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भारतीय अर्थव्यवस्था

बहिर्वाह प्रेषण प्रवृत्ति

  • 25 May 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

उदारीकृत प्रेषण योजना, प्रेषण, आरबीआई।

मेन्स के लिये:

उदारीकृत प्रेषण योजना का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

आरबीआई की उदारीकृत प्रेषण योजना के तहत कुल बहिर्वाह प्रेषण, मार्च 2022 में 12.684 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मार्च 2022 के अंत तक 19.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया था।

  • मार्च 2022 को समाप्त वित्तीय वर्ष के दौरान निवासी भारतीयों द्वारा देश से बाहर ले जाए जाने वाले अमेरिकी डॉलर और यूरो सहित विदेशी मुद्रा में 54.60% की वृद्धि हुई है।

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प्रेषण:

  • प्रेषण से आशय प्रवासी कामगारों द्वारा धन अथवा वस्तु के रूप में अपने मूल समुदाय/परिवार को भेजी जाने वाली आय से है।
  • यह मूल रूप से दो मुख्य घटकों का योग है- निवासी और अनिवासी परिवारों के मध्य नकद या वस्तु के रूप में व्यक्तिगत स्थानांतरण तथा कर्मचारियों का मुआवज़ा, यह उन श्रमिकों की आय को संदर्भित करता है जो सीमित समय के लिये दूसरे देश में काम करते हैं।
  • प्रेषण प्राप्तकर्त्ता देशों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने में सहायता करते हैं, लेकिन यह ऐसे देशों को प्रेषण अर्थव्यवस्था पर अधिक निर्भर भी बना सकता है।

बहिर्वाह प्रेषण:

  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के अनुसार, बहिर्वाह प्रेषण का आशय किसी भी वास्तविक उद्देश्य से भारत से किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर एक लाभार्थी (नेपाल और भूटान को छोड़कर) को विदेशी मुद्रा के रूप में धन का हस्तांतरण करना है।

बहिर्वाह प्रेषण प्रवृत्ति:

  • कुल बहिर्वाह प्रेषण:
    • कुल बहिर्वाह प्रेषण वित्त वर्ष 2022 में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर था क्योंकि इसने कोविड-19 व्यवधान में कमी के कारण पिछले वर्ष के कमज़ोर प्रदर्शन की तुलना में मज़बूत वापसी की।
    • इस वापसी को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और विदेशी शिक्षा पर भारतीयों के अधिक खर्च किये जाने की वजह से समर्थन मिला।
  • बहिर्वाह प्रेषण के भाग:
    • अंतर्राष्ट्रीय यात्रा: वित्त वर्ष 2022 में अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में तेज़ी आई, जिसके परिणामस्वरूप भारत ने यात्रा पर 6.91 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किया, जो कि वित्त वर्ष 2021 में यात्रा पर किये गए खर्च के दोगुने से अधिक है।
      • हालांँकि वित्त वर्ष 2020 में भी भारतीयों द्वारा यात्रा पर किया गया खर्च लगभग 6.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • विदेशी शिक्षा: विदेशी शिक्षा एक महत्त्वपूर्ण खंड है जिसने वित्त वर्ष 2022 में समुचित विकास देखा है क्योंकि भारतीयों ने वर्ष में 5.17 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का प्रेषण किया है।
      • इसमें वित्त वर्ष 2021 से 35% की वृद्धि देखी गई है, जब भारतीयों ने 3.83 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रेषण किया था।
      • वित्त वर्ष 2020 में विदेशी शिक्षा के लिये प्रेषण लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • उपहार: भारतीयों ने वित्त वर्ष 2022 में उपहार के रूप में 2.34 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रेषण किया, जो वित्त वर्ष 2021 की तुलना में 47.28% अधिक है।
      • वित्त वर्ष 2020 में भारतीयों ने LRS योजना के तहत उपहार के रूप में लगभग 1.91 बिलियन अमेरिकी डॉलर भेजे।

विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश:

  • भारतीयों द्वारा विदेशी इक्विटी और ऋण में निवेश भी वित्त वर्ष 2022 में बढ़कर 746.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 471.80 मिलियन अमेरिकी डॉलर था।

उदारीकृत प्रेषण योजना:

  • यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक के तत्त्वावधान में फरवरी 2004 में प्रारंभ की गई थी।
  • वर्तमान समय में LRS के तहत सभी निवासी व्यक्तियों जिसमें नाबालिग भी शामिल हैं, को किसी भी अनुमेय चालू या पूंजी खाता लेन-देन या दोनों के संयोजन के लिये प्रत्येक वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) तक 2,50,000 डॉलर तक की छूट दी जाती है।
  • यह योजना किसी कॉर्पोरेट, फर्म, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) एवं ट्रस्ट आदि के लिये उपलब्ध नहीं है।
  • LRS के तहत प्रेषण की आवृत्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है, किंतु एक वित्तीय वर्ष के दौरान भारत में सभी स्रोतों से प्रेषित अथवा उनके माध्यम से खरीदे गए विदेशी मुद्रा की कुल राशि 2,50,000 डॉलर की निर्धारित संचयी (Cumulative) सीमा के भीतर होनी चाहिये।

चालू और पूंजी खाता विनिमय:

  • चालू खाता विनिमय: एक निवासी द्वारा किये गए सभी लेन-देन जो भारत के बाहर आकस्मिक देनदारियों सहित उसकी संपत्ति या देनदारियों को परिवर्तित नहीं करते हैं, चालू खाता विनिमय कहलाते हैं।
    • उदाहरण: विदेश व्यापार के संबंध में भुगतान, विदेश यात्रा के संबंध में खर्च, शिक्षा आदि।
  • पूंजी खाता विनिमय: इसमें वे लेन-देन शामिल हैं जो भारत के निवासी द्वारा किये जाते हैं जिसमें भारत के बाहर उसकी संपत्ति या देनदारियाँ परिवर्तित हो जाती हैं (या तो बढ़ जाती है या घट जाती है)।
    • उदाहरण: विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश, भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण आदि।

विगत वर्ष के प्रश्न:

प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा पूंजी खाता है? (2013)

  1. विदेशी ऋण
  2. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
  3. निजी प्रेषण
  4. पोर्टफोलियो निवेश

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(A) केवल 1, 2 और 3
(B) केवल 1, 2 और 4
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) केवल 1, 3 और 4

उत्तर: B

व्याख्या:

  • भुगतान संतुलन (BoP) के दो प्राथमिक घटकों में एक पूंजी खाता, जबकि दूसरा चालू खाता है। चालू खाता देश की शुद्ध आय को दर्शाता है, जबकि पूंजी खाता राष्ट्रीय संपत्ति के स्वामित्व में शुद्ध परिवर्तन को दर्शाता है।
  • पूंजी खाते में निम्नलिखित मदें शामिल होती हैं:
    • विदेशी ऋण। अतः कथन 1 सही है।
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। अतः कथन 2 सही है।
    • पोर्टफोलियो निवेश। अतः कथन 4 सही है।
    • अन्य निवेश।
    • रिज़र्व खाता।
  • निजी प्रेषण चालू खाते के अंतर्गत आते हैं। 

अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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