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भारतीय अर्थव्यवस्था

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन

  • 18 Jan 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

टेक्निकल टेक्सटाइल, टेक्निकल टेक्सटाइल से संबंधित योजनाएँ।

मेन्स के लिये:

भारतीय अर्थव्यवस्था में तकनीकी वस्त्र का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में कपड़ा मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन' कार्यक्रम के तहत स्पेशलिटी फाइबर और जियोटेक्सटाइल (Specialty fibers and Geotextiles) के क्षेत्रों में 30 करोड़ रुपए की 20 रणनीतिक अनुसंधान परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।

तकनीकी वस्त्र:

  • तकनीकी वस्त्र कार्यात्मक वस्त्र होते हैं जो ऑटोमोबाइल, सिविल इंजीनियरिंग और निर्माण, कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, औद्योगिक सुरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा इत्यादि सहित विभिन्न उद्योगों में अनुप्रयोग होते हैं।
    • तकनीकी वस्त्र उत्पाद की मांग किसी देश के विकास और औद्योगीकरण पर निर्भर करती है
  • प्रयोग के आधार पर 12 तकनीकी वस्त्र खंड हैं: एग्रोटेक, मेडिटेक, बिल्डटेक, मोबिल्टेक, क्लोथेक, ओईटेक, जियोटेक, पैकटेक, हॉमटेक, प्रोटेक, इंडुटेक और स्पोर्टेक।
    • उदाहरण:  मोबिलटेक (Mobiltech) वाहनों में सीट बेल्ट और एयरबैग, हवाई जहाज़ की सीट जैसे उत्पादों को संदर्भित करता है। जियोटेक (Geotech) जो कि संयोगवश सबसे तेज़ी से उभरता हुआ खंड है, का उपयोग मृदा आदि को जोड़े रखने में किया जाता है।

प्रमुख बिंदु:

  • परिचय
    • इसे वर्ष 2020 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा देश को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक नेता के रूप में स्थान प्रदान करने और घरेलू बाज़ार में तकनीकी वस्त्रों के उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से अनुमोदित किया गया था।
    • इसका लक्ष्य घरेलू बाज़ार के आकार को वर्ष 2024 तक 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है।
  • मंत्रालय:
    • कपड़ा मंत्रालय के तहत एक मिशन निदेशालय।
  • घटक: इसे वर्ष 2020-2021 से चार वर्षों के लिये लागू किया गया है और इसके चार घटक होंगे-
    • पहला घटक: यह 1,000 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ अनुसंधान, विकास एवं नवाचार पर ध्यान केंद्रित करेगा।
      • यह अनुसंधान फाइबर और भूमि, कृषि, चिकित्सा, खेल और मोबाइल वस्त्रों एवं बायोडिग्रेडेबल तकनीकी वस्त्रों के विकास में अनुप्रयोग-आधारित दोनों स्तरों पर होगा।
      • अनुसंधान गतिविधियों में स्वदेशी मशीनरी और प्रक्रिया के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    • दूसरा घटक: यह तकनीकी वस्त्रों के लिये बाज़ार के प्रचार और विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
    • तीसरा घटक: यह निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा, ताकि देश से तकनीकी कपड़ा निर्यात वर्ष 2021-2022 तक 14,000 करोड़ रुपए से 20,000 करोड़ रुपए तक पहुँच जाए और मिशन समाप्त होने तक प्रतिवर्ष 10% औसत वृद्धि सुनिश्चित करे।
      • तकनीकी वस्त्रों के लिये निर्यात प्रोत्साहन परिषद का गठन किया जाएगा।
    • चौथा घटक: यह शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास पर केंद्रित होगा।
      • मिशन तकनीकी वस्त्रों और इसके अनुप्रयोग क्षेत्रों से संबंधित उच्च इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी स्तरों पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देगा।
  • तकनीकी वस्त्र परिदृश्य:
    • भारत में तकनीकी वस्त्रों के विकास ने पिछले पाँच वर्षों में गति पकड़ी है, जो वर्तमान में 8% प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है।
      • अगले पाँच वर्षों के दौरान इस वृद्धि को 15-20% की सीमा तक ले जाने का लक्ष्य है।
    • मौजूदा विश्व बाज़ार 250 अरब अमेरिकी डॉलर का है और इसमें भारत की हिस्सेदारी 19 अरब अमेरिकी डॉलर है।
    • भारत इस बाज़ार में 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर (8% शेयर) के साथ एक महत्त्वाकांक्षी देश है।
      • सबसे बड़े देश यूएसए, पश्चिमी यूरोप, चीन और जापान (20-40%) हैं।
  • वस्त्र उद्योग से संबंधित पहल:
    • कपड़ा क्षेत्र के लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना: इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता के मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) कपड़े, वस्त्र और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
    • एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (Scheme for Integrated Textile Parks- SITP): यह योजना कपड़ा इकाइयों की स्थापना के लिये विश्व स्तरीय बुनियादी सुविधाओं के निर्माण हेतु सहायता प्रदान करती है।
    • समर्थ (कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु योजना): कुशल श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिये वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण हेतु  समर्थ योजना (SAMARTH Scheme) की शुरुआत की गई।
    • पूर्वोत्तर क्षेत्र वस्त्र संवर्द्धन योजना (North East Region Textile Promotion Scheme- NERTPS): यह कपड़ा उद्योग के सभी क्षेत्रों को बुनियादी ढांँचा, क्षमता निर्माण और विपणन सहायता प्रदान करके NER में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने से संबंधित योजना है।
    • पावर-टेक्स इंडिया: इसमें पावरलूम टेक्सटाइल में नए अनुसंधान और विकास, नए बाज़ार, ब्रांडिंग, सब्सिडी एवं श्रमिकों हेतु कल्याणकारी योजनाएंँ शामिल हैं।
    • रेशम समग्र योजना: यह योजना घरेलू रेशम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करती है ताकि आयातित रेशम पर देश की निर्भरता कम हो सके।
    • जूट आईकेयर: वर्ष 2015 में शुरू की गई इस पायलट परियोजना का उद्देश्य जूट की खेती करने वालों को रियायती दरों पर प्रमाणित बीज प्रदान करना और सीमित जल वाली परिस्थितियों में कई नई विकसित रेटिंग प्रौद्योगिकियों को लोकप्रिय बनाने के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है।
    • राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन: इसका उद्देश्य देश को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक नेता के रूप में स्थान देना और घरेलू बाज़ार में तकनीकी वस्त्रों के उपयोग को बढ़ाना है। इसका लक्ष्य वर्ष 2024 तक घरेलू बाज़ार का आकार 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक ले जाना है।

स्रोत- पी.आई.बी

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