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भारतीय अर्थव्यवस्था

NRIs के लिये सरकारी प्रतिभूतियाँ

  • 31 Mar 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये 

सरकारी प्रतिभूतियाँ 

मेन्स के लिये 

NRIs के लिये सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से संबंधित प्रावधान

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने 1 अप्रैल से गैर-निवासी भारतीयों को निर्दिष्ट सरकारी बॉन्ड में निवेश करने हेतु सक्षम बनाने के लिये एक अलग चैनल ‘फुली एक्सेसिबल रूट’ (Fully Accessible Route-FAR) की शुरुआत की है।

प्रमुख बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट भाषण के दौरान कहा था कि कुछ निश्चित श्रेणियों में बिना किसी प्रतिबंध के सरकारी बॉण्ड पूरी तरह से गैर-निवासी भारतीय निवेशकों के लिये खोले जाएंगे।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, “योग्य निवेशक किसी भी निर्दिष्ट सरकारी प्रतिभूति में निवेश कर सकते हैं। यह योजना दो मौजूदा मार्गों अर्थात मीडियम टर्म फ्रेमवर्क (Medium Term Framework-MTF) और वोलंटरी रिटेंशन रूट (Voluntary Retention Route-VRR) के साथ संचालित होगी।
  • शुरुआत के रूप में केंद्रीय बैंक ने कुछ अधिक तरल और बेंचमार्क प्रतिभूतियों को चुना है

लाभ

  • रिज़र्व बैंक के इस निर्णय से भारत सरकार के प्रतिभूति बाज़ार में गैर-निवासी भारतीयों की पहुँच को आसान किया जा सकेगा।
  • इससे सरकारी बॉन्ड में स्थिर विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • इस कदम से भारत को वैश्विक बॉण्ड सूचकांकों में अपना स्थान खोजने में मदद मिलेगी।
    • बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बॉण्ड सूचकांकों का हिस्सा होने से भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों को प्रमुख वैश्विक निवेशकों से बड़ी धनराशि आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

सरकारी प्रतिभूति

(Government Securities)

  • सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Sec) वे सर्वोच्च प्रतिभूतियाँ हैं जो भारत सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बेंची जाती हैं। 
  • ऐसी प्रतिभूतियाँ अल्पकालिक या दीर्घकालिक होती हैं।
  • अल्पकालिक: आमतौर पर एक वर्ष से भी कम समय की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को ट्रेज़री बिल (Treasury Bill) कहा जाता है जिसे वर्तमान में तीन रूपों में जारी किया जाता है, अर्थात् 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन।
  • दीर्घकालिक: आमतौर पर एक वर्ष या उससे अधिक की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को सरकारी बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियाँ कहा जाता है।
  • भारत में, केंद्र सरकार ट्रेज़री बिल और बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियाँ दोनों को जारी करती है, जबकि राज्य सरकारें केवल बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियों को जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण (State Development Loan-SDL) कहा जाता है।

गैर-निवासी भारतीय (NRI)

  • अनिवासी भारतीय (NRI) ऐसा भारतीय पासपोर्टधारक होता है जो किसी वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 120 दिनों के लिये किसी अन्य देश में रहता है।
  • ध्यातव्य है कि 1 फरवरी, 2020 को प्रस्तुत किये गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आवासीय स्थिति (Residential Status) के आधार पर व्यक्तियों की कर-क्षमता का निर्धारण करने के लिये मापदंड और अवधि को संशोधित किया था। संशोधित नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति को तब भारत का साधारण निवासी (Resident) माना जाएगा, जब वह पिछले वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 120 दिनों के लिये भारत में रहा हो, यह अवधि पूर्व में 182 दिन थी। 
  • NRIs को वोट देने का अधिकार होता है और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि उनकी केवल वही आय भारत में कर योग्य होती है, जो वे भारत में कमाते हैं। 

स्रोत: द हिंदू

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