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केरल से सीख

  • 05 Jan 2019
  • 11 min read

चर्चा में क्यों?


हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार केरल ने प्राथमिक चिकित्सा के क्षेत्र में मिश्रित परिणाम के साथ अधिकतम सेवाओं और सुविधाओं को प्रदान करने का प्रयास किया है। ऐसी सेवाओं और सुविधाओं को देश के अन्य राज्यों में भी लागू करने की आवश्यकता है। यदि ऐसे ही प्रयास किये जायें तो अस्ताना घोषणा के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।

2016 में केरल में स्वास्थ्य देखभाल को सुनिश्चित करने के लिये अद्रम मिशन के हिस्से के रूप में वर्तमान और भविष्य की महामारी की स्थिति को संबोधित करने हेतु प्राथमिक देखभाल को फिर से डिज़ाइन करने का प्रयास किया गया था। केरल का अनुभव यह समझने में मदद कर सकता है कि अस्ताना घोषणा के उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिये क्या किया जाना चाहिये ।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की वास्तविक स्थिति और केरल के प्रयास

  • केरल ने प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं एवं सुविधाओं के क्षेत्र में प्रतिबद्धता एवं उत्तरदायित्व के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। ये सेवायें पर्याप्त मानव संसाधन के बिना प्रदान नहीं की जा सकती हैं।
  • भारतीय मानक के तहत 30,000 की आबादी के लिये एक प्राथमिक देखभाल टीम की मौजूदा व्यवस्था के साथ चिकित्सा सुविधा प्रदान करना लगभग असंभव है।
  • केरल ने लक्षित आबादी को 10,000 तक कम करने की कोशिश की। यहाँ तक ​​कि कम किया गया लक्ष्य इसके प्रभावी होने के लिये बहुत अधिक निकला।
  • केरल का अनुभव बताता है कि व्यापक स्तर पर प्राथमिक देखभाल सुनिश्चित करने के लिये 5,000 तक की आबादी के लिये कम से कम एक टीम होनी चाहिये।
  • चूँकि अधिक मानव संसाधनों की आपूर्ति सेवाओं की मांग उत्पन्न करेगी, इसलिये दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों, उपकरणों आदि की लागत में समान वृद्धि होगी। अतः व्यापक प्राथमिक देखभाल प्रदान करने की प्रतिबद्धता - यहाँ तक ​​कि सीमित अर्थों में, जिसमें इसे भारत में समझा जाता है - केवल तभी सार्थक होगा जब धन के आवंटन में पर्याप्त वृद्धि करने की प्रतिबद्धता भी हो।
  • अधिकांश अच्छे प्राथमिक देखभाल प्रणालियों में प्रैक्टिशनर अक्सर स्नातकोत्तर प्रशिक्षण प्राप्त होते हैं, ‘फैमिली मेडिसिन’ में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स बहुत कम संस्थानों तक सीमित है। यदि सेवाओं को मध्य-स्तर के सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान किया जाना है, जैसा कि कई राज्यों में योजना बनाई गई है, तो उनकी क्षमता का निर्माण चुनौतीपूर्ण होगा।
  • केरल ने विशिष्ट क्षेत्रों यथा – मधुमेह, मेलेटस, उच्च रक्तचाप, पुरानी प्रतिरोधी फुफ्फुसीय बीमारी, और अवसाद के प्रबंधन जैसे छोटे पाठ्यक्रमों के माध्यम से इसे प्राप्त करने की कोशिश की है।
  • अद्रम मिशन – केरल की सरकार ने बेहतर बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के साथ प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली प्रदान करने के लिये विभिन्न रणनीतियों को डिज़ाइन किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की महत्त्वाकांक्षी परियोजना अद्राम, इस क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की परिकल्पना करती है। इसका उद्देश्य है - रोगी-हितैषी क्षेत्र में कार्य करना।

