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सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने हेतु ‘लक्ष्य’ कार्यक्रम लॉन्च

  • 16 Mar 2018
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

  • शिशुओं के जन्म के समय प्रसव कक्षों में देखभाल की गुणवत्ता बेहतर करना अत्यंत ज़रूरी है, ताकि माँ एवं नवजात शिशु दोनों के ही जीवन को कोई खतरा न हो।
  • 2014 में प्रकाशित एक लैंसेट अध्ययन के अनुसार जन्म के समय मृत्यु और विकलांगता का सर्वाधिक जोखिम रहता है।
  • इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘लक्ष्य (LaQshya)- प्रसव कक्ष गुणवत्ता सुधार पहल’ लॉन्च की गई है।

LaQshya-लक्ष्य

  • इस कार्यक्रम को प्रसव कक्ष और मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करने के लिये लॉन्च किया गया है।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य 18 महीनों के भीतर ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिये 'फास्ट-ट्रैक' हस्तक्षेपों को लागू करना है।
  • यह कार्यक्रम प्रसव कक्ष, मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर और प्रसूति संबंधी गहन देखभाल इकाइयों (ICUs) तथा उच्च निर्भरता इकाइयों (HDUs) में गर्भवती महिलाओं के लिये देखभाल की गुणवत्ता में सुधार करेगा।
  • लक्ष्य कार्यक्रम सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों, जिला अस्पतालों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में लागू किया जाएगा।
  • यह गर्भवती महिला और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म लेने वाले नवजातों को लाभान्वित करेगा।
  • इस पहल के तहत बहु-आयामी रणनीति अपनाई गई है जैसे-बुनियादी ढाँचे के उन्नयन में सुधार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य देखभाल कार्मिकों की क्षमता का निर्माण और प्रसव कक्ष में गुणवत्ता प्रक्रियाओं में सुधार करना।
  • जन्म देने वाली माताओं की गोपनीयता सुनिश्चित करना, प्रसव के दौरान एक आरामदायक स्थिति प्रदान करना, महिलाओं के साथ मौखिक या शारीरिक रूप से अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना और अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा किसी भी तरह के शुल्क या पारितोष की मांग नहीं किया जाना कार्यक्रम में शामिल कुछ दिशानिर्देश हैं।

लाभ

  • मातृ एवं नवजात शिशु रुग्णता और मृत्यु दर में कमी।
  • डिलीवरी के दौरान तथा तत्काल बाद की अवधि में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को सम्मानित मातृत्व देखभाल (RMC) प्रदान करेगी और अन्य लाभार्थियों की संतुष्टि में वृद्धि करेगी।

प्रसव कक्ष में देखभाल सुविधाओं का मूल्यांकन

  • प्रसूति कक्ष और मैटरनिटी OTs में गुणवत्ता सुधार का मूल्यांकन राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के माध्यम से किया जाएगा।
  • NQAS पर 70% अंक प्राप्त करने वाली प्रत्येक सुविधा को लक्ष्य प्रमाणित सुविधा के रूप में प्रमाणित किया जाएगा।
  • इसके अलावा NQAS स्कोर के अनुसार लक्ष्य प्रमाणित सुविधाओं की ब्रांडिंग की जाएगी। 90%, 80% और 70% से अधिक स्कोर करने वाली सुविधाओं को क्रमश: प्लैटिनम, गोल्ड और सिल्वर बैज दिये जाएंगे।
  • NQAS प्रमाणन प्राप्त करने वाली, परिभाषित गुणवत्ता संकेतकों और 80% संतुष्ट लाभार्थियों वाली सुविधाओं को मेडिकल कॉलेज अस्पताल, ज़िला अस्पताल और FRU के लिये क्रमशः 6 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

निष्कर्ष 

  • भारत ने पिछले एक दशक में मातृ मृत्यु दर (MMR) के मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति की है।
  • 2001-03 के 301 से घटकर 2011-13 में 167 होने से MMR में 45% की प्रभावशाली गिरावट आई है। प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर माताओं की होने वाली मृत्यु को MMR के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • इस प्रगति को जारी रखने के लिये मंत्रालय द्वारा भारतीय संदर्भ के अनुसार सुरक्षित प्रसव एप भी शुरू किया गया था जिसमें महत्त्वपूर्ण प्रसूति प्रक्रियाओं पर नैदानिक निर्देशात्मक फिल्में डाली गई हैं, जिनसे स्वास्थ्य कर्मचारियों को अपने कौशल को व्यवहार में लाने में मदद मिल रही है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सफल कार्यान्वयन से भी देश में संस्थागत प्रसव की दर में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिली हैं। लक्ष्य पहल भी इसी दिशा में उठाया गया एक प्रगतिशील कदम है। 
  • इससे प्रसव कक्षों और ऑपरेशन थियेटर में गर्भवती माँ की देखभाल बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही नवजात शिशुओं के जन्म के समय अवांछनीय प्रतिकूल स्थिति के उत्पन्न होने से बचा जा सकेगा।
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