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नीट और तमिलनाडु का विरोध

  • 25 Jul 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

नीट, केंद्र और राज्य की शक्तियाँ

मेन्स के लिये:

केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन करने वाले राज्यों के परिणाम

चर्चा में क्यों?

NEET के खिलाफ कानूनी लड़ाई  तमिलनाडु द्वारा आज भी जारी है सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में NEET से और छूट देने से इनकार कर दिया था।

राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET):

  • परिचय:
  • ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:
    • भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा प्रतिस्थापित) ने वर्ष 2009 में NEET का प्रस्ताव रखा था।
    • अगले वर्ष MCI ने एक सामान्य प्रवेश परीक्षा के माध्यम से देश में MBBS और BDS प्रवेश को विनियमित करने के लिये एक अधिसूचना जारी की।
      • वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने NEET को असंवैधानिक करार दिया था और निर्णय दिया कि MCI के पास मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में प्रवेश को विनियमित करने के लिये अधिसूचना जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।
      • अप्रैल 2016 में न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे (जिन्होंने वर्ष 2013 में असहमति का फैसला सुनाया) की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने वर्ष 2013 के अपने निर्णय को दोहराया और अंततः NEET के संचालन को अनिवार्य कर दिया।
      • कुछ हितधारकों के अनुरोधों के बाद केंद्र सरकार ने मई 2016 में एक अध्यादेश जारी किया, जिसमें राज्य द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेजों को एक वर्ष के लिये सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के दायरे से छूट दी गई थी।
      • NEET को वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के आधार पर पूरे देश में लागू किया गया था।
        • तमिलनाडु सरकार ने शुरू से ही प्रवेश परीक्षा का पुरज़ोर विरोध किया और शुरूआत में नीट आधारित दाखिले से छूट मिल गई।

तमिलनाडु के विरोध का कारण:

  • तमिलनाडु ने NEET आधारित प्रवेश प्रक्रिया के प्रभावों का अध्ययन करने के लिये उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के राजन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया।
    • न्यायमूर्ति ए के राजन ने बताया कि:
      • मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिये एकमात्र मानदंड के रूप में NEET की शुरुआत ने उन सीटों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है जो ऐतिहासिक रूप से तमिलनाडु बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एग्जामिनेशन (TNBSE) उत्तीर्ण करने वाले छात्रों द्वारा प्राप्त किये गए थे।
        • इसने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों के लाभ के लिये काम किया।
      • NEET के बाद मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले अधिकांश छात्र कोचिंग लिये हुए थे।
        • किसी विषय को सीखने के विपरीत कोचिंग छात्रों को केवल विशेष परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देने के लिये तैयार करने पर केंद्रित होती है।
      • NEET की शुरुआत यह सुनिश्चित करने के लिये की गई थी कि केवल मेडिकल सीटों की तलाश करने वाले मेधावी छात्रों को ही मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिले और साथ ही कैपिटेशन फीस जमा करने की प्रथा को समाप्त किया जाए, जिसने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।
        • हालाँकि यह मानता है कि सभी उम्मीदवार एक ही स्थिति से और समान बाधाओं के साथ प्रतिस्पर्द्धा कर रहे हैं।
          • राजन की रिपोर्ट इसे एक त्रुटिपूर्ण दृष्टिकोण के रूप में उजागर करती है।
  • राजनेताओं का तर्क
    • NEET परीक्षा के दोहराव के कारण मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्रों का प्रतिशत वर्ष 2016-17 के 47% से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 71.42% हो गया।
    • दूसरी या तीसरी बार परीक्षा देना और प्रतिष्ठित मेडिकल सीट प्राप्त करने के लिये वित्तीय एवं सामाजिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।
      • यह गरीब सामाजिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों की पहुँच से बहुत दूर है।

NEET में संभावित चुनौतियाँ:

  • कोचिंग उद्योग:
    • इससे NEET छात्रों के उच्च माध्यमिक शिक्षा के प्रयासों पर बोझ पड़ता है, साथ ही यह कई अरब डॉलर के कोचिंग संस्थानों को बढ़ावा दे रहा है।
      • इसने उच्च माध्यमिक स्तर पर विषयों में महारत हासिल करने के बजाय 'बी-ऑल-एंड-ऑल' परीक्षा को पास करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।
  • संचालन
    • प्रतिरूपण के मामलों की रिपोर्ट के साथ NEET के संचालन में विसंगतियाँ रही हैं।
    • हाल ही में आयोजित NEET परीक्षा में भी CBI ने प्रतिरूपण रैकेट का खुलासा किया और आठ लोगों को गिरफ्तार किया।
      • इस तरह के रैकेट/गिरोह योग्यता की अवधारणा को ही चुनौती देते हैं।
  • आर्थिक असमानता:
    • यद्यपि इसने राज्य द्वारा संचालित संस्थानों में योग्यता आधारित प्रवेश सुनिश्चित की है जहाँ फीस कम है।
      • समृद्ध आर्थिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार NEET में खराब अंक प्राप्त करके भी डीम्ड विश्वविद्यालयों और निजी कॉलेजों में गरीब, निम्न एवं मध्यम वर्ग के परिवारों से संबंधित मेधावी उम्मीदवारों को छात्र बाहर कर रहे हैं।

वर्तमान स्थिति:

  • राष्ट्रपति ने वर्ष 2017 में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित दो विधेयकों को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया, जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिये NEET आधारित प्रवेश से छूट की मांग की गई थी।
  • वर्ष 2021 में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा केवल बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर MBBS/BDS पाठ्यक्रमों हेतु छात्रों को प्रवेश देने के लिये एक नया विधेयक अपनाया गया था।
    • फरवरी 2022 में राज्यपाल द्वारा विधेयक वापस किये जाने के बाद विधेयक को सदन द्वारा फिर से अपनाया गया और राज्यपाल को वापस भेज दिया गया।
    • उसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति के लिये गृह मंत्रालय (MHA) को भेज दिया गया है।
    • गृह राज्यमंत्री ने लोकसभा को सूचित किया कि नीट विरोधी विधेयक पर तमिलनाडु सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
    • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और आयुष मंत्रालय ने विधेयक पर टिप्पणियाँ प्रस्तुत की थीं जिन्हें तमिलनाडु राज्य सरकार के साथ उसकीिप्पणियों और स्पष्टीकरणों के लिये साझा किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

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