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ओपन-रैन आर्किटेक्चर

  • 21 Jan 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India- TRAI) के अध्यक्ष ने कहा कि ओपन-रैन (रेडियो एक्सेस नेटवर्क- RAN) और सॉफ्टवेयर दूरसंचार नेटवर्क के उपयोग से भारतीय संस्थाओं को नेटवर्क उपकरण बाज़ार में प्रवेश करने के नए अवसर मिलेंगे।

प्रमुख बिंदु:

ओपन-रैन के संबंध में:

  • ओपन-रैन (O-RAN) कोई तकनीक नहीं है बल्कि मोबाइल नेटवर्क आर्किटेक्चर में एक निरंतर बदलाव है जो विभिन्न प्रकार के वेंडर्स के माध्यम से उप-केंद्रों का उपयोग कर नेटवर्क स्थापित करने  की अनुमति देता है।
    • O-RAN में एक ओपन, मल्टी-वेंडर आर्किटेक्चर है, जो मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने के लिये एकल-विक्रेता स्वामित्व आर्किटेक्चर के विपरीत है।
    • O-RAN विभिन्न कंपनियों द्वारा निर्मित हार्डवेयर को एक साथ संचालित करने के लिये सॉफ्टवेयर का उपयोग करता है।
  • O-RAN की मुख्य अवधारणा RAN में विभिन्न उपकेंद्रों (रेडियो, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर) के मध्य प्रोटोकॉल और इंटरफेस को "खोलना" है।
  • रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN): 
    • यह दूरसंचार प्रणाली का एक हिस्सा है जो रेडियो कनेक्शन के माध्यम से एक नेटवर्क के अन्य भागों में विशिष्ठ उपकरणों को जोड़ता है।
    • RAN, जो कि विभिन्न उपकरणों जैसे- मोबाइल फोन, कंप्यूटर या किसी भी रिमोट आधारित मशीनों में होता है, मुख्य नेटवर्क के साथ कनेक्शन प्रदान करता है।

RAN के तत्त्व:

  • रेडियो यूनिट (RU)- यह वह स्थान है जहाँ रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल प्रसारित, प्राप्त, प्रवर्धित और डिजिटाइज़ किये जाते हैं। RU को एंटीना में एकीकृत किया जाता है या उसके पास स्थापित किया जाता है।
  • डिस्ट्रिब्यूटेड यूनिट (DU)- यह वह स्थान है जहाँ रियल टाइम, बेसबैंड प्रोसेसिंग होती है। DU को सेल साइट के पास केंद्रीकृत या स्थित किया जा सकता है।
  • केंद्रीकृत यूनिट (CU)- यह वह स्थान है जहाँ आमतौर पर लेस टाइम सेंसिटिव पैकेट प्रोसेसिंग का कार्य होता हैं।

Open RAN की कार्यप्रणाली:

  • यह RU, DU और CU के बीच का इंटरफ़ेस है जो ओपन RAN का मुख्य केंद्रबिंदु है।
  • इन इंटरफेस (अन्य नेटवर्क के बीच) को खोलने, मानकीकृत करने तथा कार्यान्वयन के लिये प्रोत्साहित किये जाने से नेटवर्क को एक एकल वेंडर पर निर्भर हुए बिना अधिक मॉड्यूलर डिज़ाइन के साथ स्थापित किया जा सकता है।
  • इन परिवर्तनों से DU और CU को वेंडर-न्यूट्रल हार्डवेयर पर वर्चुअलाईज़्ड सॉफ्टवेयर फंक्शंस के रूप में संचालित करने की अनुमति मिल सकती है।

पारंपरिक RAN:

  • एक पारंपरिक RAN सिस्टम में रेडियो, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का मुख्य स्थान होता है।
    • इसका अर्थ है कि इसमें प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरण एक ही आपूर्तिकर्ता  द्वारा प्रदान किये जाएंगे और संबंधित ऑपरेटर ऐसा करने में असमर्थ होते हैं, उदाहरण के लिये एक वेंडर के हार्डवेयर और दूसरे वेंडर के सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रेडियो के माध्यम से एक नेटवर्क को स्थापित करना।
  • समस्याएँ:
    • विभिन्न प्रदाताओं के सेल साइटों को आपस में मिलाना और उनका मिलान करना आमतौर पर प्रदर्शन में कमी का कारण बनता है।
    • इसका परिणाम यह है कि अधिकांश नेटवर्क ऑपरेटर, कई RAN विक्रेताओं का समर्थन करते हुए एक ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में एकल विक्रेता का उपयोग कर नेटवर्क स्थापित करेंगे जो नए इनोवेटर्स के प्रवेश के लिये उच्च अवरोधों के साथ विक्रेता लॉक-इन स्थिति का निर्माण कर सकते हैं।

ओपन-रैन का लाभ:

  • नवोन्मेष और विकल्प:  
    • एक खुला वातावरण पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करता है और जब मूलभूत ज़रूरतों को अधिक विक्रेताओं द्वारा पूरा किया जाएगा तो नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और ऑपरेटरों के लिये अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
  • नए अवसर:  
    • यह भारतीय संस्थाओं के लिये नेटवर्क उपकरण बाज़ार में प्रवेश करने के नए अवसर खोलेगा।
  • लागत की बचत:
    • इस दृष्टिकोण के लाभों में नेटवर्क की दक्षता और लचीलेपन में वृद्धि तथा लागत बचत शामिल है।
    • इसके माध्यम से 5G के अधिक लचीला और लागत कुशल होने का अनुमान है।  

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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