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गोद लेने के लिये अब नहीं जाना होगा अदालत

  • 19 Jul 2018
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में बच्चों को तेज़ी से गोद लेने में सक्षम बनाने के लिये उचित संशोधन का अनुमोदन किया है। उल्लेखनीय है कि किशोर न्याय (बाल देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 को 15 जनवरी, 2016 से लागू किया गया था और किशोर न्याय (बाल देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2000 को निरस्त कर दिया गया था। 

प्रमुख बिंदु:

  • मंत्रिमंडल ने गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिये किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन का अनुमोदन किया है। 
  • वर्तमान में संभावित माता-पिता या बच्चे को गोद लेने के इच्छुक दंपत्ति को बच्चे को अपनाने के संबंध में अदालत का चक्कर काटना पड़ता है जिससे यह प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है।मंत्रिमंडल ने अपने अनुमोदन में यह प्रस्ताव दिया है कि अब गोद लेने के आदेश को पारित करने हेतु ज़िला मजिस्ट्रेट या ज़िला कलेक्टर अधिकृत होंगे।

संशोधन के लाभ:

  • जिला मजिस्ट्रेट को बाल देखभाल प्राधिकरण के रूप में मान्यता दी गई और गोद लेने के आदेश को जारी करने के लिये अधिकृत किया गया है।
  • गोद लेने के मामलों में अदालतों के स्तर पर लंबी प्रक्रिया देरी का सामना करना पड़ रहा था, वर्तमान प्रस्तावित संशोधन इस समस्या को सुलझाने में मददगार साबित होगा।
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