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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ब्रिटेन की ब्रेक्ज़िट समय-सीमा पर वार्ता

  • 16 Dec 2020
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (European Union) पोस्ट-ब्रेक्ज़िट व्यापार समझौते (Post-Brexit Trade Agreement) को निर्धारित अवधि यानी 31 दिसंबर, 2020 तक अंतिम रूप नहीं दे पाने की स्थिति में बातचीत को आगे जारी रखने के लिये तैयार हो गए हैं।

  • ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा ब्रेक्ज़िट समझौते (Brexit Agreement) को 11 महीने की तय अवधि (31 दिसम्बर 2020 तक) में अंतिम रूप देना है।
    • इस अवधि के दौरान ब्रिटेन, EU के सीमा शुल्क संघ (Customs Union) और एकल बाजार (Single Market) की गतिविधियों में भाग लेता रहेगा।
    • यह अवधि अचानक होने वाले नुकसान से बचाती है तथा एक सुव्यवस्थित ब्रेक्ज़िट प्रक्रिया द्वारा नागरिकों, व्यवसायों, सार्वजनिक प्रशासन और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को कम करती है।

प्रमुख बिंदु

  • पोस्ट-ब्रेक्ज़िट व्यापार समझौते की वार्ता में तीन महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बना हुआ है: लेवल प्लेइंग फील्ड (Level Playing Field- यह सामान्य नियमों और मानकों के लिये एक शब्द है), शासन (Governance) और मत्स्य क्षेत्र (Fisheries)

लेवल प्लेइंग फील्ड:

  • ब्रिटेन और EU के बीच व्यवसायों के लिये ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ और ‘यूरोपीय न्यायालय’ की भूमिका को सुनिश्चित करने के लिये क्या उपाय किये जाने चाहिये?
  • यूरोपीय संघ द्वारा एक ऐसे तंत्र की मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ है जो एक नियामक "लेवल प्लेइंग फील्ड" के माध्यम से व्यापार के लिये उचित प्रतिस्पर्द्धा बनाए रखने के साथ ही दोनों पक्षों के बीच शुल्क मुक्त व्यापार को बढ़ावा देगा।
  • ब्रिटेन ने "विकास तंत्र" (Evolution Mechanism) या "तुल्यता तंत्र" (Equivalence Mechanism) को मानने से इनकार कर दिया। यह तंत्र यूरोपीय संघ द्वारा ब्रिटेन को पर्यावरणीय नियम या श्रमिक अधिकार जैसे क्षेत्रों में अपने मानकों को कम करने से रोकता है।
  • ब्रिटेन ने एक ऐसे समझौते को अस्वीकार कर दिया जो उसे भविष्य में यूरोपीय संघ के नियमों से बाँध सकता था।

शासन:

  • ब्रिटेन यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से समझौता करना चाहता है।
  • हालाँकि यूरोपीय संघ ने पहले ही यह प्रस्ताव दिया था कि इस तंत्र को यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति द्वारा प्रशासित किया जाना चाहिये तथा  विवादों के समय मध्यस्थता हेतु पहल तथा वार्ताओं का आयोजन समिति के 27 सदस्य राज्यों के गुट द्वारा किया जाना चाहिये।

मत्स्य क्षेत्र:

  • यूरोपीय संघ के बेड़ों (Vessels) का ध्यान मछली पकड़ने के लिये ब्रिटेन के मत्स्य क्षेत्र पर केंद्रित किया गया है।
  • फ्राँस की इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका है, उसके अनुसार ब्रिटेन, EU को छोड़ने के मानदंडों को पूरा करने में विफल रहा है, अतः फ्राँस को इस क्षेत्र में 10 वर्षों के लिये और बना रहना होगा जो कि ब्रिटेन को मंज़ूर नहीं है।

विफलताओं के बाद संभावनाएँ:

  • EU से अलग होने से संबंधित ब्रिटेन का कोई समझौता नहीं होने की स्थिति में ब्रिटेन तुरंत ही एकल बाज़ार और सीमा शुल्क संघ की व्यवस्था को छोड़ देगा।
  • ऐसी स्थिति में ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के संस्थानों और यूरोपीय निकायों जैसे- यूरोपीय न्यायालय, कानून प्रवर्तन निकाय आदि को तुरंत छोड़ना होगा, साथ ही ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के बजट में योगदान नहीं देना पड़ेगा।
  • यदि 31 दिसंबर की समय-सीमा से पहले कोई समझौता नहीं होता है (No-Deal Brexit) तो 1 जनवरी से विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) के नियमों के आधार पर आगे का व्यापार होगा।
  • एक व्यापार समझौते की स्थिति में प्रशुल्क में वृद्धि, आयातकों और बॉर्डर पर चेकिंग के लिये कागज़ी कार्रवाई तथा ब्रिटेन व EU के बीच वस्तुओं (Goods) के आयात-निर्यात पर लगने वाले करों को WTO के नियमों के तहत लागू किया जाएगा।
  • यूरोप में व्यापार और व्यापार के संचालन पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा साथ ही यह ब्रिटेन तथा यूरोपीय संघ के संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

आगे की राह

  • ब्रिटेन को मध्यम मार्ग अपनाकर EU को छोड़ना चाहिये ताकि लोग एकाएक लिये गए फैसले से होने वाले नुकसान से बच सकें।
  • यूरोपीय संघ का मानना है कि इसके चलते सदस्य देशों की स्थिति एक साथ मज़बूत होगी और संसाधनों तथा पहलों (Initiatives) की पूलिंग (Pooling) आम लक्ष्यों को प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है। यहाँ तक कि अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर हो जाता है तो भी EU का विकास एक समूह के रूप में जारी रहेगा। इस बीच दुनिया के अन्य देशों को भू-स्थैतिक, शक्ति-संतुलन और राजनीति के बदलते स्वरुप के अनुसार स्वयं को समायोजित करना होगा।

स्रोत: द हिंदू

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