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त्रिपुरा का बांग्लादेश के साथ जलमार्ग खोलना

  • 09 Sep 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

इंडो-बांग्ला प्रोटोकॉल मार्ग, गुमटी नदी, मेघना नदी  

मेन्स के लिये: 

जलमार्ग खोलने का त्रिपुरा के लिये अर्थ 

चर्चा में क्यों?

त्रिपुरा ने सिपाहीज़िला के सोनमुरा से बांग्लादेश के साथ अपने अंतर्देशीय जलमार्ग को खोल दिया है। बांग्लादेश के मुंशीगंज बंदरगाह से 50 MT सीमेंट के साथ एक बड़ी नाव 5 सितंबर को ट्रायल रन के हिस्से के रूप में सोनपुरा पहुँची। इसके साथ ही इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना और इसकी व्यापार क्षमता के बारे में भी सवाल उपन्न हुए हैं।

परियोजना के बारे में 

  • यह जलमार्ग भारत में अगरतला से लगभग 60 किलोमीटर दूर सोनमुरा को बांग्लादेश में चटगाँव के डौकंडी से जोड़ता है। 
  • यह पहला अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है जिसमें गुमटी नदी को इंडो-बांग्ला प्रोटोकॉल मार्ग के रूप में मंज़ूरी दी गई है।
  • भारत और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित ‘अंतर्देशीय जल पारगमन और व्यापार प्रोटोकॉल’ दीर्घकालिक व्यापार सुनिश्चितता की दिशा में किया गया प्रोटोकॉल है। यह समझौता किसी तीसरे देश में भी माल परिवहन की अनुमति देता है। 
  • इस प्रोटोकॉल पर पहली बार वर्ष 1972 (बांग्लादेश की आज़ादी के तुरंत बाद) में हस्ताक्षर किये गए थे। अंतिम बार वर्ष 2015 में पाँच वर्षों के लिये नवीनीकरण किया गया था।
  • समझौते का प्रत्येक पाँच वर्षों की अवधि के बाद स्वचालित रूप से नवीनीकरण किया जाता है।

त्रिपुरा के लिये इसके अर्थ 

  • प्रस्तावित जलमार्ग परियोजना त्रिपुरा की गुमटी नदी को बांग्लादेश की मेघना नदी से जोड़ती है। इससे पड़ोसी देश के आशुगंज बंदरगाह तक पहुँच बनाई जा सकेगी।
  • वर्ष 1995 में त्रिपुरा का सीमा पार से व्यापार शुरू हुआ। वर्तमान में राज्य प्रतिवर्ष 30 करोड़ रूपए मूल्य की वस्तुएँ और सामग्री निर्यात करता है, लेकिन 645 करोड़ रूपए का आयात करता है। 
  • यह भारी व्यापार घाटा बांग्लादेश में असामान्य रूप से उच्च आयात शुल्क तंत्र के कारण है। निर्यात के लिये दी गई वस्तुओं की सूची में राज्य में कई वस्तुओं की अनुपस्थिति है। इसके अलावा बंदरगाह प्रतिबंध भी प्रमुख कारण है।
  • कोलकाता से गुवाहाटी होकर अगरतला की दूरी 1650 किलोमीटर है, जबकि कोलकाता से होकर अगरतला की दूरी मात्र 620 किलोमीटर है। जलमार्ग से वस्तुओं की आवाजाही में 25-30% की बचत होने का अनुमान है।
  • इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना को BJP-IPFT सरकार द्वारा त्रिपुरा को उत्तर-पूर्व के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने के लिये एक प्रमुख उत्प्रेरक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • अखौरा एकीकृत चेक पोस्ट सोनमुरा जेट्टी के व्यापार की मात्रा से 150 गुना अधिक आयात करता है। राज्य में छह अन्य भूमि क्रॉसिंग भी हैं। इसलिये जलमार्ग परियोजना की व्यापार मात्रा कम होने से बड़े पैमाने पर स्थानीय रोज़गार सृजन होने पर अभी संशय है। यह भी उल्लेखनीय है कि नदी मार्ग पूरे वर्ष चालू नहीं रहेगा।
  • इस योजना में सोनमुरा से लेकर बांग्लादेश में आशुगंज नदी बंदरगाह तक छोटे जहाज़ और नौकाओं के लिये रास्ता बनाने के लिये नदी किनारे ड्रेज़िंग  करना भी शामिल है। नदी की उथली गहराई और निरंतर अवसादन को देखते हुए योजना में ड्रेज़िंग को आवश्यक माना गया है।
  • आयातित सामानों के सीमा शुल्क की जाँच के लिये एक टर्मिनल भवन भी बनाने की योजना थी। सामान को चढाने और उतारने के लिये स्थायी जेट्टी के निर्माण में बहुत अधिक समय लगने के कारण त्रिपुरा ने 4 जुलाई को एक अस्थायी जेट्टी का निर्माण किया। अन्य बुनियादी ढाँचे का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बनाया जाना शेष है।

गुमटी नदी 

  • गुमटी नदी त्रिपुरा के उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र में दुम्बुर से निकलती है।
  • यह त्रिपुरा और बांग्लादेश से होकर बहने वाली नदी है। नदी पर दुम्बुर के पास एक बाँध का निर्माण किया गया है।

मेघना नदी  

  • सुरमा-मेघना नदी प्रणाली के एक हिस्से के रूप में  मेघना नदी का निर्माण बांग्लादेश के किशोरगंज ज़िले  में सुरमा और कुशियारा नदियों  के संगम से होता है।
  • मेघना चांदपुर ज़िले में अपनी प्रमुख सहायक नदी पद्मा से मिलती है। मेघना की अन्य प्रमुख सहायक नदियाँ धलेश्वरी, गुमटी और फेनी हैं।  

आगे की राह 

  • इस नए प्रोटोकॉल मार्ग का परिचालन बांग्लादेश के साथ समग्र द्विपक्षीय व्यापार को और सुविधाजनक बनाने के अलावा, परिवहन को एक किफायती, तीव्र, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल मोड प्रदान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के स्थानीय समुदायों को काफी आर्थिक लाभ होगा।
  • यह त्रिपुरा और भारत एवं बांग्लादेश के आर्थिक केंद्रों के साथ सटे राज्यों की कनेक्टिविटी में सुधार करने के साथ-साथ दोनों देशों के पहाड़ी इलाकों के विकास में भी मदद करेगा। 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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