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ऑक्सफैम रिपोर्ट: इनइक्वालिटी किल्स

  • 18 Jan 2022
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ऑक्सफैम रिपोर्ट और इसके प्रमुख निष्कर्ष।

मेन्स के लिये:

ऑक्सफैम रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष, असमानता के कारण, कोविड-19 का प्रभाव।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में "इनइक्वालिटी किल्स" शीर्षक वाली ऑक्सफैम रिपोर्ट जारी की गई है, जिसने वैश्विक स्तर पर और भारत में कोविड-19 महामारी के कारण आय पर बुरे प्रभाव की ओर इशारा किया है।

प्रमुख बिंदु:

  • बढ़ती असमानताओं का परिणाम: आर्थिक, लैंगिक और नस्लीय असमानताओं के साथ-साथ देशों के बीच मौजूद असमानता हमें दुनिया से अलग कर रही है।
    • महामारी शुरू होने के बाद से दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति दोगुने स्तर पर पहुँच गई है।
    • कोविड-19 के कारण 99% लोगों की आय में गिरावट हुई है।
    • असमानता हर चार सेकंड में कम-से-कम एक व्यक्ति की मौत का कारण बनती है।
  • आर्थिक असमानता: एक प्रकार की आर्थिक असमानता तब होती है जब सबसे अमीर तथा सबसे शक्तिशाली लोगों के लिये संरचनात्मक नीति विकल्प बनाए जाते हैं। यह सबसे गरीब लोगों, महिलाओं एवं लड़कियों तथा नस्लीय समूहों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती है।
    • स्वास्थ्य देखभाल तक असमान पहुँच: अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा एक मनुष्य का  अधिकार है, लेकिन इसे अक्सर अमीर लोगों के लिये विलासिता के रूप में देखा जाता है।
    • लिंग आधारित हिंसा: यह पितृसत्ता और लिंगवादी आर्थिक व्यवस्था में निहित सोच है। उदाहरण के लिये लिंग-चयनात्मक गर्भपात।
    • गरीबी से प्रेरित भूख: भूख उन कारणों में से एक है जिससे गरीब मरते है और इसका सामना हर दिन दुनिया भर में अरबों आम लोगों को करना पड़ता है।
    • जलवायु परिवर्तन संकट की असमानता: सबसे अमीर लोगों द्वारा उत्सर्जन इस जलवायु परिवर्तन का कारण रहा है, 20 सबसे अमीर अरबपतियों द्वारा CO2 उत्सर्जन औसतन सबसे गरीब लोगों द्वारा किये गए उत्सर्जन का 8,000 गुना होने का अनुमान है।
  • वैक्सीन रंगभेद: अमीर देश अपने फार्मास्युटिकल अरबपतियों का समर्थन कर सकते हैं और अपनी आबादी की रक्षा के लिये टीके जमा कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से वे अपने ही लोगों को उस उत्परिवर्तन से ज़ोखिम की ओर धकेलते हैं जिससे वैक्सीन रंगभेद उत्पन्न होता है।
    • एक अवधारणा के रूप में वैक्सीन रंगभेद ऐतिहासिक रूप से अधीनस्थ लोगों पर असमान वैक्सीन वितरण नीतियों के प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

भारतीय परिदृश्य

  • सामाजिक सुरक्षा व्यय में गिरावट:
    • कोविड-19  से भारत के स्वास्थ्य बजट में वर्ष 2020-21 के आरई (Revised Estimates) से 10% की गिरावट देखी गई।
    • शिक्षा के लिये आवंटन में 6% की कटौती की गई है।
    • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिये बजटीय आवंटन कुल केंद्रीय बजट के 1.5% से घटकर 0.6% हो गया है।
  • बढ़ती असमानताएँ: रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में देश के 84 फीसदी परिवारों की आय में गिरावट आई लेकिन साथ ही भारतीय अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई।
    • अमीरी में इजाफा: महामारी के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 23.14 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 53.16 लाख करोड़ रुपए हो गई।
      • वैश्विक स्तर पर चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के ठीक बाद भारत में अरबपतियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है।
      • वर्ष 2021 में भारत में अरबपतियों की संख्या में 39% की वृद्धि हुई है।
    • गरीबों की संख्या में वृद्धि: वर्ष  2020 में 4.6 करोड़ से अधिक भारतीयों के अत्यधिक गरीब होने का अनुमान है जो संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार नए वैश्विक गरीबों का  लगभग आधा हिस्सा है।
      • साथ ही वर्ष 2020 में राष्ट्रीय संपत्ति में नीचे की 50% आबादी का हिस्सा मात्र 6% था।
      • भारत में बेरोजगारी भी बढ़ी है।
  • लैंगिक समानता को झटका: वर्ष 2020 में वर्ष 2019 की तुलना में महिलाओं की सामूहिक रूप से कमाई में 59.11 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। 
  • बढ़ता राजकोषीय घाटा: पिछले वर्ष (2020) निवेश को आकर्षित करने के लिये कॉर्पोरेट करों को 30% से घटाकर 22% करने से 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जिसने भारत के राजकोषीय घाटे को और अधिक बढाया।
  • असमान संघवाद: देश के संघीय ढांँचे के बावजूद राजस्व संसाधन केंद्र के हाथों में ही केंद्रित है।

हालाँकि महामारी का प्रबंधन उन राज्यों को नहीं दिया गया था जो इसके वित्तीय या मानव संसाधनों के स्तर पर इसे संभालने में सक्षम नहीं थे।

आगे की राह:

  • असमानता से निपटने हेतु अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक धन का निवेश: सभी सरकारों को इस महामारी की अवधि के दौरान अत्यधिक धनी लोगों द्वारा अर्जित लाभ पर  तुरंत कर लगाना  चाहिये।
  • जीवन को सुरक्षित करने तथा भविष्य में निवेश करने हेतु उस धन को पुनर्निर्देशित करने पर बल: सभी सरकारों को जीवन बचाने और भविष्य में निवेश करने के लिये साक्ष्य-आधारित तथा उचित नीतियों में निवेश करना चाहिये।
    • महामारी की से बचाव के लिये गुणवत्तापूर्ण, सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित और सार्वजनिक रूप से वितरित सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा होनी चाहिये।
  • अर्थव्यवस्था और समाज में बनियमों में परिवर्तन और सत्ता में बदलाव: इसमें सेक्सिस्ट कानूनों को समाप्त करना शामिल है, जिसका अर्थ है कि लगभग 3 बिलियन महिलाओं को कानूनी तौर पर पुरुषों के समान नौकरी चुनने से रोका जाता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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