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संसद ने उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक को दी मंज़ूरी

  • 07 Aug 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक, 2019 (Consumer Protection Bill, 2019) राज्यसभा में पारित हो गया। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही यह विधेयक लोकसभा से भी पारित हुआ था।

प्रमुख बिंदु

  • संसद के दोनों सदनों में पारित ‘उपभोक्‍ता संरक्षण विधेयक, 2019’ राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के पश्चात् कानून बन जाएगा।
  • इस विधेयक का उद्देश्‍य उपभोक्‍ता विवादों का निपटारा करने के लिये उपभोक्‍ता प्राधिकरणों की स्‍थापना करना है जिससे उपभोक्‍ता के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • केंद्रीय उपभोक्‍ता मामले तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने इस विधेयक में नियमों को सरलीकृत करने का प्रयास किया है।
  • विधेयक के पारित होने से उपभोक्‍ताओं को त्‍वरित न्‍याय प्राप्त होगा।
  • इस विधेयक के माध्यम से सरकार उपभोक्‍ता शिकायतों से संबंधित पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के पक्ष में है।
  • विधेयक में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय उपभोक्‍ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority- CCPA) के गठन का प्रस्‍ताव है।
    • प्राधिकरण का उद्देश्‍य उपभोक्‍ता के अधिकारों को बढ़ावा देना एवं कार्यान्‍वयन करना है।
    • प्राधिकरण को शिकायत की जाँच करने और आर्थिक दंड लगाने का अधिकार होगा।
    • यह गलत सूचना देने वाले विज्ञापनों, व्‍यापार के गलत तरीकों तथा उपभोक्‍ताओं के अधिकारों के उल्‍लंघन के मामलों का नियमन करेगा।
    • प्राधिकरण को गलतफहमी पैदा करने वाले या झूठे विज्ञापनों के निर्माताओं या उनका समर्थन करने वालों पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना तथा दो वर्ष के कारावास का दंड लगाने का अधिकार होगा।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ

  • केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के अधिकार:
  • सरलीकृत विवाद समाधान प्रक्रिया
  • मध्यस्थता
  • उत्पाद की ज़िम्मेदारी

स्रोत: PIB

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