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धार्मिक स्वतंत्रता

  • 03 Oct 2019
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

कर्नाटक उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने धार्मिक त्योहारों या समारोहों के लिये सड़कों और फुटपाथों पर अस्थायी संरचनाओं के निर्माण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 (article 25), सभी व्यक्तियों को अंतःकरण की स्वतंत्रता एवं धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार प्रदान करता है, लेकिन त्योहारों व उत्सव के लिये सार्वजनिक सड़क तथा फुटपाथ पर व्यक्ति को अतिक्रमण करने की अनुमति प्रदान नहीं करता है।
  • खंडपीठ ने कहा कि कर्नाटक नगर निगम अधिनियम, 1976 की धारा 288 (2) के तहत नगरपालिका प्राधिकरण धार्मिक त्योहारों को मनाने सहित किसी भी उद्देश्य के लिये अस्थायी रूप से सार्वजनिक सड़कों या फुटपाथों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दे सकता है।
  • कर्नाटक बेंच का यह आदेश सभी धर्मों और समुदायों के धार्मिक त्योहारों तथा कार्यों पर लागू होगा।
  • प्राधिकृत अधिकारियों को परिसर, सड़क और फुटपाथों का निरीक्षण करना चाहिये तथा यातायात विभाग से एक रिपोर्ट भी लेनी चाहिये जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिनियम की धारा 288 (2) के तहत अस्थायी संरचनाओं की अनुमति देने से यातायात में रुकावट उत्पन्न न हो।

कर्नाटक नगर निगम अधिनियम, 1976 की धारा 288

(Section 288 of the Karnataka Municipal Corporations Act,1976):

  • कर्नाटक नगर निगम अधिनियम की धारा 288 नगर निगम आयुक्त को अस्थायी सरंचनाओं के निर्माण हेतु अधिकार प्रदान करती है।
  • धारा 288 (2) नगर निगम आयुक्त को सड़क पर अस्थायी संरचनाओं के निर्माण हेतु लाइसेंस प्रदान करने की शक्ति देती है।

स्रोत: द हिंदू

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