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जीव विज्ञान और पर्यावरण

लद्दाख हिमालय की नदियाँ

  • 04 May 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये: 

हिमालयी क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख नदियाँ 

मेन्स के लिये:

WIHG द्वारा किये गये शोध का महत्त्व 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी’ (Wadia Institute of Himalayan Geology- WIHG) के वैज्ञानिकों द्वारा लद्दाख हिमालय क्षेत्र की नदियों में होने वाले 35000 वर्ष पुराने नदियों के कटाव/क्षरण (River Erosion) का अध्ययन किया गया। 

Ladhakh

मुख्य बिंदु:

  • अध्ययन के दौरान, उन चौड़ी घाटियों एवं हॉटस्पॉट की पहचान की गई जो बफर ज़ोन के रूप में कार्य करते हैं। 
  • अध्ययन में बताया गया कि किस तरह, शुष्क लद्दाख हिमालय क्षेत्र में बहने वाली नदियों द्वारा विभिन्न जलवायु परिवर्तनों के बाद भी स्वयं को लंबे समय तक  संचालित किया है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा नदियों के पानी एवं गाद/अवसाद/तलछट के मार्ग पर भी विचार किया गया जो एक महत्त्वपूर्ण खोज है क्योंकि वर्तमान समय में बुनियादी ढाँचे एवं स्मार्ट शहरों को विकसित करते समय इन सभी बातों पर ज़ोर दिया जा रहा है।
  • अध्ययन में हिमालय से निकलने वाली नदियों की पहचान कर इन नदियों के अपवाह क्षेत्रों में उन स्थानों को चिह्नित किया गया जो सर्वाधिक क्षरित होने के साथ-साथ गाद/तलछट से भर रहे हैं।
  • अधिकांश तलछट/गाद उच्च हिमालयी क्रिस्टलाइन से प्राप्त किये गए है जो ज़ास्कर के उद्गम क्षेत्र (Headwater Region) में स्थित हैं।
  • नदी के ऊपरी और निचले जलग्रहणों क्षेत्रों के बीच भू-आकृति अवरोध की उपस्थिति के बावजूद इन तलछट के क्षरण के लिये ज़िम्मेदार प्रमुख कारणों में पहला कारण था- डीग्लेसिएशन यानी अहिमाच्छादन तथा दूसरा, उद्गम स्थल में भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की वर्षा।
  • शोध में बताया गया कि, ऊपरी ज़ास्कर में 48 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैली पदम घाटी (Valley of Padam) की भू-आकृतियों यथा- घाटी के किनारों, जलोढ़ पंखों इत्यादि में विशाल मात्रा में अवसाद संग्रहित है।
  • जहाँ वर्तमान में, 0.96±0.10 घन किमी. तलछट घाटी के किनारों में संग्रहीत है और पिछले 32 हज़ार वर्षों से 2.29±0.11 घन किमी. तलछट पदम घाटी से नदियों द्वारा अपवाहित किया जा चुका है।

लद्दाख हिमालय: 

  • लद्दाख हिमालय, ग्रेटर हिमालय पर्वतमाला और काराकोरम पर्वतमाला के बीच एक अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित रेगिस्तान (High Altitude Desert) का निर्माण करता है।
  • लद्दाख हिमालय से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों में  सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ शामिल हैं।
  • ज़ास्कर नदी ऊपरी सिंधु अपवाह क्षेत्र की सबसे बड़ी सहायक नदियों में से एक है,जो अत्यधिक विकृत ज़ास्कर श्रेणियों के माध्यम से लंबवत बहती है। 
  • ज़ास्कर नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ डोडा (Doda) और त्सरापलिंगती चु (TsrapLingti Chu) हैं, जो ऊपरी घाटी में पदम गाँव में मिलती हैं। इनके मिलने के बाद ही ज़ास्कर नदी का निर्माण होता है। 

महत्त्व:

  • इस शोध के द्वारा परिवर्ती जलवायु क्षेत्र में भू-आकृतिक विकास को समझने में मदद मिलेगी। 
  • यह अध्ययन उन समस्याओं का समाधान करने में मददगार साबित होगा जो नदी-जनित क्षरण और तलछट जमाव से संबंधित है। ये नदी के मैदानों और डेल्टाओं को बनाने वाले मुख्य कारक भी हैं और जो विकसित सभ्यताओं के लिये एक उर्वरक भूमि प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।  

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी’

(Wadia Institute of Himalayan Geology- WIHG) 

  • वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, ‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग’ (Department of the Science & Technology) के अंतर्गत हिमालय के भू-विज्ञान (Geology of the Himalaya) के अध्ययन से संबंधित एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है।
  • इसकी स्थापना वर्ष1968 में उत्तराखंड, देहरादून में की गई।
  • यह हिमालय के भू-आवेग संबंधी विकास के संबंध में नई अवधारणाओं और मॉडलों के विकास के लिये अनुसंधान कार्यों को संपन्न करता है।
  • हिमालयी भू-विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों में कार्य करने वाले देश के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच अनुसंधान गतिविधियों हेतु समन्वय स्थापित करना।

स्रोत: पी.आई.बी

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