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भारतीय राजनीति

NEET का अखिल भारतीय कोटा

  • 30 Jul 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019

मेन्स के लिये:

चिकित्सा/दंत चिकित्सा पाठ्यक्रम में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) हेतु अखिल भारतीय कोटा ( All India Quota- AIQ) योजना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) हेतु 27% आरक्षण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) को 10% कोटा प्रदान करने का महत्त्व

चर्चा में क्यों?   

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 से चिकित्सा/दंत चिकित्सा पाठ्यक्रम में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) हेतु अखिल भारतीय कोटा ( All India Quota- AIQ) योजना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) हेतु 27% आरक्षण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) के लिये 10% कोटा की घोषणा की है। 

प्रमुख बिंदु: 

अखिल भारतीय कोटा (AIQ) योजना के बारे में:

  • वर्ष 1986 में AIQ योजना को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत पेश किया गया था ताकि किसी भी राज्य के छात्रों को दूसरे राज्य में स्थित मेडिकल कॉलेज में अध्ययन करने की स्थिति में डोमिसाइल से मुक्त तथा योग्यता के आधार पर अवसर (Domicile-Free Merit-Based Opportunities) प्रदान किया जा सके।
    • इसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों में UG सीटों का 15% और PG सीटों का 50% कोटा शामिल है।
    • राज्य के मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में सीटों का शेष हिस्सा अपने-अपने राज्यों में रहने वाले छात्रों के लिये आरक्षित है। 
  • जनवरी 2007 में अभय नाथ बनाम दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य ( Abhay Nath v University of Delhi and Others) केस में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि अनुसूचित जातियों के लिये  15% और अनुसूचित जनजातियों हेतु 7.5% आरक्षण AIQ में शामिल किया जाए।
    • वर्ष 2007 तक मेडिकल प्रवेश के लिये अखिल भारतीय कोटा के भीतर कोई आरक्षण लागू नहीं किया गया था।
  • जब वर्ष 2007 में केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम प्रभावी हुआ, तो ओबीसी को एकसमान 27% आरक्षण प्रदान किया गया, यह योजना सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में लागू की गई थी।
    • हालाँकि इसे राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की AIQ सीटों तक विस्तारित नहीं किया गया था।
    • संविधान (103वाँ संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत 10% ईडब्ल्यूएस कोटा भी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में लागू किया गया है, लेकिन राज्य संस्थानों के लिये राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) एआईक्यू में लागू नहीं किया गया है।
  • अब इस फैसले के बाद मेडिकल कॉलेजों में एआईक्यू के भीतर ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों के लिये मौजूदा शैक्षणिक वर्ष से आरक्षण की पेशकश की जाएगी।
    • इस निर्णय से दी गई श्रेणियों के तहत हज़ारों छात्रों को मदद मिलेगी।

Quota-Story

NEET के विषय में:

  • राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (National Eligibility-cum-Entrance Test- NEET) देश के सभी स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा तथा दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये प्रवेश परीक्षा है।
  • वर्ष 2016 तक अखिल भारतीय प्री-मेडिकल टेस्ट (All India Pre-Medical Test- AIPMT) मेडिकल कॉलेजों के लिये राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा थी।
    • जबकि राज्य सरकारें उन सीटों के लिये अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करती थीं, जिन पर अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा नहीं होती थी।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2016 में भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम (Indian Medical Council Act), 1956 की नई सम्मिलित धारा 10-D को बरकरार रखा, जो हिंदी, अंग्रेज़ी और विभिन्न अन्य भाषाओं में स्नातक स्तर एवं स्नातकोत्तर स्तर पर सभी चिकित्सा शैक्षणिक संस्थानों के लिये एक समान प्रवेश परीक्षा प्रदान करती है।
    • वर्तमान में भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम (National Medical Commission Act), 2019 द्वारा प्रतिस्थापित किये जाने के बाद निरस्त कर दिया गया है, जो 8 अगस्त, 2019 को अस्तित्व में आया था।
  • यह राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency) द्वारा आयोजित किया जाता है।

स्रोत: इंडियन एक्स्प्रेस

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