक्तूबर 2019 से देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • इस प्रकार के प्रतिबंध के अंतर्गत विनिर्मित और आयातित दोनों तरह की वस्तुएँ शामिल हैं।
  • इस योजना का नोडल मंत्रालय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forests and Climate Change- MoEF&CC) है।

एकल उपयोग वाले प्लास्टिक

  • इसके अंतर्गत ऐसे प्लास्टिक उत्पादों को शामिल किया गया हैं जिन्हें एक बार प्रयोग किये जाने के बाद फेंक दिया जाता है अर्थात्त पुनः उपयोग में नहीं लाया जाता।
    • एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पाद संक्रमणकारी रोगों के प्रसार को भी रोकते हैं। जैसे कि सिरिंज, एप्लिकेटर, ड्रग टेस्ट, बैंडेज आदि को अक्सर डिस्पोज़ेबल बनाया जाता है।
    • इसके अलावा खाद्य-अपशिष्टों के खिलाफ लड़ाई में भी एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों को सूचीबद्ध किया गया है, जो भोजन और पानी को अधिक समय तक ताजा रखते हैं और संदूषण की क्षमता को कम करते हैं।
  • हालाँकि कुछ एकल-उपयोग उत्पादों का निपटान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
    • पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होते है और आमतौर पर ये लैंडफिल में चले जाते हैं जहाँ ये भूमि एवं जल में प्रवेश करते हैं।
    • विघटन की प्रक्रिया में यह ज़हरीले रसायनों (प्लास्टिक को आकार देने और सख्त करने के लिये इस्तेमाल होने वाले एडिटिव्स) को निष्काषित करते है जो हमारे भोजन और पानी की आपूर्ति में अपना स्थान बना लेते हैं।
  • अंतिम लक्ष्य यह है कि इन सभी उत्पादों को एकत्र किया जा सके और ऊर्जा या पुनर्नवीनीकरण में परिवर्तित किया जा सके।

Plastic graph

अन्य हितधारक

  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India-NHAI) यह सुनिश्चित करेगा कि प्लास्टिक कचरे को ज़िम्मेदारी के साथ एकत्रित किया जाए और राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ ही परिवहन किया जाए।
    • एकत्रित प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क निर्माण के लिये किया जा सकेगा।

मेघालय सरकार ने सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले क्लिंकर के निर्माण के लिये ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले कोयले के बजाय प्लास्टिक कचरे को खरीदने हेतु एक प्रमुख सीमेंट फर्म के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके साथ ही मेघालय, प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है।

  • औद्योगिक संवर्द्धन विभाग (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय) यह सुनिश्चित करेगा कि सभी सीमेंट कारखाने ईंधन के रूप में प्लास्टिक का उपयोग करें।
  • रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के किनारे पर प्लास्टिक कचरे के संग्रह के लिये रेल मंत्रालय ने 2 अक्तूबर को बड़े पैमाने पर श्रमदान (स्वैच्छिक कार्य) का आयोजन किया।
    • साथ ही यह सभी ट्रेनों पर विज्ञापन रेडियो स्पॉट भी चलाएगा।
  • खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India-FCI) सहित सभी मंत्रालयों और PSU में उपयोग किये जाने वाले सभी प्रकार के एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
  • पर्यटन मंत्रालय, प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर एकल-उपयोग प्लास्टिक पर जागरूकता फैलाने के लिये तैयार है।
  • कपड़ा मंत्रालय ने प्लास्टिक की थैलियों को बदलने के लिये जूट बैग के अधिक उत्पादन पर बल दे रहा है।

वैश्विक पहल

  • महासागरों में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में दुनिया भर में चिंताएँ बढ़ रही हैं, लगभग 50 प्रतिशत एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पाद, समुद्री जीवन को नष्ट करते है तथा मानव खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं।
    • इस संबंध में यूरोपीय संघ ने वर्ष 2021 तक एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की वस्तुओं जैसे कि कांटे, चाकू और कपास की कलियों (Cotton Birds) आदि पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है।
  • चीन के शंघाई का वाणिज्यिक केंद्र खान-पान सेवाओं में प्रयोग किये जाने वाले एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को धीरे-धीरे प्रतिबंधित कर रहा है। साथ ही इसके एक द्वीप (प्रांत हैनान) ने वर्ष 2025 तक एकल-उपयोग प्लास्टिक को पूरी तरह से समाप्त करने की योजना बनाई है।
  • विश्व पर्यावरण दिवस, 2018 पर दुनिया के नेताओं ने ‘प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म’ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

आगे की राह

  • सबसे पहले यह तय करना होगा कि कौन-सा प्लास्टिक उत्पाद पुनः चक्रित किया जा सकता है और कौन-सा नहीं।
    • चूँकि भारत में कुल प्लास्टिक कचरे का 70% शहरी क्षेत्रों से है, इसलिये शहरी स्थानीय निकायों को पुन: उपयोग योग्य और गैर-पुन: उपयोग योग्य श्रेणियों में इकट्ठा करने और विभाजित करने के लिये एक विशाल श्रमदान अभ्यास शुरू करने की आवश्यकता है।
  • भारत में ई-कॉमर्स की बढ़ती खरीददारी के साथ प्लास्टिक का उपयोग काफी बढ़ गया है जो भारत की वार्षिक प्लास्टिक खपत का लगभग 40 प्रतिशत है। इन कंपनियों को प्लास्टिक पैकेजिंग का कोई अन्य विकल्प तलाशने की आवश्यकता है।
    • इस संबंध में अमेज़ॅन इंक ने जून 2020 तक पैकेजिंग लिये सभी एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को पेपर कुशन के साथ बदलने का एक सराहनीय कदम उठाया है।
  • भारत सशक्त परीक्षण और प्रमाणन एजेंसियों की अनुपस्थिति में नकली बायोडिग्रेडेबल और कंपोस्टेबल प्लास्टिक बाज़ार में प्रवेश कर रहा है, उत्पादकों द्वारा किये गए दावों को सत्यापित करने के लिये ऐसी प्रयोगशालाओं और एजेंसियों की स्थापना की तत्काल आवश्यकता है, जो इस विषय में आवश्यक कदम उठा सकें।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Plastic Waste Management (PWM) Rules, 2016) की अधिसूचना और दो साल बाद किये गए संशोधनों के बावजूद, अधिकांश शहर और कस्बे इन नियमों को लागू करने के लिये तैयार नहीं हैं। नियमों के कड़ाई से कार्यान्वयन के लिये सख्त कदम उठाए जाने चाहिये।

स्रोत: द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया

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