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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

एक्सोप्लैनेट के आसपास ‘मून- फॉर्मिंग’ क्षेत्र

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  • 26 Jul 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये:

एक्सोप्लैनेट, सौरमंडल, PDS 70, ‘मून- फॉर्मिंग’ क्षेत्र

मेन्स के लिये:

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में  PDS 70 की खोज का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल (एक्सोप्लैनेट) से परे एक ग्रह के चारों ओर एक ‘मून- फॉर्मिंग’ क्षेत्र देखा है।

एक्सोप्लैनेट:

  • एक एक्सोप्लैनेट या एक्स्ट्रासोलर ग्रह सौरमंडल के बाहर स्थित एक ग्रह है। एक्सोप्लैनेट का पता लगाने की पुष्टि पहली बार वर्ष 1992 में हुई थी। अब तक 4,400 से अधिक एक्सोप्लैनेट की खोज की जा चुकी है।
  • एक्सोप्लैनेट को सीधे दूरबीन से देखना बहुत कठिन है। वे उन सितारों की अत्यधिक चमक से छिपे हुए हैं जिनकी वे परिक्रमा करते हैं। इसलिये खगोलविद एक्सोप्लैनेट का पता लगाने और उनका अध्ययन करने के लिये अन्य तरीकों का उपयोग करते हैं जैसे कि ग्रहों के उन सितारों पर पड़ने वाले प्रभावों को देखना जिनकी वे परिक्रमा करते हैं।

प्रमुख बिंदु:

परीक्षण एवं निष्कर्ष:

  • वैज्ञानिकों ने PDS 70 नामक एक ‘यंग स्टार’ की परिक्रमा करते हुए लगभग दो एक्सोप्लैनेट के आस-पास घूमने वाली एक डिस्क का पता लगाया।
    • PDS 70 पृथ्वी की अपेक्षा करीब 370 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।
    • एक प्रकाश वर्ष वह दूरी होती है जिस प्रकाश एक वर्ष में तय करता है (लगभग 9.5 ट्रिलियन किमी.)।
  • इसे एक परिग्रहीय डिस्क कहा जाता है और इन्हीं से चंद्रमाओं का जन्म होता है। PDS 70c (द एक्सोप्लैनेट) के चारों ओर की डिस्क, जिसका व्यास पृथ्वी से सूर्य की दूरी के बराबर है, में पृथ्वी के चंद्रमा के आकार के तीन चंद्रमाओं का निर्माण करने के लिये पर्याप्त द्रव्यमान मौजूद है।
    • PDS 70c हमारे सौरमंडल के नेपच्यून ग्रह के समान सूर्य से पृथ्वी की 33 गुना दूरी पर अपने तारे की परिक्रमा करता है।
  • नारंगी रंग का यह तारा PDS 70, लगभग हमारे सूर्य के द्रव्यमान के समान एवं लगभग 5 मिलियन वर्ष पुराना है। दोनों ग्रह और भी छोटे हैं। दोनों ग्रह एक गैस के विशालकाय बृहस्पति के समान (हालाँकि बड़े) हैं।
  • दोनों ग्रह अभी अपनी युवावस्था में हैं और एक गतिशील अवस्था में हैं जिसमें वे अभी भी अपने वायुमंडल को प्राप्त कर रहे हैं।

PDS

प्रयुक्त उपकरण:

  • इस दौरान चिली के अटाकामा रेगिस्तान में ‘अटाकामा लार्ज मिलीमीटर ऐरे (ALMA) वेधशाला का प्रयोग किया गया। यह पृथ्वी पर बनी अब तक की सबसे जटिल खगोलीय वेधशाला है।
    • उत्तरी अमेरिका, पूर्वी एशिया और यूरोप के वैज्ञानिकों के समूहों ने इस सफल वैज्ञानिक उपकरण को विकसित करने हेतु संयुक्त तौर पर कार्य किया।
  • यह खगोलीय वेधशाला दो आकारों के 66 उच्च-सटीक डिश एंटेना का उपयोग करती है: उनमें से 54 डिश एंटेना 12 मीटर के हैं, जबकि 12 डिश एंटेना 7 मीटर के हैं।

अन्य चंद्रमा बनाने वाले क्षेत्र:

  • अब तक कोई भी सर्कुलेटरी डिस्क नहीं मिली थी क्योंकि पीडीएस 70 की परिक्रमा करने वाले दो गैसीय ग्रहों को छोड़कर अन्य सभी ज्ञात एक्सोप्लैनेट पूर्णतः ‘परिपक्व’ और पूरी तरह से विकसित सौर प्रणालियों में हैं।
  • इसके अलावा हमारे सौरमंडल में शनि के प्रभावशाली वलय, ऐसा ग्रह जिसके चारों ओर 80 से अधिक चंद्रमा परिक्रमा करते हैं, एक मौलिक चंद्रमा बनाने वाली डिस्क के अवशेष का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ग्रह और चंद्रमा का निर्माण:

Terrestrial-Planet-Formation

  • अंतरतारकीय गैस और आकाशगंगाओं में बिखरी धूल के बादलों के मध्य तारे में जीवन के लिये विस्फोट होता है। एक नए तारे के चारों ओर घूमने वाली बची हुई सामग्री फिर ग्रहों में समाहित हो जाती है तथा  कुछ ग्रहों के चारों ओर परिक्रमा करने वाले डिस्क इसी प्रकार चंद्रमा का निर्माण करते हैं।
  • ग्रह निर्माण को रेखांकित करने वाले प्रमुख तंत्र को "कोर अभिवृद्धि" (Core Accretion) कहा जाता है।
    • कोर अभिवृद्धि (Core Accretion) धीरे-धीरे बड़े पिंडों में ठोस कणों के टकराव और जमाव से  होती है जब तक कि एक गैसीय आवरण की वृद्धि हेतु एक विशाल पर्याप्त ग्रह के भ्रूण (10-20 पृथ्वी द्रव्यमान) का निर्माण नहीं हो जाता है।
  •  इस परिदृश्य में बर्फ में लिपटे छोटे धूल के कण, धीरे-धीरे और अधिक बड़े आकार में अन्य कणों के साथ टकराव के माध्यम से वृद्धि करते हैं।
  • यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि कण एक ग्रहीय कोर के आकार में विकसित नहीं हो जाता है, इस बिंदु पर नवीन/युवा विकसित ग्रह में गैस को एकत्र  करने हेतु पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण क्षमता होती है और वह नवीन  ग्रह के वातावरण का निर्माण करती है।
  • कुछ नवजात ग्रह (Nascent Planets) अपने चारों ओर सामग्री की एक डिस्क (Disc of Material) को आकर्षित करते हैं, उसी प्रक्रिया के साथ जो एक तारे के चारों ओर ग्रहों को जन्म देते हैं जिससे ग्रहों के चारों ओर चंद्रमाओं का निर्माण होता है।

स्रोत: द हिंदू 

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