भारत के संदर्भ में बात करें तो

  • प्राथमिक देखभाल प्रणाली केवल तभी प्रभावी होगी जब प्रदाता उन्हें सौंपी गई आबादी के स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी ग्रहण करेंगे और जनसंख्या अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिये उन पर निर्भर होगी।
  • दोनों रेफरल नेटवर्क (Referral network) और प्रणालीगत ढाँचे क्षमता, दृष्टिकोण और समर्थन से जुड़े हैं। यह तब तक संभव नहीं होगा जब तक कि वे निर्धारित संख्या प्रबंधनीय अनुपात के भीतर न हों।
  • भारत में प्राथमिक देखभाल पर चर्चा केवल सार्वजनिक क्षेत्र पर केंद्रित है, जबकि 60% से अधिक सुविधा देखभाल निजी क्षेत्र द्वारा प्रदान की जाती है।
  • ज़्यादातर देशों में निजी क्षेत्र प्राथमिक चिकित्सा देखभाल प्रदान करता है, हालाँकि इसका भुगतान बजट या बीमा से किया जाता है।
  • निजी क्षेत्र अच्छी गुणवत्ता वाले प्राथमिक देखभाल सुविधा प्रदान कर सकते हैं यदि वित्त पोषण की व्यवस्था हो और साथ ही यदि आवश्यक क्षमताओं को विकसित करने के लिये निजी क्षेत्र निवेश करने के लिये तैयार हो।
  • इस तरह की प्रणाली को तैयार करना और संचालित करना (बीमा से अधिक फंड प्रबंधन हालाँकि इसे बीमा से जोड़ा जा सकता है) एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन आवश्यक है कि अच्छी गुणवत्ता वाली प्राथमिक देखभाल सुविधा पूरी आबादी को उपलब्ध हो। केरल में ऐसी प्रणाली स्थापित करने के लिये बातचीत केवल प्रारंभिक चरण में है।
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की स्थिति हासिल करना भारत के लिये सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDG) में से एक है और वह प्रतिबद्ध सार्वभौमिक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के बिना संभव नहीं है।
  • प्राथमिक देखभाल सुनिश्चित करने में केरल के अनुभव से पता चलता है कि भारत को अस्ताना घोषणा में किये गए लक्ष्यों तक पहुँचने के लिये अपने पथ पर दृढ़ता से बढ़ना होगा।

अस्ताना घोषणा 2018


पिछले साल अक्तूबर 2018 में कज़ाकिस्तान के अस्ताना शहर में आयोजित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर वैश्विक सम्मेलन ने दुनिया भर में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देते हुए एक नई घोषणा का समर्थन किया। इस घोषणा में भारत सहित WHO के सभी 194 सदस्य देशों द्वारा हस्ताक्षर किये गए।

उद्देश्य


घोषणा का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर किये गए प्रयासों को बेहतर तरीके से क्रियान्वित करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर कोई स्वास्थ्य के उच्चतम संभव प्राप्य मानक का आनंद लेने में सक्षम हो।

लक्ष्य

  • अस्ताना घोषणा "व्यापक निवारक, प्रचारक, उपचारात्मक, पुनर्वास सेवाओं और उपशामक देखभाल के माध्यम से पूरे जीवनकाल में सभी लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखेगी"। प्राथमिक देखभाल सेवाओं की एक प्रतिनिधि सूची प्रदान की जाती है, लेकिन यह केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है।
  • गैर-संचारी और संचारी रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन, देखभाल और सेवाएँ जो मातृ, नवजात, बच्चों और किशोर स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं तथा उनमे सुधार लाती है।
  • इसमें मानसिक स्वास्थ्य, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अन्य महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • नई घोषणा ने सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, पेशेवर संगठनों, शिक्षाविदों और वैश्विक स्वास्थ्य एवं विकास संगठनों की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिये राजनीतिक प्रतिबद्धता को नवीनीकृत किया है। इसका उपयोग संयुक्त राष्ट्र महासभा की 2019 में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) पर उच्च स्तरीय बैठक को सूचित करने के लिये किया जाएगा।
  • नई घोषणा भी प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर 1978 की अल्मा-अता (Alma-Ata) घोषणा (1978 में कज़ाकिस्तान के अल्मा-अता (Alma-Ata) शहर में एक निर्णायक सम्मलेन का आयोजन हुआ था जिसने अस्ताना घोषणा की नींव रखी) को दर्शाती है कि हम कितनी दूर आए हैं और कितना काम किया जाना अभी बाकी है।
  • सम्मेलन के प्रतिभागियों (राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, गैर-सरकारी संगठनों, पेशेवर संगठनों, शिक्षाविदों, युवा पेशेवरों और युवा नेताओं, स्वास्थ्य चिकित्सकों और संयुक्त राष्ट्र के साझेदारों सहित) को घोषणा का समर्थन करने के लिये आमंत्रित किया गया था।
  • इस संबंध में एक वेब पोर्टल भी है जो व्यक्तियों, संगठनों और सरकारों को घोषणा के लिये समर्थन व्यक्त करने और नई घोषणा के प्रकाश में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के लिये उनकी परिचालन प्रतिबद्धता को व्यक्त करने हेतु उपलब्ध है।

स्रोत – द हिंदू, WHO की आधिकारिक वेबसाइट

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